-चित्तौड़गढ़ जिला अस्पताल के डॉक्टर्स और मां की जिद से चमत्कार, अब पूरी तरह स्वस्थ होकर घर लौटी बच्ची
जयपुर। चित्तौड़गढ़ से एक ऐसी कहानी सामने आई है, जिसने इंसानी जज्बे, मां के हौसले और डॉक्टरों की मेहनत को एक साथ जीवंत कर दिया। महज 900 ग्राम वजन की एक नवजात, जो जन्म के साथ ही जिंदगी और मौत के बीच झूल रही थी, अब पूरी तरह स्वस्थ होकर घर लौट चुकी है। यह सिर्फ एक इलाज नहीं, बल्कि 55 दिनों तक चली जंग थी… हर सांस के लिए संघर्ष, हर पल एक चुनौती। अविकसित फेफड़े, सांस रुकने का खतरा (एस्फिंक्सिया), पीलिया और दिल की जटिलताओं जैसी गंभीर बीमारियों से जूझ रही इस नन्हीं बच्ची को चित्तौड़गढ़ जिला अस्पताल की एसएनसीयू यूनिट ने नया जीवन दिया।
अब 1650 ग्राम की हुई नन्हीं जान तो आई जान में जान

उदयपुर के एक निजी अस्पताल में 19 फरवरी को जन्मी इस बच्ची की हालत इतनी नाजुक थी कि परिवार के लिए इलाज कराना मुश्किल हो गया। लेकिन चित्तौड़गढ़ की एमसीएच विंग में पहुंचते ही उम्मीद की किरण जगी। शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. जयसिंह और उनकी टीम ने बिना समय गंवाए इलाज शुरू किया। शुरुआत में बच्ची को नली के जरिए पोषण दिया गया। हर दिन, हर रात डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की कड़ी निगरानी में उसकी हालत पर नजर रखी गई। धीरे-धीरे सुधार हुआ…और फिर वह पल आया जब बच्ची ने खुद सांस लेने और मां का दूध पीने की ताकत हासिल कर ली। इस पूरी लड़ाई में एक और योद्धा थी-मां हेमलता। अस्पताल परिसर में रहकर उसने अपनी बच्ची का साथ नहीं छोड़ा। हर मुश्किल घड़ी में उसका विश्वास और हिम्मत ही बच्ची के लिए संबल बनी। 55 दिनों की इस जंग के बाद चमत्कार हुआ-900 ग्राम की यह नन्हीं जान अब 1650 ग्राम की हो चुकी है और पूरी तरह स्वस्थ है।
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71 सरकारी अस्पतालों में एसएनसीयू यूनिट संचालित

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की पहल और चिकित्सा मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर के निर्देशन में प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाएं जिस तरह मजबूत हो रही हैं, यह घटना उसका जीता-जागता उदाहरण है। सरकार की नीतियों, डॉक्टरों की मेहनत और मां के अटूट विश्वास ने मिलकर एक जिंदगी बचा ली। आज यह सिर्फ एक बच्ची की कहानी नहीं, बल्कि उम्मीद, हौसले और जीत की कहानी है… जो हर किसी को यह विश्वास दिलाती है-अगर जज्बा हो, तो जिंदगी हर जंग जीत सकती है। आपको बता दें कि प्रदेश के चिन्हित 71 राजकीय अस्पतालों में प्री-मेच्योर एवं जन्म के समय गंभीर बीमार नवजात के उपचार और देखभाल के लिए एसएनसीयू यूनिट संचालित हैं। इनमें नवजातों का पूरी तरह निःशुल्क उपचार किया जाता है।
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