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डोटासरा पर किरोड़ी का सबसे बड़ा वार! ‘फर्जी OBC सर्टिफिकेट से परिवार को बनवाया RAS’, FIR की मांग से सियासी भूचाल

– कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीना ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को पत्र लिखकर पीसीसी चीफ गोविन्द सिंह डोटासरा पर आरएएस चयन मामले में FIR दर्ज कराने की मांग की

 

जयपुर। राजस्थान की राजनीति में फिर आरएएस भर्ती और ओबीसी प्रमाण-पत्र का मुद्दा गरमा गया है। कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को पत्र लिखकर कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और उनके समधी रमेश चंद्र पूनिया के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग की है। इस कदम ने प्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है और भाजपा-कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज होने की संभावना है। किरोड़ी लाल मीणा ने अपने पत्र में आरोप लगाया है कि डोटासरा और उनके समधी ने कथित रूप से फर्जी ओबीसी प्रमाण-पत्र बनवाकर अपने परिजनों को आरएएस में चयनित कराया। उन्होंने दावा किया कि इस मामले में प्रभाव और पद का दुरुपयोग किया गया, जिससे वास्तविक पात्र अभ्यर्थियों के अधिकार प्रभावित हुए।

 

क्या हैं मुख्य आरोप?

मीणा ने आरोप लगाया है कि गोविंद सिंह डोटासरा के पुत्र अविनाश सिंह डोटासरा का चयन आरएएस-2016 में ओबीसी श्रेणी के आधार पर हुआ। उनका दावा है कि अविनाश को साक्षात्कार में असामान्य रूप से अधिक अंक मिले, जबकि अधिक लिखित अंक पाने वाले अन्य अभ्यर्थी पीछे रह गए। इसके अलावा डोटासरा के समधी और पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी रमेश चंद्र पूनिया के परिवार को भी निशाने पर लिया गया है। पत्र में कहा गया है कि उनकी पुत्री प्रतिभा पूनिया, पुत्र गौरव पूनिया और पुत्री प्रभा पूनिया का चयन भी ओबीसी प्रमाण-पत्र के आधार पर हुआ, जबकि परिवार कथित रूप से ओबीसी क्रीमीलेयर की श्रेणी में आता था।

 

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क्रीमीलेयर को लेकर उठाए सवाल

किरोड़ी मीणा ने अपने पत्र में राज्य सरकार के पुराने परिपत्रों और सेवा नियमों का हवाला देते हुए दावा किया है कि रमेश चंद्र पूनिया को कम आयु में पदोन्नति मिल चुकी थी, इसलिए उनकी संतानों को ओबीसी आरक्षण का लाभ नहीं मिलना चाहिए था। इसी आधार पर उन्होंने ओबीसी प्रमाण-पत्रों की वैधता पर सवाल उठाए हैं।

 

RPSC और इंटरव्यू प्रक्रिया भी निशाने पर

पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि आरपीएससी की चयन प्रक्रिया में प्रभाव का इस्तेमाल किया गया। मीणा ने पूर्व आरपीएससी सदस्यों के कथित बयानों का उल्लेख करते हुए कहा कि इंटरव्यू में अधिक अंक दिलाने के लिए दबाव बनाया गया था। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।

 

राजनीतिक मायने क्या हैं?

जानकारों का कहना है कि यह मामला केवल भर्ती या प्रमाण-पत्र विवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके गहरे राजनीतिक निहितार्थ भी हैं। गोविंद सिंह डोटासरा वर्तमान में राजस्थान कांग्रेस के सबसे प्रमुख चेहरों में से एक हैं। भाजपा लंबे समय से कांग्रेस शासनकाल की भर्तियों और पेपर लीक मामलों को मुद्दा बनाती रही है। आगामी राजनीतिक गतिविधियों और संगठनात्मक तैयारियों के बीच यह विवाद कांग्रेस के लिए असहज स्थिति पैदा कर सकता है। दूसरी ओर, कांग्रेस इसे राजनीतिक प्रतिशोध और विपक्ष को घेरने की रणनीति बताकर पलटवार कर सकती है।

 

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…तो प्रदेश में बनेगा बड़ा मुद्दा

किरोड़ी लाल मीणा ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज करने की मांग की है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि पुलिस या संबंधित एजेंसियां इस शिकायत पर क्या कार्रवाई करती हैं। यदि जांच आगे बढ़ती है तो यह मामला राजस्थान की राजनीति में बड़ा मुद्दा बन सकता है।

 

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