जयपुर। बॉलीवुड फिल्म ‘दामिनी’ का वो चर्चित संवाद-‘तारीख पर तारीख… तारीख पर तारीख’, इन दिनों सांगानेर के एसईपीडी (SEPD) मैनेजमेंट और राजस्थान पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (PCB) की कार्यशैली पर शत-प्रतिशत सटीक बैठ रहा है। सांगानेर के गंवार ब्राह्मणान गांव की करीब 134 फैक्ट्रियों का जहरीला पानी खुलेआम सड़कों और खेतों में समा रहा है, लेकिन SEPD के डायरेक्टर प्रवीण शाह ना तो इन फैक्ट्रियों को सीईटीपी प्लांट से जोड़ पा रहे हैं और न ही प्लांट चलाने के लिए किसी विशेषज्ञ एजेंसी को नियुक्त कर सके हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि पिछले 6 महीनों से SEPD मैनेजमेंट बहानेबाजी करके केवल अगली तारीख मांग रहा है और पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड भी किसी मेहरबान सरपरस्त की तरह कार्यवाही प्रतिवेदन के नाम पर फाइलें दबाकर ढील दिए जा रहा है। अधिकारियों के इस “तारीख वाले खेल” के चक्कर में सांगानेर की जनता जहरीले पानी और दुर्गंध में जीने को मजबूर है, जबकि पर्यावरण संरक्षण के कानूनों का सरेआम मखौल उड़ाया जा रहा है।
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मीटिंगों का दौर और झूठे दावों की पोल
जानकारी के अनुसार, पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड और SEPD मैनेजमेंट के बीच इस गंभीर मुद्दे पर 23 जून 2026, 07 जुलाई 2026 और 14 अगस्त 2026 को सिलसिलेवार बैठकें हुई थीं। इनमें सीईटीपी के संचालन और एक्सपर्ट एजेंसी की तैनाती के कड़े निर्देश दिए गए थे।
15 सितंबर 2026: SEPD मैनेजमेंट ने बोर्ड को पत्र लिखकर 30 सितंबर तक ठोस कार्य योजना प्रस्तुत करने का झांसा दिया।
30 सितंबर 2026: बोर्ड की ओर से दी गई पहली डेडलाइन पर SEPD खरा नहीं उतरा। उल्टे एक साधारण ‘कार्यवाही प्रतिवेदन’ थमाकर और समय मांग लिया गया।
अंतिम डेडलाइन (15 अक्टूबर): मेहरबान पॉल्यूशन बोर्ड ने मियाद बढ़ाकर 15 अक्टूबर कर दी। बोर्ड ने लिखित आदेश दिया था कि:
10 अक्टूबर तक: सीईटीपी संचालन के लिए किसी विशेषज्ञ एजेंसी का अनिवार्य रूप से चयन किया जाए।
15 अक्टूबर तक: गंवार ब्राह्मणान की 134 फैक्ट्रियों को सीईटीपी से जोड़ने के लिए पंपिंग स्टेशन का काम पूरा किया जाए।
नतीजा शून्य: SEPD डायरेक्टर प्रवीण शाह इस आखिरी डेडलाइन तक भी रत्ती भर काम नहीं करा सके। अब एक बार फिर बोर्ड के सामने समय बढ़ाने के लिए अर्जी लगा दी गई है।
पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड पर उठे गंभीर सवाल
मार्च 2026 से लेकर 15 अक्टूबर 2026 तक यानी पिछले 6 महीनों में दर्जनों अल्टीमेटम और डेडलाइन बीत जाने के बाद भी स्थिति जस की तस है। अब जानकार सीधे पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की मंशा और साठगांठ पर सवाल उठा रहे हैं:
आखिरकार इतनी मेहरबानी क्यों?: बार-बार हवा में उड़ाई जा रही डेडलाइंस के बाद भी बोर्ड SEPD मैनेजमेंट पर कानूनी या दंडात्मक कार्रवाई करने से क्यों कतरा रहा है?
“तुमसे ना हो पाएगा” का वक्त: क्या पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड अब भी SEPD के नाकारा मैनेजमेंट को मोहलत देकर सांगानेर के पर्यावरण को दांव पर लगाएगा, या फिर “तुमसे ना हो पाएगा” कहकर इस परियोजना की कमान किसी योग्य और सख्त अथॉरिटी को सौंपेगा।
जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़: खुले में बहता रसायनयुक्त पानी खेतों को बंजर बना रहा है और नेवटा नहर के जल को जहरीला कर रहा है। इसके लिए जिम्मेदार अफसरों पर आपराधिक लापरवाही का मुकदमा दर्ज भी होना चाहिए?
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बोर्ड से अभी और समय मांगा है
“गंवार ब्राह्मणान की 134 फैक्ट्रियां अभी सीईटीपी से नहीं जुड़ पाई हैं और सीईटीपी चलाने के लिए एजेंसी की नियुक्ति भी नहीं कर पाए हैं। समय बढ़ाने के लिए पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड को लिखा हुआ है। वहां से अभी तक कोई जवाब नहीं आया है।” – प्रवीण शाह, डायरेक्टर, SEPD
बड़ा सवाल: बोर्ड देगा ढीला या लेगा एक्शन
SEPD मैनेजमेंट का हर बार समय मांगना यह साबित करता है कि वे समस्या को हल करने में पूरी तरह असक्षम हैं। ऐसे में यदि पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड दोबारा डेडलाइन बढ़ाई जाती है, तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि प्रदूषण रोकने के प्रति बोर्ड स्वयं संजीदा नहीं है और वह भी इस पर्यावरण महा-घोटाले का बराबर का हिस्सेदार है। अब देखने वाली बात यह होगी कि बोर्ड इस बार ढील देता है या चाबुक चलाता है।
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