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टोंक में गरजे नरेश मीना, बोले-वादे करके गायब हो गए मंत्री, 7 दिन में पानी दो, नहीं तो धरना होगा

-उपचुनाव के बाद फिर एक्टिव हुए नरेश मीना, टोंक कलेक्ट्रेट पहुंच भाजपा सरकार को घेरा

टोंक। नरेश मीना एक बार फिर राजनीतिक रूप से सक्रिय हो गए हैं। देवली-उनियारा विधानसभा उपचुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी रहे नरेश मीना सोमवार को अपने सैकड़ों समर्थकों के साथ टोंक जिला कलेक्ट्रेट पहुंचे, जहां उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में गहराए पेयजल संकट को लेकर जिला प्रशासन और राज्य सरकार पर निशाना साधा। नरेश मीना ने जिला कलेक्टर टीना डाबी Tina Dabi से मुलाकात कर देवली-उनियारा क्षेत्र के कई गांवों में पेयजल संकट, टैंकर व्यवस्था और ईआरसीपी परियोजना से जुड़ी समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा। साथ ही, प्रशासन को 7 दिन का अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी कि यदि तय समय में जमीन पर काम शुरू नहीं हुआ तो वे धरने पर बैठेंगे।

 

कलेक्ट्रेट परिसर में शक्ति प्रदर्शन, लोगों की सुनी शिकायतें

नरेश मीना अपने समर्थकों के साथ टोंक कलेक्ट्रेट पहुंचे। इस दौरान उन्होंने परिसर में मौजूद ग्रामीणों और आमजन से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। राजनीतिक जानकार इसे उपचुनाव के बाद मीना की “ग्राउंड कनेक्ट राजनीति” के तौर पर देख रहे हैं। मीना ने इस पूरे कार्यक्रम को केवल ज्ञापन तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे जनसुनवाई और सरकार के खिलाफ जनभावना तैयार करने के मंच में बदलने की कोशिश की।

 

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“चुनाव में मंत्री घूम रहे थे, अब कोई नजर नहीं आता”

मीडिया से बातचीत में नरेश मीना ने भाजपा सरकार पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा कि उपचुनाव के दौरान सरकार के ऊर्जा मंत्री और जलदाय मंत्री लगातार क्षेत्र में घूम रहे थे और बड़े-बड़े वादे कर रहे थे, लेकिन चुनाव खत्म होते ही जनता को उसके हाल पर छोड़ दिया गया।

 

नरेश मीना ने कहा कि चुनाव के समय मंत्री गांव-गांव जाकर वादे कर रहे थे। अब ना मंत्री दिखाई दे रहे हैं और ना ही क्षेत्रीय विधायक। लोग पानी के लिए परेशान हैं, लेकिन सरकार सुनवाई नहीं कर रही। मीना ने खास तौर पर जलदाय मंत्री कन्हैया चौधरी Kanhaiyalal Choudhary को निशाने पर लेते हुए कहा कि टोंक उनका गृह जिला है, इसके बावजूद ग्रामीण पेयजल संकट से जूझ रहे हैं।

 

 

भाजपा सरकार को घेरने की रणनीति?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नरेश मीना अब खुद को केवल उपचुनाव प्रत्याशी तक सीमित नहीं रखना चाहते, बल्कि क्षेत्र में “जनसंघर्ष वाले नेता” की छवि बनाने की कोशिश कर रहे हैं। देवली-उनियारा उपचुनाव के दौरान मीना ने आक्रामक प्रचार शैली और स्थानीय मुद्दों को लेकर काफी चर्चा बटोरी थी। अब चुनाव खत्म होने के बाद भी लगातार जनता के मुद्दों पर सक्रिय रहकर वे भाजपा और स्थानीय विधायक पर दबाव बनाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि पेयजल संकट जैसे मुद्दे ग्रामीण इलाकों में बेहद संवेदनशील होते हैं और ऐसे मामलों में सरकार को घेरकर राजनीतिक जमीन मजबूत करने की कोशिश की जाती है।

 

टीना डाबी की कार्यशैली की तारीफ भी की

एक ओर जहां नरेश मीना ने सरकार और मंत्रियों पर हमला बोला, वहीं दूसरी ओर जिला कलेक्टर टीना डाबी Tina Dabi की कार्यशैली की खुलकर तारीफ की। उन्होंने कहा-

“पश्चिमी राजस्थान में उन्होंने जिस तरह काम किया, वहां के लोग आज भी उनकी तारीफ करते हैं। आज मेरी उनसे सकारात्मक बातचीत हुई है। उन्होंने भरोसा दिलाया है कि पेयजल समस्याओं का जल्द समाधान किया जाएगा।”

राजनीतिक तौर पर इसे “प्रशासन और सरकार” के बीच अलग संदेश देने की रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है। यानी मीना सीधे प्रशासन को कठघरे में खड़ा करने के बजाय सरकार और जनप्रतिनिधियों को केन्द्र में रखना चाहते हैं।

 

प्रशासन बोला-शिकायतों पर होगी कार्रवाई

 


वहीं अतिरिक्त जिला कलेक्टर रामरतन सौंखरिया Ramratan Sonkariya ने कहा कि नरेश मीना ने पेयजल और ईआरसीपी परियोजना से जुड़ी समस्याओं का ज्ञापन दिया है, जिस पर कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने कहा कि प्रशासन पहले से ही रात्रि चौपाल और जनसुनवाई के जरिए समस्याओं का समाधान कर रहा है, लेकिन जिन गांवों के नाम विशेष रूप से बताए गए हैं, वहां प्राथमिकता से जांच और समाधान करवाया जाएगा।

 

देवली-उनियारा की राजनीति में बढ़ेगी हलचल

नरेश मीना की सक्रियता ने देवली-उनियारा क्षेत्र की राजनीति में फिर हलचल बढ़ा दी है। उपचुनाव के बाद माना जा रहा था कि क्षेत्रीय राजनीति शांत हो जाएगी, लेकिन पेयजल संकट को लेकर मीना की आक्रामक सक्रियता ने साफ संकेत दिया है कि आने वाले समय में वे स्थानीय मुद्दों पर सरकार को लगातार घेरने की रणनीति अपनाएंगे। अब नजर इस बात पर रहेगी कि प्रशासन अगले सात दिन में कितना काम करता है और क्या नरेश मीना वास्तव में धरना आंदोलन की राह पकड़ते हैं।

 

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