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गंवार ब्राह्मणान की 134 अवैध फैक्ट्रियों पर बोर्ड की मेहरबानी, सीईटीपी से जुड़ी इकाइयों पर डंडा

– जयपुर में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और SEPD मैनेजमेंट की मिलीभगत?

 

जयपुर। राजधानी के सांगानेर इलाके में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और SEPD मैनेजमेंट की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। कहावत है-“जब सैय्या भये कोतवाल, तो फिर डर काहे का।” यह कहावत वर्तमान में जयपुर के प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और SEPD मैनेजमेंट के संबंधों पर बिल्कुल सटीक बैठती है। एक तरफ बोर्ड रोटेशनल क्लोजर के नाम पर सीईटीपी (CETP) प्लांट से जुड़ी रंगाई-छपाई फैक्ट्रियों पर ताबड़तोड़ कार्रवाई कर रहा है, वहीं दूसरी ओर नियमों को ताक पर रखकर चलाई जा रही गंवार ब्राह्मणान की 134 अवैध फैक्ट्रियों पर बोर्ड की चुप्पी कई बड़े और गंभीर सवाल खड़े कर रही है।

 

 

 

यह भी देखें: पर्यावरण से खिलवाड़ पड़ा भारी: RSPCB का बड़ा एक्शन, गंवार ब्राह्मणान की 134 फैक्ट्रियों को तत्काल बंद करने का फरमान

 

 

क्लोजर नोटिस के बावजूद धड़ल्ले से चल रही हैं 134 फैक्ट्रियां

 

मामला सांगानेर तहसील के गंवार ब्राह्मणान गांव का है, जहां 134 फैक्ट्रियां बिना सीईटीपी कनेक्शन के खुलेआम संचालित हो रही हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि ये सभी फैक्ट्रियां SEPD की सदस्य तो हैं, लेकिन इनका जुड़ाव सीईटीपी प्लांट से नहीं है। नतीजतन, ये इकाइयां गांव के आम रास्तों, खेतों और खलिहानों में सीधे केमिकल युक्त जहरीला पानी बहाकर पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचा रही हैं। इस गंभीर स्थिति को संज्ञान में लेते हुए राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 13 अक्टूबर को इन 134 फैक्ट्रियों को क्लोजर नोटिस जारी किए थे। लेकिन, नोटिस जारी हुए सप्ताहभर बीत जाने के बाद भी ये तमाम अवैध फैक्ट्रियां धड़ल्ले से संचालित हो रही हैं और प्रदूषण फैला रही हैं। हैरानी की बात यह है कि प्रदूषण बोर्ड इन पर कोई सख्त कार्रवाई करते हुए इन्हें सील करने की जहमत नहीं उठा रहा है।

 

 

 

SEPD डायरेक्टर की खुद की फैक्ट्री, नियमों की सरेआम धज्जियां

 

 

इस पूरे प्रकरण में हितों के टकराव का सबसे बड़ा उदाहरण SEPD मैनेजमेंट की भूमिका है। सीईटीपी प्लांट को संचालित करने की जिम्मेदारी SEPD मैनेजमेंट की है, और इसी SEPD के डायरेक्टर प्रवीण शाह की खुद की फैक्ट्री भी इसी गंवार ब्राह्मणान क्षेत्र में स्थित है। जब देश के कानून और पर्यावरण सुरक्षा के नियम सबके लिए समान होने चाहिए, तब डायरेक्टर की अपनी फैक्ट्री नियमों की धज्जियां उड़ा रही हैं और प्रदूषण बोर्ड इस पर आंखें मूंदकर बैठा है। आखिर क्या वजह है कि क्लोजर नोटिस मिलने के बाद भी इन फैक्ट्रियों पर ताले नहीं लगाए जा रहे? क्या किसी बड़े संरक्षण के चलते इन पर हाथ डालने से बचा जा रहा है?

 

दोहरी नीति: सीईटीपी से जुड़ी फैक्ट्रियों पर तुरंत कार्रवाई

एक तरफ गंवार ब्राह्मणान की अवैध फैक्ट्रियों को खुली छूट दी जा रही है, वहीं दूसरी तरफ वे फैक्ट्रियां जो कायदे से सीईटीपी प्लांट से जुड़ी हुई हैं, उन्हें रोटेशनल क्लोजर के नाम पर निशाना बनाया जा रहा है। प्रदूषण बोर्ड ने इन वैध इकाइयों को थमाए गए नोटिस में तर्क दिया है कि जांच के दौरान वेट प्रोसेसिंग का काम चलता पाया गया और रोटेशनल क्लोजर के बाद भी अपशिष्ट पानी सीईटीपी पाइपलाइन में छोड़ा जा रहा है। बोर्ड इसे जल प्रदूषण अधिनियम का उल्लंघन मानकर तुरंत फैक्ट्री बंद करने का फरमान जारी कर रहा है। ऐसे में बड़ा सवाल यह उठता है कि जो फैक्ट्रियां नियमों के दायरे में रहकर सीईटीपी से जुड़ी हैं, उन पर फौरन एक्शन; और जो फैक्ट्रियां पूरी तरह अवैध रूप से खुलेआम जहर बहा रही हैं, उन पर मेहरबानी क्यों? जब इस बाबत राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के जयपुर (दक्षिण) क्षेत्रीय अधिकारी विवेक गोयल से उनका पक्ष जानने के लिए संपर्क किया गया, तो उन्होंने कॉल रिसीव करना भी मुनासिब नहीं समझा। इससे बोर्ड की कार्यशैली पर और अधिक संदेह गहराता है।

