– सांगानेर में सीईपीटी प्लांट के सामने चैम्बर्स के जरिए नेवटा फीडर में छोड़ा जा रहा था जहरीला पानी, जलसंसाधन विभाग ने किए बंद
जयपुर। सांगानेर के रंगाई-छपाई उद्योग की आड़ में पर्यावरण और जनस्वास्थ्य के साथ हो रहे खिलवाड़ पर जल संसाधन विभाग ने बहुत बड़ा और कड़ा एक्शन लिया है। विभाग ने सीईटीपी (CETP) प्लांट के चैम्बर्स के जरिए नेवटा फीडर में धड़ल्ले से छोड़े जा रहे जहरीले केमिकल वाले पानी पर सीधी ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ कर दी है। जल संसाधन विभाग की टीम ने ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए प्लांट के ठीक सामने बने उन तमाम चैम्बर्स को पूरी तरह बंद (सील) कर दिया है, जिसके चलते अब खुद सीईटीपी प्लांट के भीतर और आसपास पानी लबालब भर चुका है।
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एसईपीडी डायरेक्टर के दावों की निकली हवा
इस अचानक हुई कार्रवाई ने एसईपीडी (SEPD) के डायरेक्टर प्रवीण शाह के उन तमाम दावों की हवा निकाल दी है, जिसमें वे प्लांट से 4 एमएलडी (MLD) पानी को साफ करने का दावा कर अपनी पीठ थपथपा रहे थे। इस प्रशासनिक वार ने यह शीशे की तरह साफ कर दिया है कि मौजूदा एसईपीडी मैनेजमेंट इस महत्वपूर्ण सीईटीपी प्लांट को चलाने में पूरी तरह नाकाबिल और फिसड्डी साबित हुआ है। जानकारों का कहना है कि इस मैनेजमेंट की मंशा प्लांट को सुचारू रूप से चलाने की बिलकुल नहीं है, बल्कि उनका एकमात्र मकसद सिर्फ अपनी कुर्सी पर जमे रहना है।
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30 MLD जहरीला पानी सीधे नेवटा फीडर में

सूत्रों और विभागीय जानकारों के मुताबिक, इन बंद किए गए चैम्बर्स के काले खेल के जरिए रोजाना करीब 30 एमएलडी (MLD) खतरनाक और जहरीला रसायनयुक्त पानी सीधे नेवटा फीडर में उडेला जा रहा था। यानी खुलेआम प्रकृति का सीना चीरकर जल स्त्रोतों को बर्बाद किया जा रहा था। बड़ी खबर यह भी है कि जल संसाधन विभाग द्वारा की गई इस कार्रवाई के बाद, इन सील चैम्बर्स को किसी भी तरह दोबारा खुलवाने के लिए एसईपीडी डायरेक्टर प्रवीण शाह अब ‘साम, दाम, दंड, भेद’ की हर नीति का इस्तेमाल करने में जुट गए हैं।
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राजस्थान पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की भूमिका पर उठे बड़े सवाल

इस पूरे प्रकरण ने अब राजस्थान पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की कार्यशैली पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। सवाल यह उठ रहा है कि जब जल संसाधन विभाग की टीम को ये अवैध चैम्बर्स साफ-साफ दिखाई दे गए, तो फिर आए दिन सीईटीपी का निरीक्षण करने वाले पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के ‘जिम्मेदार’ अधिकारियों को ये क्यों नजर नहीं आए? क्या यह प्रशासनिक लापरवाही है या फिर गहरी मिलीभगत के चलते बोर्ड के अधिकारी इन कारनामों को जानबूझकर देखना ही नहीं चाहते थे? अब पूरे सांगानेर और जयपुर जिले की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या जल संसाधन विभाग अपने इस कड़े फैसले पर अडिग रहता है और नेवटा को इस जहरीले जहर से बचाता है… या फिर एसईपीडी मैनेजमेंट के दबाव और जोड़-तोड़ के आगे सिस्टम एक बार फिर घुटने टेक देगा।
जेसीबी से बंद कर दिया जहरीला पानी
सीईटीपी के चैम्बर्स से कैमिकल वाला पानी नेवटा फीडर में जाने की जानकारी मिली थी। इसके बाद जेसीबी से उस चैनल को बंद कर दिया, जहां से पानी नेवटा फीडर में जा रहा था।
– मनीष जोशी, जेईएन, जलसंसाधन विभाग, जयपुर
इन जिम्मेदारों को पता ही नहीं
जलसंसाधन विभाग की ओर से सीईटीपी प्लांट के चैम्बर्स को बंद करने की कोई जानकारी नहीं है। जलसंसाधन विभाग ने कब कार्रवाई की, क्यों की…इसके बारे में भी हमारे पास कोई जानकारी नहीं है।
-प्रवीण शाह, डायरेक्टर एसईपीडी
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