– शहरी सेवा शिविर में मचा बवालः पट्टे के लिए दो साल से काट रहा था चक्कर, सुनवाई नहीं होने पर धरने पर बैठा
जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के विधानसभा क्षेत्र सांगानेर में ही भाजपा के एक स्थानीय नेता को जेडीए के खिलाफ धरने पर बैठना पड़ा। यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब राज्य सरकार शहरी सेवा शिविरों के जरिए आमजन को त्वरित राहत पहुंचाने का दावा कर रही है। लेकिन राजधानी जयपुर में हुए इस घटनाक्रम ने सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच के अंतर को उजागर कर दिया है। जानकारी के अनुसार पट्टे की मांग को लेकर पिछले दो वर्षों से जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) के चक्कर काट रहे मानसरोवर निवासी श्याम शर्मा गुरुवार को नागरिक सेवा केंद्र पहुंचे थे। उम्मीद थी कि शहरी सेवा शिविर में उनकी समस्या का समाधान हो जाएगा, लेकिन घंटों इंतजार और अधिकारियों के चक्कर लगाने के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हुई।
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सुनवाई नहीं होने पर बिगड़ी तबीयत
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार शर्मा कई घंटों तक नागरिक सेवा केंद्र में अधिकारियों के चक्कर लगाते रहे, लेकिन उनकी फाइल पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इससे नाराज होकर उन्होंने विरोध जताया। इसी दौरान उनकी तबीयत बिगड़ गई और वे गश खाकर गिरते-गिरते बच गए। मौके पर मौजूद लोगों ने उन्हें संभाला। घटना के बाद शर्मा नागरिक सेवा केंद्र के बाहर धरने पर बैठ गए और जेडीए प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। देखते ही देखते करीब 8 से 10 लोग उनके समर्थन में धरने पर बैठ गए। करीब एक घंटे तक चले विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रशासन के खिलाफ लोगों में भारी नाराजगी देखने को मिली।
भाजपा नेता का आरोप- सरकार की मंशा अच्छी, अधिकारी नहीं कर रहे काम
धरने पर बैठे शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार आमजन को राहत देने के लिए शिविर लगा रही है, लेकिन जेडीए के अधिकारी इन प्रयासों को विफल कर रहे हैं। उनका आरोप था कि न तो शिविरों में लोगों के काम हो रहे हैं और न ही सामान्य दिनों में अधिकारियों द्वारा शिकायतों की सुनवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि जेडीसी से मिलने के लिए भी कई स्तर की औपचारिकताओं से गुजरना पड़ता है। पास बनवाने और विभिन्न अधिकारियों तक पहुंचने में ही लोगों का पूरा समय निकल जाता है। कई बार अधिकारी और कर्मचारी अपने स्थान पर मौजूद भी नहीं मिलते।
वीसी व्यवस्था पर भी उठे सवाल
धरने में शामिल लोगों ने जेडीए की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग आधारित सुनवाई व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि हर व्यक्ति तकनीकी रूप से सक्षम नहीं होता कि वह वीसी के माध्यम से अपनी शिकायत दर्ज करा सके। पहले आमजन सीधे अधिकारियों से मिलकर अपनी समस्या रख सकते थे, लेकिन नई व्यवस्थाओं और समय की पाबंदियों ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है।
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विरोध के बाद हरकत में आया प्रशासन
धरने और नारेबाजी की सूचना मिलने पर जेडीए के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर उन्हें शांत कराया और श्याम शर्मा की फाइल का पुनर्मूल्यांकन कर जल्द पट्टा जारी करने का आश्वासन दिया। इसके बाद धरना समाप्त कर दिया गया।
विपक्ष को मिल सकता है मुद्दा
राजधानी जयपुर में आयोजित सरकारी शिविर के दौरान भाजपा से जुड़े स्थानीय नेता का जेडीए प्रशासन के खिलाफ धरने पर बैठना राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकार जहां शिविरों के जरिए प्रशासन को जनता के द्वार तक पहुंचाने का संदेश देने में जुटी है, वहीं इस तरह की घटनाएं विपक्ष को सरकारी दावों पर सवाल उठाने का अवसर दे सकती हैं। खासकर शहरी क्षेत्रों में पट्टों और भूमि संबंधी मामलों को लेकर लोगों की नाराजगी पहले से ही एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनी हुई है।
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