– न्यूनतम वेतन 15 हजार करने, VDA ऑटोमैटिक लागू करने और श्रम कानून सख्त करने की मांग
जयपुर। अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस की पूर्व संध्या पर राजस्थान की सियासत में श्रमिकों के मुद्दे को लेकर नया राजनीतिक संग्राम छिड़ गया है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत Ashok Gehlot ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा Bhajan Lal Sharma को तीखा पत्र लिखकर राज्य सरकार की श्रम नीतियों पर सवाल खड़े किए हैं। गहलोत ने आरोप लगाया कि राजस्थान में न्यूनतम मजदूरी की स्थिति देश के सबसे पिछड़े राज्यों जैसी हो गई है और मौजूदा सरकार श्रमिकों को महंगाई के भरोसे छोड़ चुकी है।
गहलोत ने अपने विस्तृत पत्र में कहा कि राजस्थान में अकुशल श्रमिकों को वर्तमान में केवल 7,410 रुपए प्रतिमाह और अत्यधिक कुशल श्रमिकों को 9,334 रुपए प्रतिमाह न्यूनतम मजदूरी मिल रही है, जो बढ़ती महंगाई और जीवन-यापन की लागत के मुकाबले बेहद कम है। उन्होंने दावा किया कि पिछले दस वर्षों में मजदूरी में केवल 40 से 50 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई, जबकि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) लगभग दोगुना हो चुका है। ऐसे में मजदूरों की वास्तविक आय में कोई ठोस सुधार नहीं हुआ।
“राजस्थान श्रमिक कल्याण में पिछड़ गया”
पूर्व मुख्यमंत्री ने पत्र में केरल, तमिलनाडु और दिल्ली का उदाहरण देते हुए कहा कि इन राज्यों में न्यूनतम मजदूरी में 80 से 110 प्रतिशत तक वृद्धि हुई, जबकि राजस्थान इस दौड़ में काफी पीछे रह गया है। गहलोत ने इसे राज्य सरकार की “श्रमिक विरोधी आर्थिक सोच” करार दिया। उन्होंने कहा कि राजस्थान जैसे श्रमिक-बहुल प्रदेश में मजदूरों की आय कमजोर रहने का सीधा असर बाजार, उपभोग क्षमता और राज्य की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। गहलोत ने चेतावनी दी कि यदि श्रमिकों की क्रय शक्ति नहीं बढ़ी तो आर्थिक विकास की गति भी प्रभावित होगी।
यह भी देखेंः “बंगाल चुनाव पर गहलोत का बड़ा हमला: ‘हथकंडों का खेल, EC पर गंभीर आरोप-ये लोकतंत्र नहीं, साजिश’
गहलोत ने उठाए सरकार की नीति पर सवाल
गहलोत ने राज्य सरकार की मौजूदा मजदूरी व्यवस्था को अव्यवस्थित बताते हुए कहा कि राजस्थान में सभी असूचीबद्ध रोजगारों के लिए लगभग एक समान मजदूरी दर लागू कर दी जाती है, जबकि कृषि, निर्माण, घरेलू कार्य, ईंट-भट्टा और हस्तशिल्प जैसे क्षेत्रों की परिस्थितियां अलग-अलग हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि परिवर्तनीय महंगाई भत्ता (VDA) का संशोधन समय पर नहीं किया जाता, जिसके कारण महंगाई का पूरा बोझ मजदूरों पर आ जाता है। साथ ही परिवहन, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे जरूरी खर्चों को मजदूरी निर्धारण में शामिल नहीं किया जाना भी उन्होंने बड़ी खामी बताया।
गहलोत की 5 बड़ी मांगें
पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को भेजे पत्र में श्रमिक हित में कई बड़े सुझाव भी दिए
- न्यूनतम मजदूरी तत्काल बढ़ाकर 12 से 15 हजार रुपए प्रतिमाह की जाए।
- VDA संशोधन हर छह माह में स्वतः लागू हो।
- केरल और तमिलनाडु की तर्ज पर क्षेत्र-विशिष्ट मजदूरी प्रणाली लागू की जाए।
- मजदूरी निर्धारण में स्वास्थ्य, शिक्षा और परिवहन भत्ते शामिल हों।
- श्रम कानूनों के प्रवर्तन को मजबूत कर डिजिटल निगरानी और सख्त दंड व्यवस्था लागू की जाए।
मजदूर दिवस से पहले सियासी संदेश
राजनीतिक जानकार गहलोत के इस पत्र को केवल श्रमिक हित की पहल नहीं, बल्कि मजदूर वर्ग और असंगठित क्षेत्र के कर्मचारियों के बीच राजनीतिक संदेश के रूप में भी देख रहे हैं। राजस्थान में महंगाई, बेरोजगारी और श्रमिक मुद्दों को लेकर विपक्ष लगातार सरकार पर हमलावर है। ऐसे में मजदूर दिवस से ठीक पहले गहलोत का यह पत्र भाजपा सरकार को घेरने की रणनीति माना जा रहा है।
कांग्रेस इस मुद्दे को आने वाले समय में बड़े राजनीतिक अभियान के रूप में आगे बढ़ा सकती है, जबकि भाजपा सरकार पर अब श्रमिक कल्याण और न्यूनतम मजदूरी को लेकर जवाब देने का दबाव बढ़ गया है।
ऐसी ही खबरों के लिए देखेंः DemocraticBharat.com






