– सुस्त सांसदों और भितरघातियों पर भड़के बी.एल. संतोष, कहा- ‘मैदान में उतरो, अधिकृत प्रत्याशी के लिए आखिरी सांस तक लड़ो
जयपुर। प्रदेश में नगर निकाय चुनाव के बीच भाजपा संगठन ने अपने अधिकृत प्रत्याशियों को लेकर अपनी रणनीति साफ कर दी है। भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री बीएल संतोष ने संगठन की बैठक में नेताओं और कार्यकर्ताओं को स्पष्ट संदेश दिया कि प्रत्याशी कमजोर स्थिति में दिखाई दे रहा हो, तब भी चुनाव के आखिरी समय तक उसके पक्ष में पूरी ताकत से खड़ा रहना है। उन्होंने नेताओं को सलाह दी कि अपने प्रत्याशी को कमजोर मानकर किसी दूसरे उम्मीदवार में विकल्प तलाशने के बजाय उसे मजबूत बनाने पर फोकस किया जाए।
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निर्दलीय को साधने के सुझाव पर संतोष का दो टूक जवाब
भाजपा की रणनीति बैठक में एक नेता ने सुझाव दिया कि कुछ वार्डों में पार्टी के प्रत्याशी कमजोर स्थिति में हैं और वहां कांग्रेस तथा निर्दलीय उम्मीदवार के बीच सीधा मुकाबला नजर आ रहा है। ऐसे में बोर्ड गठन की संभावित परिस्थितियों को देखते हुए निर्दलीय प्रत्याशियों से अभी से संपर्क साधने की रणनीति अपनाई जा सकती है। सूत्रों के मुताबिक, इस सुझाव पर बीएल संतोष ने स्पष्ट किया कि चुनाव के दौरान पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी को कमजोर मानकर दूसरे विकल्प की तलाश करना संगठन के लिहाज से उचित नहीं है। उनका संदेश था कि पहली प्राथमिकता भाजपा उप्रत्याशी को जिताना होनी चाहिए।
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‘कमजोर है तो उसे मजबूत बनाओ, विकल्प मत तलाशो’
बैठक में कुछ वार्डों को लेकर फीडबैक सामने आया, जहां भाजपा के प्रत्याशी अपेक्षाकृत कमजोर स्थिति में बताए गए। ऐसे में कांग्रेस और निर्दलीय के बीच मुकाबला होने की स्थिति में निर्दलीय को साधने की संभावनाओं पर चर्चा हुई। हालांकि, संतोष ने इस सोच को प्राथमिकता देने के बजाय संगठन को अपने प्रत्याशी के पीछे पूरी ताकत लगाने का निर्देश दिया। उन्होंने संकेत दिया कि स्थानीय नेतृत्व, पदाधिकारी और कार्यकर्ता मिलकर कमजोर माने जा रहे प्रत्याशी की स्थिति को मजबूत करें और बूथ स्तर तक पूरी सक्रियता बढ़ाएं। उनका यह संदेश टिकट वितरण के बाद सामने आई नाराजगी और कई स्थानों पर मैदान में उतरे बागी प्रत्याशियों के बीच भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। संगठन की कोशिश है कि अधिकृत प्रत्याशियों के पक्ष में कार्यकर्ताओं की एकजुटता बनी रहे और चुनाव के दौरान अंदरूनी मतभेदों का असर पार्टी के प्रदर्शन पर न पड़े।
सांसदों की कम सक्रियता पर भी उठे सवाल
बैठक में नगर निकाय चुनाव को लेकर सांसदों की भूमिका पर भी चर्चा हुई। एक वरिष्ठ नेता ने सांसदों की अपेक्षाकृत कम सक्रियता का मुद्दा उठाते हुए कहा कि कई सांसद चुनाव में उस स्तर पर सक्रिय नजर नहीं आ रहे हैं, जिसकी संगठन उनसे अपेक्षा करता है। सूत्रों के अनुसार, इस पर बीएल संतोष ने साफ किया कि चुनाव कोई भी हो, पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को संगठन के निर्देशों के अनुरूप सक्रिय भूमिका निभानी होगी। सांसदों और विधायकों सहित वरिष्ठ नेताओं को अपने प्रभाव वाले क्षेत्रों में जाकर पार्टी प्रत्याशियों के लिए काम करने और संगठन को मजबूत करने पर जोर देना चाहिए।
‘अपने प्रभाव वाले क्षेत्र में पूरी ताकत लगाएं’
बीएल संतोष ने बैठक में मौजूद नेताओं से कहा कि वे अपने निर्वाचन क्षेत्र और प्रभाव वाले इलाकों में सक्रिय होकर चुनावी अभियान को गति दें। नगर निकाय चुनाव में वार्ड स्तर के स्थानीय समीकरण बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। ऐसे में बूथ प्रबंधन, कार्यकर्ताओं की सक्रियता और नाराज नेताओं-कार्यकर्ताओं को साथ लाना भाजपा की रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है। नेतृत्व का फोकस अब अधिकृत प्रत्याशियों के पक्ष में संगठन की पूरी ताकत लगाने पर है। खासतौर पर उन वार्डों में, जहां प्रत्याशी कमजोर स्थिति में बताए जा रहे हैं, वहां वरिष्ठ नेताओं की सक्रियता बढ़ाने और जमीनी स्तर पर चुनावी प्रबंधन मजबूत करने की रणनीति पर जोर दिया जा रहा है।
चुनाव से पहले ‘विकल्प’ नहीं, प्रत्याशी की जीत प्राथमिकता
बैठक से भाजपा संगठन का सबसे बड़ा संदेश यही निकलकर सामने आया कि मतदान से पहले अधिकृत प्रत्याशी को कमजोर मानकर किसी दूसरे उम्मीदवार के साथ राजनीतिक तालमेल बनाने की कोशिश प्राथमिकता नहीं होगी। संगठन पहले अपने प्रत्याशी की जीत सुनिश्चित करने के लिए पूरी ताकत लगाएगा। बोर्ड गठन के बाद परिस्थितियों के अनुसार राजनीतिक समीकरणों पर विचार किया जा सकता है, लेकिन चुनाव के मैदान में पार्टी का अधिकृत प्रत्याशी ही संगठन की पहली प्राथमिकता रहेगा। बीएल संतोष का यह संदेश निकाय चुनाव में भाजपा की ‘प्रत्याशी पहले, विकल्प बाद में’ वाली रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।






