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₹20 हजार करोड़ के जल जीवन मिशन घोटाले में पूर्व मंत्री महेश जोशी गिरफ्तार

-फर्जी सर्टिफिकेट, करोड़ों के टेंडर और बड़ा खेल, महेश जोशी एसीबी रिमांड, कई अफसर और ठेकेदार पहले ही गिरफ्तार

 

जयपुर। राजस्थान में बहुचर्चित जल जीवन मिशन घोटाले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने बड़ा कदम उठाते हुए पूर्व पीएचईडी मंत्री महेश जोशी को बुधवार को जयपुर स्थित उनके आवास से हिरासत में लेकर गिरफ्तार कर लिया। एसीबी ने उन्हें अदालत में पेश किया, जहां से 11 मई 2026 तक एसीबी रिमांड मंजूर किया गया है। यह कार्रवाई एसीबी ब्यूरो में दर्ज प्रकरण संख्या 245/2024 के तहत की गई है, जिसमें जल जीवन मिशन के तहत हजारों करोड़ रुपए के टेंडरों में कथित भ्रष्टाचार, फर्जी दस्तावेजों और टेंडर सेटिंग का खुलासा हुआ है।

 

फर्जी सर्टिफिकेट से हासिल किए ₹960 करोड़ के टेंडर

एसीबी जांच में सामने आया कि मैसर्स श्री गणपति ट्यूबवैल कम्पनी और मैसर्स श्री श्याम ट्यूबवैल कम्पनी ने इरकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड के कथित फर्जी कार्यपूर्णता प्रमाण-पत्र तैयार कर पीएचईडी के टेंडरों में लगाए।जांच एजेंसी के अनुसार, इन फर्जी दस्तावेज के जरिए करीब ₹960 करोड़ के टेंडर हासिल किए गए। आरोप है कि इस पूरे खेल में तत्कालीन मंत्री महेश जोशी, तत्कालीन अतिरिक्त मुख्य सचिव सुबोध अग्रवाल, विभागीय इंजीनियरों, संवेदकों और निजी व्यक्तियों की मिलीभगत रही। एसीबी का दावा है कि इस नेटवर्क ने सरकारी पद और प्रभाव का इस्तेमाल कर करोड़ों रुपये का भ्रष्टाचार किया।

 

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टेंडर नियमों में बदलाव कर ‘गेम सेट’ करने का आरोप

जांच में यह भी सामने आया कि 50 करोड़ रुपए से अधिक के बड़े प्रोजेक्ट्स की निविदाओं में “साइट विजिट प्रमाण-पत्र” की अनिवार्यता जोड़ी गई। एसीबी के अनुसार यह शर्त नियमों के विपरीत थी और इससे बोली लगाने वाली कंपनियों की पहचान पहले ही उजागर हो जाती थी। एजेंसी का आरोप है कि इससे टेंडर पुलिंग को बढ़ावा मिला और कई निविदाओं में 30 से 40 प्रतिशत तक अत्यधिक प्रीमियम दरें स्वीकृत हुईं। बताया जा रहा है कि जिन परियोजनाओं में यह कथित गड़बड़ी हुई, उनकी कुल राशि करीब ₹20 हजार करोड़ है।

 

अब तक 11 आरोपी गिरफ्तार

इस मामले में एसीबी पहले ही 11 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। इनमें सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी सुबोध अग्रवाल, मुख्य अभियंता स्तर के अधिकारी, अधिशाषी अभियंता और निजी व्यक्ति शामिल हैं। जांच एजेंसी के अनुसार गिरफ्तार किए गए आरोपियों में विभागीय इंजीनियरों से लेकर वित्तीय सलाहकार और तकनीकी सदस्य तक शामिल हैं।

 

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तीन आरोपी अब भी फरार

मामले में तीन आरोपी अब भी फरार बताए जा रहे हैं। इनमें तत्कालीन अधीक्षण अभियंता मुकेश गोयल, अधिशाषी अभियंता जितेन्द्र शर्मा और निजी व्यक्ति संजीव गुप्ता शामिल हैं। इनके खिलाफ अदालत से स्थायी गिरफ्तारी वारंट जारी किए जा चुके हैं और उन्हें उद्घोषित अपराधी घोषित कराने की प्रक्रिया चल रही है।

 

हाईकोर्ट से पांच आरोपियों को राहत

एसीबी सूत्रों के अनुसार मामले में पांच अन्य आरोपियों को फिलहाल हाईकोर्ट की ओर से गिरफ्तारी से राहत मिली हुई है।

 

एसआईटी कर रही गहन जांच

मामले की जांच उप महानिरीक्षक पुलिस डॉ. रामेश्वर सिंह के निर्देशन में गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) कर रही है। टीम में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक स्तर के अधिकारी शामिल हैं, जिन्होंने तकनीकी और दस्तावेजी साक्ष्यों का गहन विश्लेषण किया। वहीं अतिरिक्त महानिदेशक स्मिता श्रीवास्तव की निगरानी में एसीबी अब आरोपी महेश जोशी से विस्तृत पूछताछ कर रही है। जांच एजेंसी का कहना है कि मामले में आगे और बड़े खुलासे हो सकते हैं।

 

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