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सांगानेर में ‘टॉक्सिक’ खेल का पर्दाफाश: SEPD का भ्रमजाल ध्वस्त, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने ठोंका ₹20.16 लाख का जुर्माना

– ‘डेमोक्रेटिक भारत’ का महा-इम्पैक्ट: CM के क्षेत्र में जहर घोलने वाले SEPD मैनेजमेंट पर प्रदूषण बोर्ड का बड़ा चाबुक

 

जयपुर। सांगानेर के निवासियों, किसानों और आम जनजीवन की सेहत से खुलेआम खिलवाड़ करने वाले सांगानेर एनवायरो प्रोजेक्ट डेवलपमेंट (SEPD) मैनेजमेंट के ‘झूठ का किला’ आखिरकार ढह गया है। सांगानेर की कॉलोनियों, खेतों, नालों और कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (CETP) के सामने बहते कैमिकल युक्त जहरीले पानी को अब तक ‘गंदा नाला’ बताकर जनता की आंखों में धूल झोंक रहे एसईपीडी प्रबंधन को राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल (RSPCB) ने करारा झटका दिया है। बोर्ड ने सीईटीपी के घटिया संचालन और पर्यावरण को पहुंचे भारी नुकसान की एवज में एसईपीडी पर 20 लाख 16 हजार रुपए की पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति (पैनल्टी) ठोक दी है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अतिरिक्त मुख्य पर्यावरण अभियंता अमित शर्मा की ओर से जारी कड़े पत्र में स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि एसईपीडी मैनेजमेंट को यह पैनल्टी राशि दो महीने के भीतर जमा करानी होगी। तय अवधि में भुगतान ना करने पर बोर्ड सख्त कानूनी कार्रवाई करते हुए ब्याज समेत वसूली करेगा।

 

 

‘डेमोक्रेटिक भारत’ की पड़ताल का महा-असर

यह पूरी कार्रवाई ‘डेमोक्रेटिक भारत’ की उस बेबाक और जनहितैषी खोजी खबर का नतीजा है, जिसने व्यवस्था के दावों की धज्जियां उड़ा दी थीं। 9 जुलाई 2026 को “CM का क्षेत्र बना नरक!, द्रव्यवती नदी में कपड़ा फैक्ट्रियों का जहरीला पानी” शीर्षक से प्रकाशित खबर में वीडियो सबूतों के साथ उजागर किया गया था कि कैसे एसईपीडी डायरेक्टर प्रवीण शाह की शह पर सीईटीपी प्लांट के टॉक्सिक एफ्लुएंट (कैमिकल युक्त पानी) को अवैध मडपंप लगाकर सीधे द्रव्यवती नदी में बहाया जा रहा था। खबर पर संज्ञान लेते हुए प्रदूषण बोर्ड की टीम ने मौके पर धावा बोला, अवैध मडपम्प को जब्त किया और पूरे सीईटीपी प्लांट का गहन निरीक्षण किया। जांच में बोर्ड को खामियों का अंबार मिला, जिसके बाद यह भारी-भरकम पैनल्टी लगाई गई।

देखें वीडियो 👇

 

 

वादों का पुलिंदा साबित हुआ एसईपीडी, ZLD सिस्टम भी फेल

 

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पत्र ने एसईपीडी मैनेजमेंट की कार्यशैली की पोल खोलकर रख दी है:

 

झूठे वादे: एसईपीडी ने 30 मार्च 2026 को बोर्ड को लिखित में झांसा दिया था कि गंवार ब्राह्मणान की 134 कपड़ा फैक्ट्रियों को सीईटीपी से जोड़ने वाला पम्पिंग स्टेशन 31 मई 2026 तक शुरू कर दिया जाएगा। आलम यह है कि अक्टूबर 2026 बीतने को है, लेकिन पम्पिंग स्टेशन आज तक शुरू नहीं हो सका।

खुद के डायरेक्टर की फैक्ट्री ही अवैधः सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि गंवार ब्राह्मणान क्षेत्र में खुद एसईपीडी डायरेक्टर प्रवीण शाह की भी फैक्ट्री संचालित है, जो अब तक सीईटीपी प्लांट से नहीं जोड़ी गई है। ऐसे में नियमानुसार गंवार ब्राह्मणान की 134 फैक्ट्रियां भी अवैध हैं।

