– कोचिंग से एग्जाम हॉल तक पूरा रैकेट, लाखों में बिक रही थीं नौकरियां, SOG का ताबड़तोड़ एक्शन
जयपुर। प्रदेश में प्रतियोगी परीक्षाओं की साख को चोट पहुंचाने वाले एक बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। स्पेशल ऑपरेशन्स ग्रुप (एसओजी) ने डमी अभ्यर्थियों के जरिए नौकरी हासिल करने के संगठित नेटवर्क पर शिकंजा कसते हुए तीन अहम मामलों का पर्दाफाश किया है। जांच में सामने आया कि कई अभ्यर्थी खुद की कमजोर तैयारी छिपाने के लिए ज्यादा पढ़े-लिखे लोगों को पैसे देकर अपनी जगह परीक्षा में बैठाते थे और इसके लिए लाखों रुपए का सौदा होता था। एडीजी एसओजी विशाल बंसल के मुताबिक, यह कोई एक-दो लोगों की करतूत नहीं, बल्कि एक सुनियोजित सिस्टम था, जिसमें कोचिंग सेंटरों से पहचान, सौदेबाजी, दस्तावेज में हेरफेर और फिर परीक्षा में ‘डमी’ बैठाने तक पूरी चेन काम कर रही थी। आपको बता दें कि यह खुलासा फिर सवाल खड़ा करता है कि क्या कुछ लोग मेहनत से नहीं, पैसे के दम पर सिस्टम को मात देने की कोशिश कर रहे हैं? फिलहाल, एसओजी की सख्ती ने साफ कर दिया है कि ऐसे ‘शॉर्टकट’ अब भारी पड़ने वाले हैं।
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पहला खुलासा: 5 लाख में ‘हिन्दी प्राध्यापक’ बनने की डील
मामला राजस्थान लोक सेवा आयोग की 2022 की प्राध्यापक (हिन्दी) परीक्षा से जुड़ा है। जालोर निवासी मनोहर लाल ने मूल अभ्यर्थी देराम की जगह परीक्षा दी। वजह साफ थी-देराम को खुद पर भरोसा नहीं था। दोनों के बीच करीब 5 लाख रुपए में सौदा तय हुआ। प्रवेश पत्र में फोटो बदलकर और दस्तावेज में हेरफेर कर परीक्षा दी गई। मनोहर लाल अब गिरफ्तार है, जबकि मुख्य आरोपी देराम फरार है।
दूसरा केस: एक्स-सर्विसमैन कोटे का ‘गेम प्लान’
दूसरा मामला भी इसी परीक्षा से जुड़ा है, जहां फलौदी निवासी अशोक जानी को डमी कैंडिडेट बनाकर उतारा गया। असली अभ्यर्थी रामूराम (भूतपूर्व सैनिक) को लगा कि उसकी कैटेगरी में कम मेरिट जाती है, इसलिए उसने ‘थोड़ा बेहतर’ कैंडिडेट तलाशा। सौदा 7.5 लाख रुपए में तय हुआ। इस मामले में रामूराम पहले ही गिरफ्तार हो चुका है, अब अशोक जानी भी पुलिस की गिरफ्त में है।
तीसरा खुलासा: 6 लाख में फिजिकल टीचर की नौकरी
तीसरा केस राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड की शारीरिक शिक्षक भर्ती परीक्षा-2022 से जुड़ा है। जालोर निवासी सुनील ने विमल कुमार पाटीदार की जगह परीक्षा दी। यहां ‘मिडलमैन’ की भी एंट्री थी-अनिल विश्नोई ने पूरे सौदे को सेट किया। करीब 6 लाख रुपए में डील हुई, जिसमें 1.5 लाख एडवांस दिए गए। सुनील और अनिल दोनों गिरफ्तार हैं।
ऐसे पकड़ में आए ‘डमी खिलाड़ी’
एसओजी के लिए सबसे बड़ी चुनौती थी, इन डमी अभ्यर्थियों की पहचान करना। क्योंकि, हर केस में फोटो, सिग्नेचर और दस्तावेज में बेहद बारीकी से हेरफेर किया गया था। लेकिन तकनीक ने यहां बाजी पलट दी। एसओजी के विशेष सॉफ्टवेयर और डीआईजी स्तर पर किए गए एडवांस एनालिसिस ने फर्जी चेहरों को बेनकाब कर दिया।
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किन धाराओं में केस?
सभी आरोपियों पर IPC की धारा 419, 420, 467, 468, 471, 120बी, राजस्थान पब्लिक एग्जामिनेशन एक्ट 2022 और आईटी एक्ट 2008 के तहत केस दर्ज किए गए हैं। एसओजी ने स्पष्ट किया है कि भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता से कोई समझौता नहीं होगा। यह कार्रवाई सिर्फ शुरुआत है। पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ी जा रही हैं और जल्द ही और बड़े खुलासे हो सकते हैं।
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