JJM घोटाले में बड़ा एक्शन: थाईलैंड से लौटते ही संजय बड़ाया गिरफ्तार, 20 हजार करोड़ के टेंडरों में भ्रष्टाचार की जांच तेज
जयपुर। राजस्थान के बहुचर्चित जल जीवन मिशन (JJM) घोटाले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने बड़ा एक्शन लेते हुए आरोपी संजय बड़ाया को गिरफ्तार कर लिया है। एसीबी ब्यूरो में दर्ज प्रकरण संख्या 245/2024 में जारी लुकआउट सर्कुलर (LOC) के आधार पर संजय बड़ाया को थाईलैंड यात्रा से लौटने के दौरान दिल्ली एयरपोर्ट पर डिटेन किया गया। इसके बाद एसीबी की विशेष टीम उसे जयपुर स्थित ब्यूरो मुख्यालय लेकर आई, जहां पूछताछ के बाद गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया गया। कोर्ट ने आरोपी को 13 मई 2026 तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया है।
वहीं, इसी मामले में पूर्व मंत्री महेश जोशी को भी सोमवार को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। एसीबी का कहना है कि मामले में अनुसंधान लगातार जारी है और आने वाले दिनों में कई और बड़े खुलासे हो सकते हैं।
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फर्जी प्रमाण पत्रों से हासिल किए 960 करोड़ के टेंडर
एसीबी जांच में सामने आया है कि मैसर्स श्री गणपति ट्यूबवेल कंपनी के प्रोपराइटर महेश मित्तल और मैसर्स श्री श्याम ट्यूबवेल कंपनी के प्रोपराइटर पदमचंद जैन ने इरकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड के फर्जी कार्यपूर्णता प्रमाण पत्र तैयार किए। इन दस्तावेजों के आधार पर राजस्थान में विभिन्न परियोजनाओं के करीब 960 करोड़ रुपए के टेंडर हासिल किए गए।
जांच एजेंसी के अनुसार, तत्कालीन पीएचईडी मंत्री महेश जोशी, तत्कालीन अतिरिक्त मुख्य सचिव सुबोध अग्रवाल, विभागीय मुख्य अभियंताओं, अतिरिक्त मुख्य अभियंताओं, संवेदकों और निजी व्यक्तियों ने कथित रूप से मिलकर इस पूरे नेटवर्क को संचालित किया। इसमें संजय बड़ाया की भूमिका भी बेहद अहम बताई जा रही है।
20 हजार करोड़ के मेजर प्रोजेक्ट्स पर भी सवाल
एसीबी की जांच में यह भी सामने आया है कि 50 करोड़ रुपए से अधिक की बड़ी परियोजनाओं में नियमों के विपरीत “साइट विजिट सर्टिफिकेट” की अनिवार्यता जोड़ी गई। आरोप है कि इससे बोली लगाने वालों की पहचान पहले ही उजागर हो जाती थी और टेंडर प्रक्रिया में सांठगांठ आसान हो जाती थी।
जांच एजेंसी का दावा है कि इस कथित टेंडर पुलिंग के कारण परियोजनाओं में 30 से 40 प्रतिशत तक अप्रत्याशित प्रीमियम दरें मंजूर की गईं। इन परियोजनाओं की कुल राशि करीब 20 हजार करोड़ रुपए बताई जा रही है। एसीबी के अनुसार, विभागीय अधिकारियों ने इन ऊंची दरों को मंजूरी देकर पद का दुरुपयोग किया और बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया।
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महेश जोशी के करीबी बताए जा रहे संजय बड़ाया
जांच में सामने आया है कि संजय बड़ाया तत्कालीन मंत्री महेश जोशी के बेहद करीबी थे और विभागीय कामकाज में सक्रिय हस्तक्षेप रखते थे। एसीबी को ठेकेदारों और निजी व्यक्तियों के साथ कथित रिश्वत लेनदेन के संकेत भी मिले हैं। इसके अलावा जांच एजेंसी का कहना है कि जल जीवन मिशन में भ्रष्टाचार को अंजाम देने के लिए पीएचईडी अधिकारियों पर तबादलों और विभागीय कार्रवाई का दबाव बनाया गया। ट्रांसफर-पोस्टिंग के बदले मोटी रिश्वत लेने के आरोप भी सामने आए हैं।
अब तक 12 आरोपी गिरफ्तार
इस मामले में अब तक कुल 12 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें पूर्व मंत्री महेश जोशी, सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी सुबोध अग्रवाल, कई मुख्य अभियंता, अधीक्षण अभियंता और निजी व्यक्ति शामिल हैं। गिरफ्तार आरोपियों में दिनेश गोयल, के.डी. गुप्ता, सुभांशु दीक्षित, सुशील शर्मा, नीरज कुमार, विशाल सक्सेना, अरुण श्रीवास्तव, डी.के. गौड़, महेंद्र प्रकाश सोनी और मुकेश पाठक के नाम भी शामिल हैं।
तीन आरोपी अब भी फरार
एसीबी ने बताया कि मामले में तीन आरोपी अब भी फरार हैं। इनमें तत्कालीन अधीक्षण अभियंता मुकेश गोयल, तत्कालीन अधिशाषी अभियंता जितेंद्र शर्मा और निजी व्यक्ति सजीव गुप्ता शामिल हैं। अदालत ने इन तीनों के खिलाफ स्थायी गिरफ्तारी वारंट जारी किए हैं और उन्हें उद्घोषित अपराधी घोषित करवाने की प्रक्रिया चल रही है।
हाईकोर्ट से पांच आरोपियों को राहत
मामले में पांच अन्य आरोपियों को राजस्थान हाईकोर्ट से गिरफ्तारी पर राहत मिली हुई है। हालांकि एसीबी का कहना है कि तकनीकी और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर जांच लगातार आगे बढ़ाई जा रही है।
एसआईटी कर रही गहन जांच
एसीबी के अतिरिक्त महानिदेशक स्मिता श्रीवास्तव की निगरानी में गठित विशेष जांच दल (SIT) इस पूरे मामले की जांच कर रही है। उप महानिरीक्षक पुलिस डॉ. रामेश्वर सिंह के निर्देशन में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक हिमांशु, महावीर प्रसाद शर्मा और भूपेंद्र सहित अधिकारियों की टीम दस्तावेजों और तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण कर रही है। एसीबी का कहना है कि आरोपी संजय बड़ाया से विस्तृत पूछताछ की जा रही है और जांच के दौरान कई अन्य अहम नाम सामने आने की संभावना है।
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