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राजस्थान के अस्पतालों में हाई अलर्ट, इमरजेंसी-ICU में प्रोटोकॉल तोड़ा तो नपेंगे जिम्मेदार

-कोटा हादसे के बाद हेल्थ विभाग का बड़ा एक्शन, गायब मिले डॉक्टर तो होगी कठोर कार्रवाई


जयपुर।
राजस्थान चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने कोटा में प्रसूताओं की मौत और स्वास्थ्य बिगड़ने के मामले के बाद प्रदेशभर के सरकारी अस्पतालों में सख्ती बढ़ा दी है। सरकार ने साफ कर दिया है कि इमरजेंसी, ऑपरेशन थिएटर (OT), ICU और अन्य संवेदनशील यूनिट्स में इलाज से जुड़े प्रोटोकॉल की अनदेखी अब किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। लापरवाही मिलने पर डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ, यूनिट हेड और अस्पताल प्रभारियों पर सीधी कार्रवाई होगी। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने शनिवार को शासन सचिवालय में हुई हाईलेवल बैठक में अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ड्यूटी टाइम में सीनियर डॉक्टरों सहित पूरा स्टाफ अस्पताल में मौजूद रहे। उन्होंने चेतावनी दी कि लापरवाही बरतने वाले कार्मिकों के खिलाफ सेवा नियमों के तहत कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

 

कोटा घटना के बाद सरकार सख्त

बैठक में गायत्री राठौड़ ने कहा कि कोटा में प्रसूताओं की मौत और स्वास्थ्य बिगड़ने की घटना बेहद गंभीर और दुर्भाग्यपूर्ण है। मामले की हर एंगल से निष्पक्ष जांच की जा रही है और प्रथम दृष्टया दोषी पाए गए चिकित्सकों तथा नर्सिंग कार्मिकों पर कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है। उन्होंने दो टूक कहा कि भविष्य में यदि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति हुई तो संबंधित संस्थान प्रभारी और यूनिट हैड सीधे जिम्मेदार होंगे।

 

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ICU, OT और इमरजेंसी में होगा सख्त स्टरलाइजेशन

सरकार ने सभी अस्पताल प्रभारियों को निर्देश दिए हैं कि ICU, इमरजेंसी यूनिट और ऑपरेशन थिएटर की व्यवस्थाओं की नियमित और गहन जांच की जाए। यह सुनिश्चित किया जाए कि इन संवेदनशील स्थानों पर नियमित रूप से स्टरलाइजेशन हो, ताकि संक्रमण फैलने की कोई आशंका न रहे। इलाज में उपयोग होने वाले उपकरणों, मशीनों और मेडिकल इंस्ट्रूमेंट्स का भी तय प्रोटोकॉल के अनुसार स्टरलाइजेशन अनिवार्य किया गया है।अस्पताल प्रभारियों और यूनिट हैड को लगातार मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए गए हैं।

 

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राज्य स्तर से होगी निगरानी

प्रमुख शासन सचिव ने कहा कि राज्य स्तर से विशेष मॉनिटरिंग टीमें समय-समय पर अस्पतालों का निरीक्षण करेंगी। जहां भी लापरवाही या कमी मिलेगी, वहां तत्काल कार्रवाई होगी। जिन अस्पतालों में सुधार की जरूरत होगी, वहां तुरंत व्यवस्थाएं दुरुस्त की जाएंगी। जरूरत पड़ने पर आरएमआरएस फंड का उपयोग भी किया जाएगा। सरकार ने दवा भंडारण व्यवस्था को लेकर भी सख्ती दिखाई है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि अस्पतालों में दवाओं के स्टोरेज के लिए तय मानकों की सख्ती से पालना सुनिश्चित की जाए।

सीनियर डॉक्टरों की मौजूदगी होगी अनिवार्य

बैठक में यह भी तय किया गया कि OT, ICU, इमरजेंसी और अन्य संवेदनशील विभागों में सीनियर डॉक्टरों की मौजूदगी अनिवार्य होगी। अस्पतालों में चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ के ड्यूटी रजिस्टर का नियमित संधारण किया जाएगा और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सभी कार्मिक समय पर अस्पताल पहुंचें और पूरी ड्यूटी के दौरान मौजूद रहें। बैठक में बाबूलाल गोयल, पुखराज सेन, टी. शुभमंगला, निधि पटेल, रवि प्रकाश शर्मा, जय सिंह और अजय फाटक सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

 

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