Home » टॉप स्टोरी » शिक्षा मंत्री मदन दिलावर की संस्था पर करोड़ों के घोटाले का आरोप, डोटासरा ने खोली ‘भ्रष्टाचार फाइल’

शिक्षा मंत्री मदन दिलावर की संस्था पर करोड़ों के घोटाले का आरोप, डोटासरा ने खोली ‘भ्रष्टाचार फाइल’

– फर्जी हस्ताक्षर, अवैध वसूली और कमीशनखोरी, शिक्षा विभाग पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप, भाजपा सरकार कठघरे में

जयपुर। राजस्थान की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी बवाल खड़ा हो गया है। राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा Govind Singh Dotasra ने शिक्षा मंत्री मदन दिलावर Madan Dilawar से जुड़ी हिन्दुस्तान स्काउट एंड गाइड संस्था पर गंभीर वित्तीय अनियमितताओं, फर्जीवाड़े और भ्रष्टाचार के आरोप लगाकर भाजपा सरकार को सीधे कठघरे में खड़ा कर दिया है। जयपुर स्थित कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में डोटासरा ने दस्तावेज, कथित बैंक ट्रांजेक्शन, यूपीआई रसीदें और ऑडियो क्लिप सार्वजनिक करते हुए दावा कियाकि मंत्री से जुड़ी संस्था में शिविरों, नियुक्तियों और प्रशिक्षण कार्यक्रमों के नाम पर लाखों रुपए की अवैध वसूली की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि संस्था के कई पदाधिकारियों ने सरकारी संरक्षण में निजी खातों में पैसा ट्रांसफर करवाया और विरोध करने वालों को धमकाया गया।

 

“मंत्री की संस्था में भ्रष्टाचार का संरक्षण”: डोटासरा

डोटासरा ने कहा कि हिन्दुस्तान स्काउट एंड गाइड संस्था राजस्थान कॉपरेटिव सोसायटी एक्ट के तहत पंजीकृत है और वर्तमान में संस्था के अध्यक्ष स्वयं मंत्री मदन दिलावर हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि संस्था में पारदर्शिता और नियमों की खुलेआम अनदेखी की गई। कांग्रेस नेता ने कहा कि संस्था में परिवारवाद तक देखने को मिला, जहां संस्था के सचिव नरेन्द्र औदिच्य ने अपनी पुत्रवधु को जिला ऑर्गेनाइजर बना दिया। डोटासरा के मुताबिक, यह मामला सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही का नहीं बल्कि “संगठित आर्थिक घोटाले” का है।

 

यह भी देखें: ममता के ‘सबसे भरोसेमंद साथी’ से बंगाल के CM तक: कैसे सुवेन्दु अधिकारी ने बदल दी पश्चिम बंगाल की राजनीति

 

“पांच दिन का शिविर, चला सिर्फ एक दिन”

कांग्रेस ने सबसे बड़ा आरोप जयपुर के चाकसू में आयोजित कथित पांच दिवसीय शिविर को लेकर लगाया। डोटासरा ने दावा किया कि शिविर पांच दिन का दिखाया गया, छात्रों और स्कूलों से शुल्क वसूला गया, लेकिन वास्तविकता में शिविर केवल एक दिन आयोजित हुआ, वह भी गैर-आवासीय। उन्होंने कहा कि उस समय 10वीं बोर्ड परीक्षाएं चल रही थीं, ऐसे में आवासीय शिविर आयोजित होना ही संभव नहीं था। इसके बावजूद पूरे पांच दिन का खर्च दिखाकर भुगतान लिया गया।

 

रिटायर्ड अधिकारी के “फर्जी हस्ताक्षर” का आरोप

डोटासरा ने प्रेस वार्ता में दस्तावेज दिखाते हुए कहा कि जिस जिला शिक्षा अधिकारी राजेन्द्र हंस के हस्ताक्षर रिपोर्ट में दर्शाए गए, वे मई 2024 में ही सेवानिवृत्त हो चुके थे। कांग्रेस ने इसे “सीधा फर्जीवाड़ा और दस्तावेजी जालसाजी” बताते हुए कहा कि यदि यह सही है तो यह केवल प्रशासनिक गड़बड़ी नहीं बल्कि आपराधिक मामला बनता है।

 

यह भी देखें: राजस्थान के शहरों का होगा मेकओवर, बनेंगे यूरोप जैसे स्मार्ट शहर

 

