जयपुर। जयपुर के सांगानेर और आसपास के आवासीय इलाकों में कानून और नियमों की धज्जियां उड़ाकर संचालित हो रही अवैध रंगाई-छपाई फैक्ट्रियों के खिलाफ अब ग्रामीणों का सब्र पूरी तरह टूट चुका है। जानलेवा प्रदूषण, बंजर होती धरती और नरक बनते जीवन से त्रस्त ग्रामीणों ने सीधे मुख्यमंत्री निवास पहुंचकर मोर्चा खोल दिया है और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा है। ग्रामीणों ने दो-टूक चेतावनी दी है कि यदि इन जहरीले कारखानों पर तत्काल ताला नहीं लगा, तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।
यह भी देखें: सांगानेर के ‘गंवार ब्राह्मणान’ में घुट रहा जिंदगी का दम, 300 से ज्यादा अवैध रंगाई-छपाई फैक्ट्रियां उगल रहीं जहर
जहरीला पानी, घातक धुआं और बहरा कर देने वाला शोर

ज्ञापन में गंभीर आरोप लगाए गए हैं कि ये अवैध इकाइयां बिना किसी ट्रीटमेंट प्लांट के दिन-रात रासायनिक अपशिष्ट खुलेआम खेतों और जलस्रोतों में उड़ेल रही हैं। इस जहरीले पानी से उपजाऊ जमीनें बंजर होती जा रही हैं, और भू-गर्भ जल पूरी तरह दूषित हो चुका है। फैक्ट्रियों की चिमनियों से उगलता जहरीला धुआं और भारी-भरकम बॉयलरों-जनरेटरों का कानफाड़ू शोर बच्चों, बुजुर्गों और आम जनजीवन का चैन छीन चुका है। मूक पशुधन और इंसानों की सेहत पर लाइलाज बीमारियों का खतरा मंडरा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की हो रही सरेआम अवहेलना
ग्रामीणों ने प्रशासन को आईना दिखाते हुए 21 जुलाई 2026 के सुप्रीम कोर्ट के कड़े निर्देशों का हवाला दिया है। ज्ञापन में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि रंगाई-छपाई इकाइयों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेशों के बावजूद स्थानीय स्तर पर उनकी धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
कारनामों की हो उच्चस्तरीय जांच: कनेक्शन से लेकर एनओसी तक की खुलेगी पोल

ग्रामीणों ने केवल जुबानी जंग लड़ने के बजाय प्रशासन को घेरने के लिए एक-एक बिंदु पर जांच की मांग रखी है। ग्रामीणों ने बताया कि सभी अवैध फैक्ट्रियों के बिजली कनेक्शन, अग्निशमन प्रमाणपत्र, और ग्राम पंचायत की अनुमतियों की गहन जांच कराई जाए। इन जानलेवा इकाइयों को आवासीय बस्तियों और गांवों के बीच से तत्काल प्रभाव से बंद कर बाहर रीको क्षेत्रों या निर्धारित औद्योगिक क्षेत्रों में स्थानांतरित किया जाए।
यह भी देखें: सांगानेर में रोटेशनल प्लान का फर्जीवाड़ा; 758 की आड़ में 134 अवैध फैक्ट्रियां भी चालू, डायरेक्टर की फैक्ट्री भी शामिल
बड़ा सवाल: क्या अब भी मौन साधेगा महकमा?
जब पीड़ित खुद मुख्यमंत्री के दरवाजे पर दस्तक दे चुके हैं, तो क्या अब भी जिम्मेदार महकमे और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड इन रसूखदार फैक्ट्री मालिकों के आगे आंखें मूंदे रहेंगे? गंवार ब्राह्मणान और सांगानेर के ग्रामीणों का यह आक्रोश इस बात का संकेत है कि यदि प्रशासन ने जल्द सख्त कदम नहीं उठाए, तो स्थिति कभी भी विस्फोटक हो सकती है।
ऐसी ही खबरों के लिए देखें: DemocraticBharat.Com





