जयपुर। पश्चिम बंगाल दौरे से लौटने के बाद जयपुर एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत में अशोक गहलोत ने बंगाल चुनाव को लेकर तीखा राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने कहा कि राज्य में चुनावी माहौल बेहद असामान्य है और 4 तारीख तक किसी भी नतीजे का अनुमान लगाना मुश्किल है। गहलोत ने आरोप लगाया कि चुनाव में बड़े पैमाने पर धनबल का इस्तेमाल हो रहा है और इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया Election Commission of India की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े होते हैं। उनके मुताबिक, “आजादी के बाद ऐसा माहौल पहले कभी नहीं देखा गया, जहां चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर इस तरह के आरोप लग रहे हों।” उन्होंने दावा किया कि बड़ी संख्या में वोट काटे जाने और उनकी जांच पूरी न हो पाने से लोकतांत्रिक प्रक्रिया प्रभावित हुई है। गहलोत ने सवाल उठाया कि इतनी गंभीर शिकायतों के बावजूद चुनाव को स्थगित क्यों नहीं किया गया।
‘डर और दबाव में चुनाव’
गहलोत ने बंगाल में सुरक्षा बलों की भारी तैनाती, बख्तरबंद गाड़ियों और कथित तौर पर पैसे बांटे जाने को लेकर कहा कि यह माहौल मतदाताओं को प्रभावित करने वाला है। उनके शब्दों में, “चुनाव कम और हथकंडों का खेल ज्यादा नजर आ रहा है।”
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राजनीतिक समीकरण पर टिप्पणी
उन्होंने कहा कि अगर भाजपा को जीत मिलती है तो यह उसकी विचारधारा की नहीं, बल्कि अपनाए गए तरीकों की जीत होगी। वहीं, अगर ममता बनर्जी दोबारा सत्ता में लौटती हैं, तो यह जनता के फैसले का परिणाम होगा।
राहुल गांधी के बयान का समर्थन
बीजेपी की बढ़ती मौजूदगी पर गहलोत ने राहुल गांधी के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि राज्य में भ्रष्टाचार और शासन की कमियों ने विपक्ष को अवसर दिया है। हालांकि, उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राजनीतिक षड्यंत्रों के जरिए पहले भी सरकारों को अस्थिर किया जाता रहा है।
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‘लोकतंत्र की परीक्षा’
गहलोत ने कहा कि यह चुनाव केवल राजनीतिक दलों के बीच मुकाबला नहीं है, बल्कि चुनाव आयोग की विश्वसनीयता की भी परीक्षा है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, “अगर चुनाव आयोग अपनी जिम्मेदारी निभाने में विफल रहता है, तो इसका असर पूरे देश के लोकतंत्र पर पड़ेगा।”
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