– गंवार ब्राह्मणान की 134 फैक्ट्रियों ने ना तो बोर्ड से चलाने की अनुमति ले रखी थी और ना ही CETP प्लांट से जुड़ी हुई थी
– कैमिकल वाला पानी बिना ट्रीट किए खुले में बहाकर पर्यावरण नियमों की उड़ा रही थीं धज्जियां
जयपुर। राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (RSPCB) ने पर्यावरण नियमों की धज्जियां उड़ाने वाली रंगाई-छपाई फैक्ट्रियों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। जल अधिनियम के उल्लंघन और प्रदूषण फैलाने के मामले में बोर्ड ने कड़ा रुख अपनाते हुए सांगानेर तहसील में गंवार ब्राह्मणान स्थित 134 फैक्ट्रियों को तत्काल प्रभाव से बंद करने का फरमान जारी कर दिया है। राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण मंडल के जयपुर (दक्षिण) क्षेत्रीय अधिकारी विवेक गोयल की ओर से जारी नोटिस में इन सभी फैक्ट्रियों को तत्काल बंदी के आदेश जारी किए गए हैं। साथ ही इनकी बिजली-पानी की सप्लाई काटने और जनरेटर सील करने के भी सख्त निर्देश जारी किए हैं। आपको बता दें कि सांगानेर कपड़ा रंगाई-छपाई एसोसिएशन का कहना है कि सभी फैक्ट्री मालिकों को दीपावली तक बोर्ड ने राहत दे दी है। डेमोक्रेटिक भारत ने इसकी पुष्टि के लिए बोर्ड के दो बड़े अधिकारियों से बात करने की कोशिश की थी, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।
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सर्वे में खुली पोल: परिसर के बाहर बहाया जा रहा था ‘जहरीला गंदा पानी’
बोर्ड ने गंवार ब्राह्मणान की 134 फैक्ट्रियों को क्लोजर नोटिस दे दिए हैं। बोर्ड ने नोटिस में लिखा है कि अधिकारियों द्वारा समय-समय पर किए गए औचक निरीक्षण और सर्वे में गंभीर लापरवाही उजागर हुई। इनमें इन सभी फैक्ट्रियों के कैमिकल वाले पानी और कचरे के निस्तारण के लिए बने ‘कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट’ (CETP) की मुख्य पाइपलाइन से कोई कनेक्शन नहीं था। ऐसे में ये सभी फैक्ट्रियां बिना ट्रीट किए कैमिकल वाले पानी को आम रास्तों, खेत-खलिहानों और नदी-नालों में धड़ल्ले से बहा रही थीं। इससे आस-पास के जल स्रोतों और पर्यावरण को गंभीर खतरा पैदा हो रहा था। साथ ही इन फैक्ट्री मालिकों ने फैक्ट्री चलाने की बोर्ड से अनुमति भी नहीं ले रखी थी।
धारा 33(A) का चाबुक: तुरंत बंद हों सभी गतिविधियां
राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने जल अधिनियम, 1974 की धारा 24 (प्रदूषित पदार्थ बहाने पर रोक) और धारा 25/26 (बिना सहमति उद्योग स्थापित या संचालित करने पर रोक) के खुले उल्लंघन को बेहद गंभीरता से लिया है। पर्यावरण हित और जन-स्वास्थ्य की रक्षा के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने धारा 33(A) के तहत अपने अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए कड़े फरमान सुनाए हैं। इसमें कहा गया है कि औद्योगिक इकाई में चल रही सभी तरह की निर्माण और टेक्सटाइल प्रक्रियाओं को तुरंत प्रभाव से बंद किया जाए। संबंधित विभागों और अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि उद्योग की पानी और बिजली की सप्लाई तुरंत प्रभाव से काट दी जाए। यदि फैक्ट्री परिसर में कोई डीजल जनरेटर पाए जाते हैं, तो उन्हें बिना किसी देरी के सील किया जाए।
‘आदेश नहीं माना तो सीधे भुगतना होगा कानूनी दंड’
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने गंवार ब्राह्मणान की 134 रंगाई-छपाई फैक्ट्रियों को कड़ा संदेश देते हुए साफ कर दिया है कि इन निर्देशों की अनदेखी या पालन न करने की स्थिति में जल अधिनियम के तहत कठोर दंडात्मक और कानूनी कार्यवाही की जाएगी। साथ ही बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई बोर्ड के उस अधिकार को प्रभावित नहीं करती, जिसके तहत वह पूर्व में किए गए नियमों के उल्लंघन के लिए अलग से कानूनी मामला दर्ज करा सकता है। पर्यावरण से खिलवाड़ और बिना अनुमति के फैक्ट्री का संचालन किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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एसईपीडी डायरेक्टर्स को भी मिले क्लोजर नोटिस
गंवार ब्राह्मणान में प्रदूषण बोर्ड ने जिन 134 फैक्ट्रियों को बंद करने के नोटिस जारी किए हैं। उनमें एसईपीडी के डायरेक्टर प्रवीण शाह और नवरतन नराणिया की भी फैक्ट्रियां शामिल हैं। ये सभी फैक्ट्रियां सीईटीपी प्लांट से नहीं जुड़ी हुई हैं और फैक्ट्री चलाने की अनुमति भी बोर्ड से नहीं ले रखी है। ऐसे में ये 134 फैक्ट्रियां कैमिकल वाले पानी को बिना ट्रीट किए खुले में बहा रही थीं। ऐसे में बोर्ड ने इन सभी को क्लोजर नोटिस दिए हैं।
SEPD नहीं, हर यूनिट को अपने नोटिस का खुद देना होगा जवाब
पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड ने एसईपीडी को क्लोजर नोटिस नहीं दिए हैं, सभी यूनिट्स को अलग-अलग नोटिस दिए गए हैं। इसलिए जिसे नोटिस मिला है, उसे पर्सनल लेवल पर उसका जवाब देना है। अभी पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड ने जो नोटिस दिए हैं, उनके क्या मायने हैं, उनके बारे में तो वही बता पाएगा। – प्रवीण शाह, डायरेक्टर एसईपीडी
सांगानेर कपड़ा रंगाई-छपाई एसोसिएशन की पहल पर दीपावली तक खुली रहेंगी 134 फैक्ट्रियां
राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने गंवार ब्राह्मणान की 134 फैक्ट्रियों को बंद करने के आदेश दे दिए थे। इसके बाद मैंने एसोसिएशन के सदस्यों के साथ बोर्ड के अधिकारियों से मुलाकात की। उन्हें समझाया कि दीपावली का त्योहार नजदीक है। इन सभी फैक्ट्री मालिकों के साथ-साथ हजारों मजदूरों की रोजी-रोटी अचानक से छिन जाएगी। बोर्ड के अधिकारियों से दीपावली तक का समय देने का आग्रह किया, जिसे अधिकारियों ने कुछ शर्तों के साथ मान लिया। फैक्ट्री मालिकों ने भी शर्तों के मुताबिक कार्य करने की स्वीकृति दी। ऐसे में दीपावली तक इन फैक्ट्री मालिकों को राहत मिल गई है। मैं समस्त एसोसिएशन की तरफ से बोर्ड के अधिकारियों का आभार व्यक्त करता हूं।
– राजेन्द्र जिंदगर,सचिव, सांगानेर कपड़ा रंगाई-छपाई एसोसिएशन
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