– वर्चस्व की जंग में उलझी सांगानेर की रंगाई-छपाई इंडस्ट्री: सुप्रीम कोर्ट की 29 सितंबर की सुनवाई पर टिकी निगाहें; बेनतीजा खत्म हुई 5 घंटे चली मैराथन बैठक
जयपुर। बर्बादी के मुहाने पर खड़ी सांगानेर की रंगाई-छपाई फैक्ट्रियों को बचाने के लिए बुलाई गई सांगानेर कपड़ा रंगाई-छपाई एसोसिएशन की आपात बैठक पूरी तरह ‘सियासी अखाड़ा’ बनकर रह गई। 5 घंटे तक चले इस मैराथन ड्रामे में फैक्ट्रियों के ताले खोलने का समाधान तो दूर, सिर्फ वर्चस्व की जंग, एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप और इस्तीफे का हाई-वोल्टेज शो चलता रहा। दीपावली का त्योहार सिर पर है और 4 लाख लोगों के घरों में चूल्हे ठंडे पड़ने का खतरा मंडरा रहा है, लेकिन एसोसिएशन के अगुआ फैक्ट्रियों को शुरू कराने के बजाय एक-दूसरे की कुर्सी खींचने में मस्त दिखे।
इस्तीफे पर अड़ी जंग: ‘तुम दो तो हम संभालें’

बैठक का पारा तब चढ़ा जब SEPD डायरेक्टर प्रवीण शाह ने सांगानेर कपड़ा रंगाई-छपाई एसोसिएशन के अध्यक्ष देवीशंकर खत्री और महासचिव राजेन्द्र जिंदगर से सीधे इस्तीफे मांग लिए। शाह ने दावा ठोका कि दोनों हट जाएं तो वे CETP प्लांट और फैक्ट्रियां चला देंगे। जब खत्री और जिंदगर ने समय-सीमा पूछी, तो शाह ने 7 करोड़ के उपकरण और 3-4 महीने का वक्त मांग लिया। इस पर पलटवार करते हुए खत्री और जिंदगर ने कहा-“प्रवीण शाह इस्तीफा दें, हम महज 15 दिन में फैक्ट्रियां चालू करवा देंगे” इस पर जब सदस्यों ने शाह पर इस्तीफे का दबाव बनाया, तो शाह ने नया अड़ंगा लगा दिया-“बिना MBR के 15 दिन में काम कैसे होगा? पहले प्लान बताओ, फिर कुर्सी छोड़ूंगा”
’30 साल में कभी बंद नहीं हुईं फैक्ट्रियां, अब क्यों?’
खत्री और जिंदगर ने एसोसिएशन के सदस्यों से कहा कि 30 वर्षों में कई तूफान आए, लेकिन फैक्ट्रियों के पहिए कभी नहीं थमे। सदस्यों के समर्थन के बाद खत्री गुट ने यहां तक कह दिया कि अगर 15 दिन में काम शुरू नहीं हुआ तो वे खुद पद त्याग देंगे। लेकिन शाह गुट ने इसे सिरे से नकार दिया और इस्तीफा देने से साफ इनकार कर दिया।
यह भी देखेंः यमुना जल पर 32 साल का ‘सियासी सूखा’ खत्म, CM भजनलाल का बड़ा दांव, कांग्रेस से मांगा हिसाब
वोटिंग का ड्रामा और त्योहार का वास्ता

बात इतनी बिगड़ी कि दोनों गुट शक्ति-परीक्षण के लिए वोटिंग कराने पर उतर आए। ऐन वक्त पर समझदार सदस्यों ने बीच-बचाव करते हुए याद दिलाया-“दीपावली सिर पर है। प्राथमिकता फैक्ट्रियों को शुरू करने की होनी चाहिए, नई कार्यकारिणी तो त्योहार के बाद भी चुन ली जाएगी।”
सुप्रीम कोर्ट के पाले में गेंद: 29 सितंबर पर टिकी निगाहें
कारोबारियों के दबाव के बाद प्रवीण शाह ने बताया कि मामले की सुनवाई 29 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में है। अगर कोई झटका नहीं लगा, तो 1 अक्टूबर से फैक्ट्रियां शुरू की जा सकती हैं। हालांकि, जब खत्री-जिंदगर ने CETP प्लांट पूरी क्षमता से चलाने की डेडलाइन मांगी, तो शाह ने कोई भी समय-सीमा देने से हाथ खड़े कर दिए।
एक म्यान में दो तलवारें नहीं… और बेनतीजा खत्म हुआ नाटक!

