– SEPD मैनेजमेंट ने सांगानेर में जहरीले पानी से पर्यावरण को पहुंचाया भारी नुकसान, CETP के घटिया संचालन पर लगा था जुर्माना
– 60 दिन की मियाद खत्म, ब्याज चढ़ना शुरू; लेकिन कलेक्टर को रिकवरी पत्र भेजने की जहमत तक नहीं उठाई
जयपुर। सांगानेर में CETP (कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट) के घटिया संचालन और खुलेआम बहते जहरीले पानी से पर्यावरण को पहुंचे अपूरणीय नुकसान पर राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ‘रहमोकरम’ की नीति पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड ने प्रदूषण फैलाने की एवज में एसईपीडी (SEPD) मैनेजमेंट पर 20.16 लाख रुपए की पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति (पेनल्टी) ठोकी थी, लेकिन पेनल्टी जमा कराने की मियाद बीत जाने के महीनों बाद भी बोर्ड के अधिकारी सिर्फ कागजी घोड़ों पर सवार हैं और धरातल पर कार्रवाई शून्य है।
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कागजी कार्रवाई का खेल, 60 दिन की डेडलाइन पर 90 दिन का सन्नाटा
मामला यह है कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अतिरिक्त मुख्य पर्यावरण अभियंता अमित शर्मा ने 30 जुलाई 2026 को एसईपीडी मैनेजमेंट को बाकायदा नोटिस जारी कर 20.16 लाख रुपए की पेनल्टी जमा कराने के लिए 60 दिन (दो महीने) का वक्त दिया था। यह मियाद बीते काफी दिन पहले ही खत्म हो चुकी है। आज 90 दिन यानी पूरे तीन महीने बीत जाने के बावजूद एसईपीडी मैनेजमेंट ने सरकारी खजाने में एक धेला तक जमा नहीं कराया है। अचरज की बात तो यह है कि समय सीमा खत्म होने के बाद पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड ने इस पर चुप्पी साध ली। नियम-कायदों को ताक पर रखकर एसईपीडी मैनेजमेंट को ढील दी जा रही है।
कायदे से कलेक्टर को जाना चाहिए था रिकवरी पत्र, फिर देरी क्यों?

पर्यावरण और कानूनी जानकारों के अनुसार, यदि तय 60 दिनों के भीतर पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति राशि जमा नहीं कराई जाती है, तो नियमानुसार प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को तुरंत जयपुर जिला कलेक्टर को रिकवरी के लिए पत्र लिखना होता है। ‘पब्लिक रिकवरी डिमांड एक्ट’ के तहत जिला प्रशासन के जरिए ही ऐसी बकाया राशियों की कुर्की या सख्त रिकवरी कराई जाती है। हैरानी की बात यह है कि 60 दिन पूरे होने के बाद कानूनी रूप से इस पेनल्टी राशि पर ब्याज भी जुड़ना शुरू हो जाता है, लेकिन 90 दिन बीतने के बाद भी पॉल्यूशन बोर्ड ने जिला प्रशासन को रिकवरी के लिए पत्र तक लिखना मुनासिब नहीं समझा।
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बड़ा सवाल, मांग रहा अधिकारियों से जवाब
क्या प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी सिर्फ अपनी गर्दन बचाने के लिए कागजों में पूरी लिखापढ़ी कर रहे हैं, जबकि धरातल पर मिलीभगत के चलते कोई ठोस एक्शन नहीं ले रहे? क्या बोर्ड के नुमाइंदे यह नहीं चाहते कि पेनल्टी की रकम से सरकारी खजाना भरे और सांगानेर में बेधड़क प्रदूषण फैला रहा एसईपीडी मैनेजमेंट अपनी हरकतों से बाज आए? अब देखना यह होगा कि क्या प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अपनी नींद से जागकर जयपुर कलेक्टर को रिकवरी पत्र भेजता है या फिर एसईपीडी मैनेजमेंट को यूं ही पर्यावरणीय नियमों की धज्जियां उड़ाने की खुली छूट मिलती रहेगी।
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अधिकारियों का गोलमोल जवाब
“पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति राशि जमा कराने के लिए 60 दिन का समय होता है। यदि 60 दिन की अवधि पूरी हो गई है तो हम कलेक्टर को रिकवरी के लिए पत्र लिखेंगे।”
– अमित शर्मा, अतिरिक्त मुख्य पर्यावरण अभियंता, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
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