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सांगानेर CETP प्लांट के कैमिकल पानी से व्यापारी को 5 लाख का नुकसान, SEPD डायरेक्टर बोले- चिट्ठी में नाले का पानी लिखो वरना नहीं निकालेंगे

– मुहाना मोड़ पर पावर हाउस के पीछे गोदाम में घुसा कैमिकल युक्त पानी, बांस-बल्ली व्यापारी को ₹5 लाख का नुकसान

– सच दबाने का खेल: SEPD डायरेक्टर बोले- ‘पत्र में नाले का पानी लिखो, CETP का नाम लिया तो नहीं निकालेंगे पानी’

– प्रदूषण नियंत्रण मंडल की चुप्पी पर उठे सवाल, बेखौफ मैनेजमेंट की लापरवाही से बेहाल जनता

 

जयपुर। सांगानेर का मुहाना मोड़ स्थित सीईटीपी (CETP) प्लांट सिर्फ एक सफेद हाथी और कबाड़ बनकर रह गया है। शनिवार को एक बार फिर इसकी पोल तब खुल गई, जब प्लांट से निकला बेहद जहरीला और कैमिकल युक्त पानी मुहाना मोड़ पर चारों तरफ फैल गया। इस जहरीले बहाव की चपेट में आने से पावर हाउस के सामने स्थित बांस-बल्ली के गोदाम मालिक ललित आचार्य को करीब 5 लाख रुपए के माल का भारी नुकसान झेलना पड़ा है। हद तो तब हो गई, जब अपनी नाकामी छुपाने के लिए प्लांट का संचालन करने वाली कंपनी SEPD के डायरेक्टर खुद पीड़ित व्यापारी पर सच दबाने और झूठा शिकायती पत्र लिखने का दबाव बनाते नजर आए।

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गार्ड्स का दो टूक जवाब-‘हमारे पास कोई इलाज नहीं

गोदाम में कैमिकल वाला पानी भरने और लाखों का माल तबाह होने के बाद जब पीड़ित व्यापारी ललित आचार्य शिकायत लेकर सीईटीपी प्लांट पहुंचे, तो वहां तैनात सुरक्षा गार्ड्स ने गैर-जिम्मेदाराना रवैया अपनाते हुए टका सा जवाब दे दिया कि “हमारे पास इसका कोई इलाज नहीं है।” गार्ड्स की इस अनदेखी के बाद पीड़ित ने प्लांट का संचालन करने वाली संस्था SEPD के डायरेक्टर प्रवीण शाह से संपर्क साधा।

डायरेक्टर की शर्त- ‘नाले का पानी लिखोगे तो ही पम्प लगाकर निकालेंगे’

CETP प्लांट से निकलकर कैमिकल वाला गंदा पानी मुहाना मोड के पास बांस-बल्ली के गोदाम में हुआ जमा।
CETP प्लांट से निकलकर कैमिकल वाला गंदा पानी मुहाना मोड के पास बांस-बल्ली के गोदाम में हुआ जमा।

जब पीड़ित व्यापारी ने SEPD डायरेक्टर प्रवीण शाह को फोन कर जलभराव की शिकायत की, तो शाह ने समाधान निकालने के बजाय व्यापारी को ही उल्टा पाठ पढ़ाना शुरू कर दिया। शाह ने कहा कि “मुझे लिखित में शिकायत दो, लेकिन पत्र में यह लिखना कि गंदे नाले का पानी बहकर गोदाम में आ गया है। उसके बाद ही हम पम्प लगाकर पानी निकलवाएंगे।” व्यापारी ललित आचार्य ने जब लेटर बनाकर व्हाट्सएप किया, तो उसमें सच्चाई दर्ज करते हुए लिखा कि ‘पानी गंदे नाले का नहीं, बल्कि CETP प्लांट से बहकर आ रहा कैमिकल युक्त पानी है।’

सच लिखते ही तिलमिलाए डायरेक्टर: ‘CETP का नाम लिखा तो नहीं होगा समाधान’

सच्चाई सामने आते ही SEPD डायरेक्टर प्रवीण शाह तिलमिला गए और पीड़ित को समझाने के नाम पर तोते की तरह पाठ पढ़ाने लगे। शाह ने कहा कि “CETP प्लांट से कैमिकल वाला पानी आने की बात क्यों लिखी है? ऐसा लिखोगे तो हम पानी नहीं निकलवा पाएंगे।” इस पर पीड़ित ने दो टूक कहा कि जब पानी प्लांट से ही आ रहा है, तो वही लिखा जाएगा। इस दौरान प्रवीण शाह ने दावा किया कि CETP प्लांट तो बंद पड़ा है, लेकिन पीड़ित ने पोल खोलते हुए बताया कि प्लांट के गार्ड्स ने खुद स्वीकार किया है कि ‘एक घंटे के लिए पानी बंद किया गया है, दोबारा शुरू करने पर फिर कैमिकल वाला पानी आएगा।’ इसके बाद भी डायरेक्टर अपनी नाकामी का ठीकरा गंदे नाले पर फोड़ने के लिए दबाव बनाते रहे और कहा- “समाधान चाहिए या नहीं? फिर सिर्फ गंदे पानी का जिक्र करो, CETP प्लांट का नाम मत लो।” डेमोक्रेटिक भारत के पास इस बातचीत का पूरा ऑडियो मौजूद है।

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प्रदूषण नियंत्रण मंडल की शह पर चल रहा खेल?

इस पूरे वाकये से साफ जाहिर होता है कि SEPD मैनेजमेंट से सीईटीपी प्लांट का सफल संचालन नहीं हो पा रहा है। अपनी विफलता छिपाने के लिए आम जनता और व्यापारियों के नुकसान की बलि चढ़ाई जा रही है। स्थानीय लोगों और व्यापारियों में इस तानाशाही और लीपापोती को लेकर भारी आक्रोश है। अब बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल (RSPCB) आंखें मूंदकर बैठा रहेगा या SEPD के इस बेखौफ और लापरवाह मैनेजमेंट पर कड़ी कानूनी कार्रवाई करेगा?

ऐसी ही खबरों के लिए देखते रहें: https://democraticbharat.com/
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