-राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने गंवार ब्राह्मणान की 134 अवैध रंगाई-छपाई फैक्ट्रियों को थमाए फाइनल क्लोजर नोटिस
जयपुर। राजधानी के सांगानेर क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गंवार ब्राह्मणान गांव में नियमों को ताक पर रखकर धड़ल्ले से पर्यावरण में जहर फैला रहीं 134 अवैध रंगाई-छपाई (डाइंग एंड प्रिंटिंग) फैक्ट्रियों पर अब गाज गिरनी तय है। राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (RSPCB) ने इन सभी अवैध इकाइयों को फाइनल क्लोजर नोटिस जारी कर दिया है।
क्या है पूरा मामला और बोर्ड के आदेश?
जांच में सामने आया है कि ये सभी 134 फैक्ट्रियां बिना किसी वैध अनुमति (Consent to Operate – CTO) के संचालित हो रही थीं और इनका गंदा, जहरीला कैमिकल युक्त पानी सीईटीपी (CETP) पाइपलाइन से जुड़ने के बजाय सीधे खुले में फैलाया जा रहा था।
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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने अपनी इस सख्त कार्रवाई के तहत कई मोर्चों पर विभागों को निर्देश दे दिए हैं:
बिजली कनेक्शन कटे: जयपुर विद्युत वितरण निगम (JVVNL) को इन सभी फैक्ट्रियों के तुरंत पानी और बिजली कनेक्शन काटने और यदि परिसर में कोई डीजी सेट (DG Set) है, तो उसे भी जब्त करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं।
शीर्ष अधिकारियों को कमान: इस बार बोर्ड के सदस्य सचिव, जिला कलेक्टर, जेवीवीएनएनएल के चीफ इंजीनियर और एसईपीडी मैनेजमेंट को भी फाइनल नोटिस की कॉपियां भेजी गई हैं, जिससे इस बार कार्रवाई में किसी भी प्रकार की हीला-हवाली की गुंजाइश न बचे।
पहले दिए गए नोटिस और अब के ‘फाइनल नोटिस’ में क्या है अंतर?
लोगों के मन में यह सवाल उठना लाजिमी है कि जब पिछले महीने 12 अक्टूबर को इन फैक्ट्रियों को नोटिस दिए गए थे, तो फिर 2 नवंबर को दोबारा नोटिस क्यों जारी किए गए?
इसे इस तरह समझा जा सकता है:
पहला चरण (शो-कॉज नोटिस): 12 अक्टूबर को क्षेत्रीय अधिकारी (साउथ) विवेक गोयल के स्तर पर ‘शो-कॉज नोटिस’ जारी किए गए थे, जो एक प्रकार की चेतावनी थी कि फैक्ट्री मालिक प्रदूषण रोकने के उपाय करें और नियमों का पालन करें। लेकिन इन बेखौफ फैक्ट्री मालिकों पर बोर्ड की चेतावनियों का कोई असर नहीं हुआ।
दूसरा चरण (फाइनल क्लोजर नोटिस): जब चेतावनी का कोई नतीजा नहीं निकला, तो बोर्ड ने अब सीधे तौर पर फाइनल क्लोजर नोटिस का चाबुक चलाया है। चूंकि, इस बार यह कार्रवाई प्रशासनिक और तकनीकी महकमों के शीर्ष अधिकारियों की निगरानी में है, इसलिए इन फैक्ट्रियों पर ताले लगना तय माना जा रहा है।
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सबसे बड़ा सवाल: रखवाला ही जब बना भक्षक
इस पूरी कार्रवाई के बीच एक बेहद चौंकाने वाला और गंभीर पहलू सामने आया है-जिस कम्पनी एसईपीडी को प्रदूषण रोकने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, उसके डायरेक्टर खुद पर्यावरण के सबसे
बड़े गुनहगार निकले हैं।
एसईपीडी डायरेक्टर की अवैध फैक्ट्री: गंवार ब्राह्मणान गांव में एसईपीडी के डायरेक्टर प्रवीण शाह की खुद की अवैध रंगाई-छपाई फैक्ट्री चल रही है, जिसे पहले ही शो-कॉज नोटिस मिल चुका है।
खतरनाक जहरीला तालाब: आरोप है कि प्रवीण शाह ने अपनी फैक्ट्री के पीछे काफी जमीन पर जहरीले पानी का एक विशाल तालाब बना रखा है, जिसमें यदि कोई इंसान या बेजुबान जानवर गिर जाए, तो उसका बचना असंभव है।
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जिम्मेदारों की विफलता
सांगानेर में 159 करोड़ रुपए की लागत से सीईटीपी प्लांट सिर्फ इसलिए बनाया गया था, ताकि रंगाई-छपाई के जहरीले पानी को ट्रीट करके दोबारा इस्तेमाल में लिया जा सके। इस प्लांट के संचालन की जिम्मेदारी एसईपीडी मैनेजमेंट के पास है, जिसके डायरेक्टर खुद प्रवीण शाह हैं। जब रखवाले ही खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए जहर फैला रहे हों, तो आम फैक्ट्रियों से क्या उम्मीद की जा सकती है? प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और जिला प्रशासन द्वारा उठाए गए इन सख्त कदमों के बाद अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या प्रशासन बिना किसी राजनीतिक या प्रशासनिक दबाव के इन 134 फैक्ट्रियों पर पूरी तरह ताले लगवा पाता है, या फिर एसईपीडी मैनेजमेंट के साथ मिलीभगत का पुराना खेल फिर से हावी हो जाएगा।
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