जयपुर। सांगानेर की विश्वप्रसिद्ध कपड़ा रंगाई-छपाई इंडस्ट्री को बंद होने की कगार से बचाने के लिए बने राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के निर्देशों और SEPD/SPV के दावों के बीच एक बड़ी प्रशासनिक लापरवाही सामने आई है। प्रदूषण बोर्ड की ओर से 16 सितंबर को तय किए गए ज्वॉइंट एक्शन प्लान की डेडलाइन बीतने के बाद अब आनन-फानन में जो रोटेशनल बंदी योजना बनाई गई है, जिसमें खामियों का अंबार है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस प्लान में गंवार ब्राह्मणान की 134 फैक्ट्रियों का कोई अता-पता ही नहीं है, जिससे सैकड़ों फैक्ट्री मालिकों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है।
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SEPD मैनेजमेंट की भारी लापरवाही, डायरेक्टर की खुद की फैक्ट्री भी अधर में
राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने सांगानेर कपड़ा रंगाई-छपाई एसोसिएशन और SEPD को 30 सितंबर तक कई अहम जिम्मेदारियां सौंपी थीं। हालांकि, SEPD इस डेडलाइन तक काम पूरा करने में नाकाम रहा और महज एक कार्यवाही प्रतिवेदन सौंपकर इतिश्री कर ली। इसके बाद प्रदूषण बोर्ड के निर्देशों का हवाला देते हुए SEPD डायरेक्टर प्रवीण शाह ने 6 अक्टूबर से लागू होने वाला रोटेशनल बंदी प्लान तो जारी कर दिया, लेकिन इसमें भारी गड़बड़ी छोड़ दी। रोटेशनल प्लान में CETP से जुड़ी फैक्ट्रियों को दो एरिया में बांटकर चलाने का शेड्यूल तो तय कर दिया गया, लेकिन जो फैक्ट्रियां अभी CETP से कनेक्ट नहीं हैं, उन्हें पूरी तरह अनदेखा कर दिया गया। ताज्जुब की बात यह है कि गंवार ब्राह्मणान स्थित जिन 134 फैक्ट्रियों का जिक्र प्लान में गायब है, उनमें SEPD डायरेक्टर प्रवीण शाह की खुद की फैक्ट्री भी शामिल है।
भ्रम में फैक्ट्री मालिक: क्या हमेशा के लिए लग जाएगा ताला?
प्लान में नाम ना होने से गंवार ब्राह्मणान के 134 फैक्ट्री संचालक इस बात को लेकर बेहद चिंतित और असमंजस में हैं कि 6 अक्टूबर से उनकी इकाइयां चलेंगी या उन पर हमेशा के लिए ताला लग चुका है। जब इस पूरी गड़बड़ी पर SEPD डायरेक्टर प्रवीण शाह से सवाल किया गया तो उन्होंने गोलमोल जवाब देते हुए कहा कि “ये 134 फैक्ट्रियां बंद नहीं रहेंगी, इन्हें PS-1 सायपुरा रोड वाले क्षेत्र में शामिल माना जाएगा।” हालांकि, जब उनसे पूछा गया कि लिखित प्लान में इनका जिक्र क्यों नहीं किया गया, तो उन्होंने माना कि “चूंकि ये फैक्ट्रियां अभी CETP प्लांट से सीधे जुड़ी नहीं हैं, इसलिए इनका जिक्र रोटेशनल बंदी प्लान में नहीं किया गया।”
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प्रदूषण बोर्ड के अस्पष्ट निर्देश और अधिकारियों की चुप्पी
इस पूरे मामले में राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। बोर्ड ने अपने निर्देशों में यह साफ ही नहीं किया कि रोटेशनल बंदी सिर्फ CETP से जुड़ी इकाइयों पर लागू होगी या सांगानेर की सभी फैक्ट्रियों पर
पहला पहलू: यदि यह रोटेशनल प्लान सिर्फ CETP से जुड़ी फैक्ट्रियों के लिए है, तो क्या गंवार ब्राह्मणान की 134 फैक्ट्रियों समेत सांगानेर की शेष करीब 2000 अनकनेक्टेड फैक्ट्रियां CETP से नहीं जुड़ने तक पूरी तरह बंद रहेंगी?
दूसरा पहलू: यदि यह प्लान क्षेत्र की सभी 3000 से अधिक फैक्ट्रियों पर लागू होता है, तो बिना CETP कनेक्शन के चलने वाली फैक्ट्रियों का जहरीला कैमिकल युक्त पानी सड़कों पर बहेगा, जो आम जनजीवन और पर्यावरण के लिए बड़ा खतरा बनेगा, उसका जिम्मेदार कौन होगा?
सवालों से बचते नजर आए RO विवेक गोयल
इस गंभीर विषय और रोटेशनल बंदी के भ्रम पर जब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के जयपुर दक्षिण क्षेत्रीय अधिकारी (RO) विवेक गोयल का पक्ष जानने के लिए उन्हें कई बार कॉल किया गया, लेकिन उन्होंने रिसीव नहीं किया। फिर उनको सवाल व्हाट्सएप पर भेजकर पक्ष जानने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने कोई जवाब देना उचित नहीं समझा।
क्षेत्रीय अधिकारी विवेक गोयल से पूछे गए वे सवाल, जिनका नहीं मिला जवाब
– राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के निर्देशों के बाद SEPD मैनेजमेंट ने सांगानेर की रंगाई-छपाई फैक्ट्रियों के संचालन के लिए रोटेशनल बंदी प्लान बनाया है। क्या ये रोटेशनल बंदी प्लान सभी फैक्ट्रियों पर लागू है या सिर्फ CETP प्लांट से जुड़ी हुई फैक्ट्रियों के लिए ही है।
– यदि रोटेशनल बंदी प्लान सिर्फ CETP प्लांट से जुड़ी हुई फैक्ट्रियों के लिए ही है, तो फिर क्या प्लांट से नहीं जुड़ी हुई गंवार ब्राह्मणान की करीब 134 फैक्ट्रियां सहित करीब शेष 2000 फैक्ट्रियां बंद रहेंगी? और कब तक?
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