बालोतरा/जोधपुर। जोधपुर की जोजरी नदी और आस-पास के इलाकों को प्रदूषण के जहर में धकेलने वाली रंगाई-छपाई (टेक्सटाइल) फैक्ट्रियों पर आखिरकार कानून का शिकंजा कस गया है। सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख और कड़े निर्देशों के बाद राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है।बालोतरा के क्षेत्रीय अधिकारी शरद सक्सेना ने एक्शन लेते हुए प्रदूषण फैलाने और नियमों को ताक पर रखकर चल रही 153 रंगाई-छपाई फैक्ट्रियों को पर्यावरण क्षतिपूर्ति वसूली के नोटिस थमा दिए हैं।
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1.5 लाख से 12 लाख तक का जुर्माना, 15 दिन की अंतिम डेडलाइन

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की इस कार्रवाई से क्षेत्र के अवैध उद्योगपतियों में हड़कंप मच गया है। नोटिसों के जरिए फैक्ट्रियों पर 1.5 लाख रुपए से लेकर 12 लाख रुपए से भी अधिक का भारी-भरकम पर्यावरण मुआवजा ठोका गया है। नोटिस में स्पष्ट रूप से चेतावनी दी गई है कि फैक्ट्री मालिकों को अपनी आपत्ति या स्पष्टीकरण दर्ज कराने के लिए 15 दिनों का समय दिया गया है। यदि तय समय सीमा के भीतर किसी भी इकाई का संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है, तो बोर्ड बिना किसी ढील के सीधे एकतरफा कड़ा संज्ञान लेगा।
सुप्रीम कोर्ट का सख्त आदेश, 20 लाख जिंदगियां खतरे में
यह पूरा एक्शन सुप्रीम कोर्ट के उस ऐतिहासिक आदेश के बाद देखने को मिल रहा है, जो कोर्ट ने स्वतः संज्ञान रिट याचिका (सिविल) संख्या 08/2025 (“2 Million Lives at Risk, Contamination in Jojari River, Rajasthan”) पर सुनवाई करते हुए दिया था। “सुप्रीम कोर्ट के निर्देश एकदम साफ हैं- उल्लंघन करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। कृषि या आवासीय भूमि पर अवैध रूप से चल रहे उद्योगों को तुरंत सील या जब्त किया जाए। उनके बिजली-पानी के कनेक्शन काटे जाएं, ‘संचालन की सहमति’ (Consent to Operate) रद्द हो और खातेदारी अधिकारों को छीनने (Khatedari Rights Revocation) की प्रक्रिया जल्द से जल्द पूरी की जाए।”
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बोर्ड का नया ‘पेनाल्टी फार्मूला’: रिकॉर्ड नहीं मिला तो भी लगेगा कम से कम ₹1.5 लाख का फटका
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन कराने के लिए जब पाली, बालोतरा और जोधपुर के क्षेत्रीय अधिकारियों ने ग्राउंड पर कार्रवाई शुरू की, तो एक बड़ी चुनौती सामने आई- अवैध फैक्ट्रियों के पास कोई रिकॉर्ड या दस्तावेज नहीं थे, जिससे उनके उल्लंघन की सटीक अवधि का पता लगाना मुश्किल हो रहा था। प्रदूषण फैलाकर कानूनी दांव-पेच से बचने की इस चालाकी को बोर्ड ने एक नए और कड़े फैसले से नाकाम कर दिया है:
फिक्स्ड मिनिमम पेनाल्टी (न्यूनतम ₹1,50,000):
आवासीय या कृषि भूमि पर गैर-अनुमोदित तरीके से चल रही ऐसी सभी अवैध इकाइयां, जिनका रिकॉर्ड गायब है, उन पर कम से कम 1.5 लाख रुपए का जुर्माना हर हाल में लगेगा। बोर्ड ने माना है कि किसी भी इकाई को खड़ा करने में कम से कम 30 दिन लगते हैं। 08.01.2020 की कार्यप्रणाली के तहत ₹5,000 प्रति दिन की दर से 30 दिनों का हिसाब सीधा ₹1.5 लाख तय किया गया है।
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पूरा रिकॉर्ड मिलने पर और बड़ा झटका
जिन फैक्ट्रियों का डेटा, पॉल्यूशन इंडेक्स (Pollution Index), स्केल फैक्टर, लोकेशन फैक्टर और उल्लंघन के दिनों का ब्योरा उपलब्ध है, उन पर 08.01.2020 के नियमों के तहत लाखों-करोड़ों की अधिकतम पेनल्टी सख्ती से लागू की जाएगी। इसे सक्षम प्राधिकारी का अनुमोदन प्राप्त हो चुका है।
अवैध उद्योगों का बोरिया-बिस्तर बंधना तय
राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के इस आक्रामक रुख से साफ है कि अब जोधपुर, बालोतरा, पाली और सांगानेर में नदियों और जमीन को जहरीला बनाने का काला कारोबार नहीं चलेगा। कृषि और रिहायशी जमीनों पर अवैध रूप से चल रही इकाइयों को उनके मूल स्वरूप में वापस लाने और पर्यावरण की भरपाई कराने तक यह हंटर रुकने वाला नहीं है।
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