– करौली से पायलट का सियासी वार, गहलोत के दावों पर दिया जवाब
जयपुर। राजस्थान कांग्रेस में एक बार फिर सियासी गर्मी बढ़ती नजर आ रही है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की ओर से हाल ही में सचिन पायलट को लेकर दिए गए बयानों के बाद बुधवार को पायलट ने पहली बार सार्वजनिक मंच से जवाब दिया। हालांकि उन्होंने सीधे तौर पर गहलोत का नाम नहीं लिया, लेकिन उनके कई बयान राजनीतिक हलकों में गहलोत को जवाब के तौर पर देखे जा रहे हैं।
करौली में अपने पिता एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री राजेश पायलट की प्रतिमा के अनावरण समारोह में आयोजित सभा को संबोधित करते हुए सचिन पायलट ने कहा कि राजनीति में संयम, सम्मान और संघर्ष तीनों जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि वे हमेशा बहुत सोच-समझकर बोलते हैं क्योंकि एक बार मुंह से निकली बात वापस नहीं आती।
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“मेरा किसी से व्यक्तिगत झगड़ा नहीं”
पायलट ने कहा कि उन्होंने राजनीति में काम करने वाले हर व्यक्ति का सम्मान किया है और उनका किसी से व्यक्तिगत विवाद नहीं है। विचारों में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन मनभेद नहीं होने चाहिए। उन्होंने कहा कि सच्चाई के साथ खड़ा होना और सभी का सम्मान करना ही राजनीति की असली पहचान है।
“हम आपस में पद बांटने लगें तो संगठन कहां जाएगा”
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अशोक गहलोत ने हाल ही में कहा था कि सचिन पायलट को केंद्रीय मंत्री बनवाने में उनकी भूमिका रही थी। इस बयान पर बिना नाम लिए पलटवार करते हुए पायलट ने कहा कि किसी भी व्यक्ति का काम पद बांटना नहीं है। उन्होंने कहा, “अगर हम आपस में ही एक-दूसरे को पद बांटने लगें तो फिर विचारधारा, संगठन और जनता कहां जाएंगे? राजनीति का उद्देश्य जनता की सेवा होना चाहिए, न कि पदों का बंटवारा।”
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“फल की इच्छा से राजनीति करने वाला नाखुश रहेगा”
पायलट ने अपने भाषण में महत्वाकांक्षा और पद की राजनीति पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि संगठन और समय जब किसी को योग्य समझता है तो जिम्मेदारी देता है। लेकिन यदि कोई केवल पद पाने की इच्छा से राजनीति करता है तो वह अधिकतर समय असंतुष्ट ही रहेगा।
उन्होंने कहा, “जो व्यक्ति जनता के बीच रहकर सुख-दुख में साथ देता है, वही वास्तविक संतोष प्राप्त करता है। राजनीति में केवल पद प्राप्ति ही लक्ष्य नहीं होना चाहिए।”
“एडवांस बुकिंग वाली राजनीति का कोई मतलब नहीं”
अपने भाषण में पायलट ने भविष्यवाणियों और राजनीतिक अटकलों पर भी तंज कसा। उन्होंने कहा कि नेताओं का काम भविष्यवाणी करना नहीं है। उन्होंने कहा, “अगर हम नेता ही भविष्यवाणी करने लगेंगे तो जनता को कौन पूछेगा? एडवांस बुकिंग वाले मामलों का कोई सिर-पैर नहीं होता।”
कांग्रेस एकजुट है, खटपट होती रहती है
पायलट ने कांग्रेस में एकजुटता का संदेश देते हुए कहा कि राजनीतिक दलों में मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन जब पार्टी, किसान और जनता के हित की बात आती है तो सभी नेता एक साथ खड़े होते हैं। उन्होंने कहा, “थोड़ी बहुत खटपट चलती रहती है, लेकिन जब संगठन और जनता की बात आती है तो मंच पर मौजूद और मंच से बाहर रहने वाले सभी लोग साथ खड़े होते हैं।”
राजेश पायलट को किया याद
अपने पिता राजेश पायलट को याद करते हुए सचिन पायलट भावुक भी नजर आए। उन्होंने कहा कि उनके पिता आखिरी सांस तक कांग्रेस के एक समर्पित सिपाही की तरह जनता के अधिकारों के लिए लड़ते रहे। उन्होंने कहा, “सच्चा नेता वही है जो लोभ, लालच और पदों की अंधी दौड़ से दूर रहकर जनता का विश्वास जीतने का काम करे। इतिहास उन्हीं नेताओं को सम्मान देता है जो जनसेवा को प्राथमिकता देते हैं।”
किसानों और युवाओं के मुद्दों पर सरकार को घेरा
अपने संबोधन में पायलट ने भाजपा सरकार पर किसानों की अनदेखी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मनरेगा को सीधे बंद करने का साहस सरकार में नहीं है, इसलिए इसे धीरे-धीरे कमजोर किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि किसानों को महंगी खाद, बीज, बिजली और पानी का सामना करना पड़ रहा है, जबकि उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल रहा। फसल खराब होने पर बीमा कंपनियों से मुआवजा लेना भी मुश्किल होता जा रहा है।
इसके साथ ही उन्होंने नीट पेपर लीक मामले को लेकर भी सरकार को घेरा। पायलट ने कहा कि लाखों छात्रों और उनके परिवारों की मेहनत पर परीक्षा माफियाओं ने पानी फेर दिया, लेकिन सरकार जिम्मेदारी लेने से बच रही है।
संयमित शब्दों में बड़ा सियासी हमला
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सचिन पायलट ने इस बार सीधे टकराव से बचते हुए संयमित भाषा का इस्तेमाल किया, लेकिन उनके कई बयान अशोक गहलोत के हालिया आरोपों और दावों का जवाब माने जा रहे हैं। खास तौर पर “पद बांटने”, “फल की इच्छा” और “एडवांस बुकिंग” वाले बयान कांग्रेस के भीतर चल रही नेतृत्व की बहस से जोड़कर देखे जा रहे हैं। ऐसे में साफ है कि राजस्थान कांग्रेस में गहलोत और पायलट के बीच सियासी तल्खी भले सार्वजनिक टकराव में न बदले, लेकिन दोनों नेताओं के बयान पार्टी के अंदर शक्ति संतुलन और भविष्य की राजनीति को लेकर संकेत जरूर दे रहे हैं।
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