 

 

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159 करोड़ का सीईटीपी प्लांट सफेद हाथी साबित, क्षमता पर भी रार

 

सांगानेर में 159 करोड़ रुपए की भारी-भरकम लागत से बनाए गए सीईटीपी प्लांट की पोल भी इस पूरे विवाद में खुल गई है। इतनी बड़ी लागत के बावजूद यह प्लांट अपनी पूर्ण क्षमता से कोसों दूर है। प्रदूषण बोर्ड के आधिकारिक पत्र के अनुसार, यह प्लांट मात्र 1 से 2 एमएलडी की क्षमता पर ही चल रहा है। वहीं इसके विपरीत, SEPD के डायरेक्टर प्रवीण शाह दावा करते हैं कि प्लांट 4 एमएलडी की क्षमता पर संचालित हो रहा है। अब यह जांच का विषय है कि सीईटीपी प्लांट की क्षमता को लेकर कौन सच बोल रहा है और कौन झूठ।

 

 

 

यह भी देखें: सांगानेर में जहर का खुला खेल: 5 छोटी मछलियों पर शिकंजा, ‘मगरमच्छों’ पर बोर्ड क्यों मेहरबान?

 

 

क्या बोले SEPD डायरेक्टर प्रवीण शाह?

 

जब इस विरोधाभास पर प्रवीण शाह से सवाल किया गया, तो उनका जवाब बेहद लापरवाह और मनमाना था। अपनी बात रखते हुए SEPD डायरेक्टर प्रवीण शाह ने कहा, “पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड तो रोजाना ही क्लोजर नोटिस दे रहे हैं। गंवार ब्राह्मणान में फैक्ट्रियां चलने के बारे में पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड ही बता पाएगा। जो अभी गाइडलाइन बनाई है, वह SEPD मैनेजमेंट ने बनाई है, वह हमारी तरफ से मान्य है। भले ही उसे पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड माने या नहीं माने। हम तो हमारी गाइडलाइन को लागू करेंगे ही। क्या आप चाहते हैं कि गंवार ब्राह्मणान की 134 फैक्ट्रियां बंद हो जाएं? करीब 2000 फैक्ट्रियां सदस्य नहीं हैं, उन पर तो कोई कार्रवाई हो ही नहीं रही? पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड सिर्फ सदस्यों को ही परेशान कर रहा है।”

 

 

यह भी देखें: सांगानेर में जहर का खेल: कागजों में दौड़ रहा 123 करोड़ का प्लांट, मोटर से नेवटा फीडर में उड़ेला जा रहा है मौत का पानी

 

 

 

सवालों के घेरे में जिम्मेदार विभाग

 

 

प्रवीण शाह के इस बयान ने यह साफ कर दिया है कि स्थानीय स्तर पर नियमों की पालना कराने के बजाय किस तरह मनमाने तरीके से समानांतर व्यवस्था चलाने की कोशिश हो रही है। अब जनता और पर्यावरणविदों के मन में कुछ तीखे सवाल उठ खड़े हुए हैं-

– गंवार ब्राह्मणान की 134 अवैध फैक्ट्रियां क्लोजर नोटिस मिलने के बावजूद आखिरकार किसकी शह पर चल रही हैं और इन्हें अब तक सील क्यों नहीं किया गया?

– SEPD डायरेक्टर की खुद की फैक्ट्री क्षेत्र में संचालित होने के बावजूद प्रदूषण बोर्ड उस पर कार्रवाई करने से क्यों कतरा रहा है?

– क्या पर्यावरणीय कानूनों का पालन कराना सिर्फ कुछ चुनिंदा और सीईटीपी से जुड़ी फैक्ट्रियों की ही जिम्मेदारी है, या नियमों का उल्लंघन करने वाले हर व्यक्ति पर शिकंजा कसा जाना चाहिए?

फिलहाल, बोर्ड की इस संदिग्ध चुप्पी और मिलीभगत की चर्चा पूरे सांगानेर और जयपुर औद्योगिक गलियारे में आम हो चुकी है, और यह देखना बाकी है कि प्रशासन इस पर क्या सख्त कदम उठाता है?

 

ऐसी ही खबरों के लिए देखें: https://democraticbharat.com/

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