अंत में प्रवीण शाह ने आर-पार का अल्टीमेटम दे दिया-“या तो जिंदगर गुट CETP चलाएगा या मैं। “दोनों साथ रहे तो प्लांट कभी नहीं चलेगा।” खत्री और जिंदगर ने शाह को प्लांट चलाने की जिम्मेदारी सौंपी भी, लेकिन शाह ‘बिना इस्तीफे के जिम्मेदारी नहीं लेने’ की जिद पर अड़े रहे। नतीजतन, सांगानेर के हजारों मजदूरों और फैक्ट्री मालिकों की उम्मीदों पर पानी फेरते हुए बैठक बिना किसी नतीजे के खत्म हो गई।
यह भी देखेंः CM भजनलाल के गढ़ से उठी नाराजगी की आवाज, BJP नेता ने परेशान होकर JDA अफसरशाही के खिलाफ दिया धरना
सफेद हाथी बना 144 करोड़ का CETP प्लांट
“सांगानेर की मशहूर रंगाई-छपाई इंडस्ट्री को बढ़ाने और पॉल्यूशन खत्म करने के लिए केंद्र और राज्य सरकार ने मिलकर 122 करोड़ रुपए लगाकर CETP प्लांट बनवाया था, बाद में पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड और जेडीए ने 22 करोड़ रुपए और लगाए, जिससे सांगानेर का जहरीला पानी साफ हो सके। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि यह विशालकाय 144 करोड़ का CETP प्लांट आज खुद एक सफेद हाथी बन चुका है। प्लांट अपनी पूरी क्षमता से काम ही नहीं कर रहा। वजह? पानी को पूरी तरह साफ करने वाले 20 करोड़ के सबसे जरूरी उपकरण आज तक इस प्लांट में लगे ही नहीं।” इसके चलते जहरीला पानी CETP प्लांट में साफ करने के बजाय अवैध मडपम्प के जरिए नदी-नालों में बहाया जा रहा था, वहीं मुहाना मोड, सेक्टर 35, गंवार ब्राह्मणान सहित दर्जनभर कॉलोनियों के खाली भूखंड और आम रास्तों में जहरीला पानी बहाया जा रहा था, जो पॉल्यूशन फैलाने के साथ-साथ स्थानीय निवासियों को बीमारी भी बांट रहा था।
सुप्रीम कोर्ट का चाबुक चलते ही सांगानेर में हड़कंप, सील हुईं फैक्ट्रियां
इसी दौरान जोधपुर क्षेत्र की जोजरी-बांडी और लूनी नदी प्रदूषण मामले में सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित विशेष समिति ने सनसनीखेज रिपोर्ट दी थी। इसमें बताया गया कि जोजरी नदी क्षेत्र में लगभग 4 किलोमीटर लम्बी भूमिगत पाइपलाइन का जिक्र किया। इस पाइप लाइन के जरिए औद्योगिक इकाइयों का बिना उपचारित रासायनिक अपशिष्ट सीधे नदी में छोड़ा जा रहा था। इस खुलासे के बाद सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल के स्थानीय अफसरों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए। मामले की जांच केन्द्रीय एजेंसी को सौंपे जाने के बाद राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल के अफसरों ने सांगानेर में भी मौका-मुआयना किया। इसमें गंभीर लापरवाही सामने आने के बाद कई फैक्ट्रीज सील कर दी गई। बाद में सांगानेर कपड़ा रंगाई-छपाई एसोसिएशन ने 30 सितम्बर तक सेल्फ क्लोजर लेकर अपनी फैक्ट्रियों को बंद कर दिया। आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की 29 सितम्बर को सुनवाई है। इसलिए 30 सितम्बर तक का क्लोजर लिया गया।