निजी खातों में लाखों रुपए ट्रांसफर कराने का दावा

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान डोटासरा ने कई नाम लेते हुए आरोप लगाया कि संस्था के अधिकारियों ने कर्मचारियों और जिला प्रभारियों से अपने निजी खातों में पैसा ट्रांसफर करवाया। उन्होंने कहा कि अलग-अलग व्यक्तियों से लाखों रुपए यूपीआई और बैंक ट्रांसफर के जरिए लिए गए, कुल मिलाकर लगभग 23 लाख रुपए निजी खातों में जमा हुए, यह राशि प्रशिक्षण, नियुक्ति, प्रमाणपत्र और अन्य गतिविधियों के नाम पर ली गई। डोटासरा ने आरोप लगाया कि जब कुछ कर्मचारियों ने सवाल उठाए तो उन्हें पद से हटा दिया गया और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया।

 

“CSR फंड में भी खेल”

कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष ने दावा किया कि-

-CSR फंड के लगभग 60 लाख रुपए फर्जी बिल-वाउचर के जरिए खर्च दिखाए गए।
– बिना प्रशिक्षण दिए प्रमाणपत्र बांटे गए।
– भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण नियमों का उल्लंघन हुआ।
– बिना विज्ञप्ति के गुप्त नियुक्तियां की गईं।

उन्होंने आरोप लगाया कि संस्था में “कमीशनखोरी का सिस्टम” बना दिया गया था, जहां जिला स्तर पर जारी बजट का हिस्सा निजी खातों में पहुंचाया जाता था।

 

यह भी देखें: ₹20 हजार करोड़ के जल जीवन मिशन घोटाले में पूर्व मंत्री महेश जोशी गिरफ्तार

 

सरकार और मंत्री पर सीधे सवाल

डोटासरा ने भाजपा सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि यदि संस्था के सेवा नियम बने ही नहीं थे, जैसा मंत्री पक्ष दावा कर रहा है, तो फिर-


-संस्था को करोड़ों रुपए का बजट कैसे स्वीकृत हुआ?
-सरकारी दस्तावेज में संस्था का उल्लेख कैसे हुआ?
– डेढ़ करोड़ रुपए जारी कैसे किए गए?

उन्होंने कहा कि सरकारी प्रगति प्रतिवेदन में संस्था का उल्लेख और वित्तीय मदों का विवरण दर्ज होना यह साबित करता है कि सरकार स्वयं संस्था को आधिकारिक मान्यता और संरक्षण दे रही थी।

 

“मंत्री के PA की मौजूदगी भी सवालों में”

डोटासरा ने यह भी दावा किया कि शिक्षा मंत्री के निजी सहायक हर शिविर में मौजूद रहते थे, जबकि उनकी वहां कोई अधिकृत भूमिका नहीं थी। कांग्रेस ने इसे “राजनीतिक संरक्षण” का संकेत बताया। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि मंत्री निर्दोष हैं तो फिर निष्पक्ष जांच से डर क्यों है?

 

यह भी देखें: व्हाट्सएप DP से 5.30 करोड़ की ठगी, जयपुर पुलिस का बड़ा एक्शन, 17 साइबर ठग दबोचे

 

भाजपा-कांग्रेस के बीच बढ़ेगा सियासी टकराव

राजस्थान की राजनीति में यह मामला आने वाले दिनों में बड़ा मुद्दा बन सकता है। कांग्रेस इसे “शिक्षा विभाग का संगठित भ्रष्टाचार” बताकर सरकार को घेरने की तैयारी में है, वहीं भाजपा की ओर से अब तक इन आरोपों पर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
डोटासरा ने चेतावनी दी कि शिक्षा विभाग से जुड़े कई और मामलों के दस्तावेज कांग्रेस के पास हैं और आने वाले विधानसभा सत्र में सरकार की “गवर्नेंस की पोल” खोली जाएगी।

 

निष्पक्ष जांच की मांग तेज

कांग्रेस ने पूरे मामले की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने की मांग की है। डोटासरा ने कहा कि यदि सरकार पारदर्शिता में विश्वास करती है तो पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराकर सच्चाई जनता के सामने रखे। अब देखना होगा कि भाजपा सरकार इन गंभीर आरोपों पर क्या कदम उठाती है और क्या यह मामला राजस्थान की राजनीति में नया बड़ा विवाद बनता है।

 

ऐसी ही खबरों के लिए देखें: Democraticbharat.com

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments
0
Would love your thoughts, please comment.x
()
x