नियमों की धज्जियां: प्लांट में अब तक जीरो लिक्विड डिस्चार्ज (ZLD) सिस्टम तक स्थापित नहीं हो पाया है। प्लांट अपनी पूर्ण क्षमता पर चलने में पूरी तरह नाकाम है, जिसके चलते रंगाई-छपाई इकाइयों का जहरीला पानी सड़कों, कॉलोनियों और खेतों में कहर बरपा रहा है

 

 

यह भी देखेंः सांगानेर में रोटेशनल प्लान का फर्जीवाड़ा; 758 की आड़ में 134 अवैध फैक्ट्रियां भी चालू, डायरेक्टर की फैक्ट्री भी शामिल

 

 

नेवटा नहर में ‘चोरी-छिपे’ पाइपलाइन का खेल

 

निरीक्षण के दौरान बोर्ड अधिकारियों की नजर CETP के सामने नेवटा फीडर नहर में डाली गई 18 इंच चौड़ी लोहे की सीक्रेट पाइपलाइन पर पड़ी। यह पाइपलाइन मुख्य पंपिंग स्टेशन (MPS) से इक्वलाइजेशन टैंक तक केमिकल ले जाने वाली मेन लाइन से ब्रांच बनाकर जोड़ी गई थी। यद्यपि निरीक्षण के समय बहाव बंद मिला, लेकिन यह साफ इशारा करता है कि एसईपीडी मैनेजमेंट इसी चोर रास्ते से नेवटा नहर में जहरीला केमिकल उड़ेल रहा था। प्रशासनिक जांच से बचने के लिए उस समय कैमिकल पानी का बहाव बंद कर दिया गया था।

 

 

कोर्ट और NGT के आदेशों को दिखाया ठेंगा

 

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के जयपुर (दक्षिण) क्षेत्रीय कार्यालय ने 1 जून 2026 से 6 जुलाई 2026 तक (36 दिन) की विस्तृत जांच रिपोर्ट तैयार की थी। इस रिपोर्ट के आधार पर बोर्ड ने निष्कर्ष निकाला कि एसईपीडी ने जल अधिनियम,एनजीटी और हाईकोर्ट के स्पष्ट निर्देशों का सीधा उल्लंघन किया है। पैनल्टी से पहले बोर्ड ने 23 जुलाई को डायरेक्टर प्रवीण शाह को अपना पक्ष रखने का मौका दिया था। 29 जुलाई को दिए गए उनके लिखित जवाब को बोर्ड ने पूरी तरह से असंतोषजनक, हवा-हवाई और गुमराह करने वाला मानते हुए खारिज कर दिया और 20 लाख 16 हजार की पैनल्टी लगा दी।

 

 

यह भी देखेंः  सांगानेर CETP प्लांट के कैमिकल पानी से व्यापारी को 5 लाख का नुकसान, SEPD डायरेक्टर बोले- चिट्ठी में नाले का पानी लिखो वरना नहीं निकालेंगे

 

 

शिकायत के सत्यापन के बाद लगाई पैनल्टी

“सीईटीपी का कैमिकल युक्त जहरीला पानी अवैध मडपंप के जरिए द्रव्यवती नदी में बहाने की शिकायत मिली थी, जो बोर्ड की जांच में शत-प्रतिशत सही पाई गई। इसके एवज में एसईपीडी मैनेजमेंट पर 20,16,000 रुपए की पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति पैनल्टी लगाई गई है। सांगानेर में केवल वही फैक्ट्रियां वैध मानी जाएंगी जो सीईटीपी से जुड़ी हैं, इसके अलावा बिना कनेक्शन चल रही तमाम इकसामान फैक्ट्रियां अवैध हैं और उन पर कार्रवाई होगी।                -कपिल चंद्रावल, सदस्य सचिव, राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल, जयपुर

ऐसी ही खबरों के लिए देखेंः DemocraticBharat.com

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