– किडनी कांड’ पर गहलोत का वार: दोषियों पर FIR हो, रिपोर्ट सार्वजनिक करे सरकार
जयपुर। कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल और बीकानेर के पीबीएम अस्पताल में प्रसव के बाद महिलाओं की मौत और कई प्रसूताओं की किडनी फेल होने के मामले ने राजस्थान की राजनीति में नया भूचाल ला दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को एक तीखा और विस्तृत पत्र लिखकर राज्य सरकार को सीधे कठघरे में खड़ा कर दिया है। गहलोत ने इस पूरे मामले को महज चिकित्सा लापरवाही नहीं, बल्कि “सरकारी व्यवस्था की संस्थागत विफलता” बताते हुए कहा कि गरीब महिलाओं ने सरकारी अस्पतालों पर भरोसा किया, लेकिन उन्हें बदले में मौत, बीमारी और पीड़ा मिली। उन्होंने सरकार पर पूरे मामले का सच छिपाने का भी आरोप लगाया।
“सरकारी तंत्र ने गरीब माताओं के साथ किया विश्वासघात”
पूर्व मुख्यमंत्री ने पत्र में लिखा कि वे स्वयं 17 जून को कोटा अस्पताल पहुंचे और भर्ती महिलाओं व उनके परिजनों से मिले। वहां का मंजर देखकर वे स्तब्ध रह गए। गहलोत के अनुसार ये सभी गरीब परिवारों की महिलाएं हैं, जो बेहतर इलाज की उम्मीद में सरकारी अस्पताल पहुंचीं, लेकिन व्यवस्था की खामियों का शिकार बन गईं।
उन्होंने दावा किया कि 4 मई से अब तक कोटा के अस्पताल में पांच प्रसूता महिलाओं की मौत हो चुकी है, जबकि पांच अन्य महिलाओं की किडनी गंभीर रूप से प्रभावित हुई है और उन्हें नियमित डायलिसिस करानी पड़ रही है।
यह भी देखें: CM भजनलाल के गढ़ से उठी नाराजगी की आवाज, BJP नेता ने परेशान होकर JDA अफसरशाही के खिलाफ दिया धरना
“एम्स की रिपोर्ट ने खोली अस्पताल प्रशासन की पोल”

गहलोत ने पत्र में कहा कि एम्स की टीम ने ऑपरेशन थियेटर में संक्रमण की आशंका जताई है, जिससे अस्पताल प्रशासन के दावों पर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मीडिया रिपोर्ट्स और विशेषज्ञों ने भी अमानक दवाइयों, अस्पताल में गंदगी, संक्रमण और चिकित्सकीय लापरवाही को संभावित कारण बताया है। उन्होंने यह भी कहा कि बीकानेर के पीबीएम अस्पताल में भी पांच प्रसूताओं की किडनी फेल होने के मामले सामने आए हैं। वहां ओटी के आसपास गंदगी, संक्रमण और गायनी विभाग के लिए अलग आईसीयू की कमी जैसे गंभीर मुद्दे जांच में सामने आने की बात कही गई है।
सरकार पर सबसे बड़ा सवाल- रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं?
पूर्व मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार पर सबसे बड़ा हमला जांच रिपोर्ट को लेकर बोला है। उन्होंने कहा कि मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार एम्स और राज्य सरकार की जांच रिपोर्ट तैयार हो चुकी है, लेकिन उसे जनता के सामने नहीं लाया जा रहा।गहलोत ने पूछा कि आखिर सरकार किस बात को छिपाना चाहती है? मौतों और किडनी फेल होने के पीछे असली वजह क्या थी? दवाइयों की गुणवत्ता, ऑपरेशन थियेटर की स्वच्छता, इलाज में लापरवाही या फिर प्रशासनिक अव्यवस्था? उन्होंने कहा कि जब तक जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं होगी, तब तक पीड़ित परिवारों को न्याय नहीं मिलेगा और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकना भी संभव नहीं होगा।

FIR से लेकर आजीवन इलाज तक, गहलोत की 8 बड़ी मांगें
पूर्व मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के सामने कई महत्वपूर्ण मांगें रखी हैं-
दोषी अधिकारियों और डॉक्टरों को तत्काल निलंबित कर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए।
एम्स और राज्य सरकार की जांच रिपोर्ट तत्काल सार्वजनिक की जाए।
एफएसएल रिपोर्ट को फास्ट ट्रैक प्रक्रिया से जल्द प्राप्त किया जाए।
मृतक महिलाओं के परिवारों और पीड़ितों को तत्काल आर्थिक सहायता दी जाए।
प्रभावित महिलाओं के किडनी ट्रांसप्लांट और आजीवन इलाज की पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार उठाए।
जरूरत पड़ने पर मरीजों को दिल्ली और मुंबई के विशेषज्ञ अस्पतालों में भेजा जाए।
पूरे प्रदेश के सरकारी अस्पतालों के ऑपरेशन थियेटरों का विशेष ऑडिट कराया जाए।
सरकार सार्वजनिक रूप से भरोसा दिलाए कि भविष्य में ऐसी घटनाएं नहीं होंगी।
“हादसा बताकर दबाने की कोशिश बर्दाश्त नहीं”
पत्र के सबसे तीखे हिस्से में गहलोत ने लिखा कि यह कोई सामान्य दुर्घटना नहीं है, बल्कि सरकार की प्रशासनिक विफलता का उदाहरण है। उन्होंने कहा कि निर्दोष गरीब माताओं ने अपनी जान और किडनियां गंवाकर इस विफलता की कीमत चुकाई है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस पूरे मामले को सिर्फ “दुर्भाग्यपूर्ण हादसा” बताकर दबाने की कोशिश की गई तो यह स्वीकार्य नहीं होगा।
यह भी देखें: 93 करोड़ की दवा योजना पर सवाल! राजस्थान में बिना फार्मासिस्ट चल रहे हजारों पशु चिकित्सा केंद्र
राजस्थान की राजनीति में नया घमासान
कोटा और बीकानेर अस्पतालों का यह मामला अब स्वास्थ्य सेवाओं से आगे बढ़कर राजनीतिक लड़ाई का केंद्र बनता दिखाई दे रहा है। अशोक गहलोत ने सीधे मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की जवाबदेही तय करने की कोशिश की है, जबकि सरकार पहले से जांच और कार्रवाई का दावा कर रही है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा विधानसभा से लेकर सड़क तक सियासी टकराव का बड़ा कारण बन सकता है। विपक्ष इसे सरकार की नाकामी के रूप में पेश कर रहा है, जबकि सरकार पर अब जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने और जवाब देने का दबाव बढ़ता जा रहा है।
ऐसी ही खबरों के लिए देखें: DemocraticBharat.com






