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“30 महीने की देरी, अब परिसीमन का बहाना”, अलका लाम्बा का मोदी सरकार पर सीधा हमला

– महिला आरक्षण पर सियासी संग्राम तेज: कांग्रेस बोली,“नियत में खोट, इसलिए देरी

 

जयपुर। जयपुर में महिला कांग्रेस ने भाजपा की डबल इंजन सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन करते हुए महिला आरक्षण मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरा। अखिल भारतीय महिला कांग्रेस अध्यक्ष अलका लाम्बा Alka Lamba ने प्रेसवार्ता में आरोप लगाया कि महिला आरक्षण कानून को जानबूझकर लागू नहीं किया गया और अब परिसीमन के बहाने राजनीति की जा रही है। उन्होंने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 सर्वसम्मति से पास होने के बावजूद सरकार ने 30 महीने तक नोटिफिकेशन जारी नहीं किया। उन्होंने कहा, “अब जब दबाव बढ़ा, तो आधी रात को नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया।”

“परिसीमन के नाम पर सियासत”

लाम्बा ने आरोप लगाया कि 16–18 अप्रैल 2026 के विशेष सत्र में महिला आरक्षण पर चर्चा के बजाय परिसीमन संशोधन विधेयक लाया गया। विपक्ष की सर्वदलीय बैठक की मांग और मसौदा साझा करने की अपील को सरकार ने नजरअंदाज कर दिया। कांग्रेस का कहना है कि बंगाल और तमिलनाडु चुनाव के चलते कई सांसद अनुपस्थित थे, ऐसे में सत्र को टालना चाहिए था, लेकिन सरकार ने जल्दबाजी दिखाई।

यह भी देखें: महिला आरक्षण पर विपक्ष का ‘डबल गेम’,“मोदी को रोकने के लिए रचा गया षड्यंत्र, विपक्ष पूरी तरह एक्सपोज”

“180 सीटें महिलाओं को क्यों नहीं?”

महिला कांग्रेस ने मांग की कि मौजूदा 543 लोकसभा सीटों में से 180 सीटें तुरंत महिलाओं को दी जाएं। साथ ही ओबीसी वर्ग की महिलाओं को भी आरक्षण में शामिल करने की मांग उठाई गई।

दक्षिण और उत्तर-पूर्वी राज्यों को होता नुकसान

अखिल भारतीय महिला कांग्रेस अध्यक्ष अल्का लाम्बा प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में पत्रकारों को सम्बोधित करते हुए।
अखिल भारतीय महिला कांग्रेस अध्यक्ष अल्का लाम्बा प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में पत्रकारों को सम्बोधित करते हुए।

अलका लाम्बा ने कहा कि 2026 में शुरू हुई जातिगत जनगणना के आंकड़ों को नजरअंदाज कर भाजपा परिसीमन करना चाहती है और लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर 850 करने की योजना बना रही है। भाजपा इससे राजनीतिक लाभ लेने के लिए देश का चुनावी नक्शा बदलने की कोशिश कर रही थी। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा होता, तो दक्षिण और उत्तर-पूर्वी राज्यों को नुकसान उठाना पड़ता। लाम्बा ने दावा किया कि विपक्ष के विरोध के कारण 12 साल में पहली बार भाजपा को इस मुद्दे पर पीछे हटना पड़ा।

BJP पर ‘महिला विरोधी’ होने का आरोप

उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने 1990 के दशक में पंचायती राज संस्थाओं में महिला आरक्षण लागू कर लाखों महिलाओं को नेतृत्व में लाया, जबकि भाजपा ने 2023 में कानून पास कर भी उसे लागू करने में देरी की।

सियासी टकराव और बढ़ेगा

महिला कांग्रेस ने साफ किया कि यह मुद्दा अब सड़क से संसद तक उठाया जाएगा। मानसून सत्र में भी केंद्र सरकार पर दबाव बनाया जाएगा कि महिला आरक्षण तुरंत लागू किया जाए। आपको बता दें कि महिला आरक्षण पर सियासत अब खुलकर सामने आ चुकी है। एक तरफ सरकार की मंशा पर सवाल, तो दूसरी तरफ विपक्ष का आक्रामक रुख। आने वाले दिनों में यह मुद्दा देश की राजनीति का बड़ा केंद्र बनने जा रहा है।


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