– सैलून कर्मी से लेकर स्टूडेंट तक बने साइबर ठग, चाय की थड़ी पर बंटता था करोड़ों का कमीशन
जयपुर। साइबर अपराधियों के एक बड़े अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश करते हुए जयपुर साइबर क्राइम पुलिस ने ऐसी ठगी का खुलासा किया है, जिसने कॉर्पोरेट सेक्टर तक को हिला दिया। महज एक व्हाट्सएप मैसेज के जरिए ठगों ने कंपनी के अकाउंटेंट से 5 करोड़ 30 लाख रुपए ट्रांसफर करवा लिए और पूरा खेल इतनी सफाई से रचा गया कि किसी को शक तक नहीं हुआ। आपको बता दें कि यह मामला सिर्फ एक ठगी नहीं, बल्कि एक संगठित साइबर क्राइम इकोसिस्टम की तस्वीर दिखाता है जहां छोटे-छोटे रोल निभाने वाले लोग मिलकर करोड़ों की ठगी को अंजाम देते हैं। क्योंकि, डिजिटल दुनिया में एक क्लिक, जिंदगी भर की कमाई ले जा सकता है।
यह भी देखें: ‘साहब’ बनकर साइबर ठगों का हमला, AI से रची जा रही डिजिटल साजिश!
व्हाट्सएप पर ‘चेयरमैन’ बना ठग, मिनटों में करोड़ों पार
मामले की शुरुआत 24 अप्रैल 2026 को हुई, जब गैलेक्सी माइनिंग कंपनी के अकाउंटेंट दीपेन्द्र सिंह को कंपनी के चेयरमैन के नाम और फोटो वाले व्हाट्सएप नंबर से मैसेज मिला। मैसेज में तत्काल दो बैंक खातों में भुगतान करने के निर्देश थे। भरोसे में आकर अकाउंटेंट ने 5.30 करोड़ रुपए ट्रांसफर कर दिए, लेकिन कुछ देर बाद ही यह साफ हो गया कि वह साइबर ठगी का शिकार हो चुका है।
1930 पर शिकायत और फिर खुला पूरा नेटवर्क
पीड़ित ने तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज करवाई। इसके बाद जयपुर साइबर क्राइम पुलिस हरकत में आई। तकनीकी जांच में सामने आया कि रकम को कई बैंक खातों में घुमाकर नकद निकासी, USDT (क्रिप्टोकरेंसी) और हवाला नेटवर्क के जरिए ठिकाने लगाया गया।
यह भी देखें: डिजिटल जनगणना के नाम पर देशभर में ठगी का बड़ा जाल, फर्जी कॉल, लिंक और घर-घर पहुंच रहे साइबर ठग
5 जिलों में फैला जाल, 17 आरोपी गिरफ्तार
पुलिस ने कोटा ग्रामीण, पाली, बांसवाड़ा, जोधपुर और बाड़मेर पुलिस के साथ मिलकर संयुक्त कार्रवाई की और 17 आरोपियों को गिरफ्तार किया। इनमें बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले, नकद निकासी करने वाले, कमीशन एजेंट और क्रिप्टोकरेंसी के जरिए रकम ट्रांसफर करने वाले शातिर बदमाश शामिल थे।
चाय की थड़ी पर बंटता था ‘काला कमीशन’
गिरोह की सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि ये लोग चाय की थड़ियों पर बैठकर कमीशन का बंटवारा करते थे, ताकि किसी को शक न हो। आरोपियों में वकालत का छात्र, सैलून कर्मचारी और छोटे दुकानदार तक शामिल हैं। यानी आम दिखने वाले लोग, लेकिन काम बेहद संगठित।
जिलेवार कनेक्शन: कैसे काम करता था नेटवर्क
कोटा: कैश और क्रिप्टो का हब
-यहां से ठगी की रकम निकाली जाती और USDT में बदली जाती
-वकालत छात्र तोहिद मोहम्मद ने सैलून कर्मियों के खाते खुलवाए
-कमीशन: 15,000 रुपए
-सैलून कर्मचारी 3–6 हजार में कैश निकालकर ठगों तक पहुंचाते
– ऑटो पार्ट्स व्यापारी नवीन चौहान एप के जरिए क्रिप्टो खरीदता (5 लाख पर 50,000 कमीशन)बांसवाड़ा: बैंक खातों की सप्लाई लाइन
-ई-मित्र संचालक ने रिश्तेदारों के खाते 5,000 रुपए प्रति खाता दिए
-अन्य आरोपी रकम को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचातेपाली: ‘खाता दिलाओ, कमीशन पाओ’
-आरोपियों ने परिचितों को लालच देकर उनके बैंक खाते ठगों को सौंपे
-प्रति खाता 5,000 रुपए तक कमीशनजोधपुर: ट्रांजेक्शन को ‘साफ’ करने का खेल
-खातों में रकम जमा कर नकद निकासी की जाती
-फिर क्रिप्टो खरीद-बिक्री से ट्रेल छिपाई जातीबाड़मेर: खाता देकर कमीशन
जांच में सामने आया कि गिरोह के सदस्य बैंक खाते देने, नकद निकालने, और क्रिप्टो ट्रांजेक्शन करने के बदले 3,000 से 50,000 रुपए तक कमीशन लेते थे।
तकनीकी जांच से टूटा पूरा नेटवर्क
जयपुर साइबर क्राइम थाना टीम ने बैंक ट्रांजेक्शन ट्रैकिंग, फील्ड इंटेलिजेंस और डिजिटल एनालिसिस के जरिए पूरे नेटवर्क को बेनकाब किया। कार्रवाई पुलिस उपाधीक्षक सुगन सिंह के नेतृत्व में की गई।
पुलिस की अपील: एक गलती, करोड़ों का नुकसान
साइबर क्राइम शाखा ने आम लोगों से अपील की है कि किसी भी व्हाट्सएप मैसेज या कॉल पर तुरंत भरोसा न करें। बड़ी रकम ट्रांसफर से पहले वेरिफिकेशन जरूर करें। ठगी होने पर तुरंत 1930 हेल्पलाइन या राष्ट्रीय साइबर पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।
ऐसी ही खबरों के लिए देखें: DemocraticBharat.com






