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परिसीमन पर सियासत तेज: गहलोत बोले- “दक्षिण की चिंताओं को नजरअंदाज करना खतरनाक”

जयपुर। परिसीमन को लेकर दक्षिण भारत के राज्यों में उभर रहे असंतोष और महिला आरक्षण को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। इस बारे में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी केन्द्र सरकार को चेताया है। उन्होंने जयपुर एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को दक्षिण भारत की चिंताओं को गंभीरता से लेना चाहिए, अन्यथा स्थिति बिगड़ सकती है। आपको बता दें कि परिसीमन और महिला आरक्षण जैसे अहम मुद्दों पर सियासी माहौल गरमा गया है, और आने वाले दिनों में यह बहस और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।

 

दक्षिण राज्यों में होंगे 1950 जैसे हालात

उन्होंने कहा कि अगर दक्षिण के राज्यों को यह महसूस हुआ कि उत्तर भारत उनके ऊपर अपनी बात थोप रहा है या उनकी राजनीतिक स्थिति कमजोर की जा रही है, तो यह देश के लिए खतरनाक संकेत हो सकता है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री स्टालिन के दिए गए बयान का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि 1950-60 के दशक जैसे हालात दक्षिण भारत में दोबारा बनने की आशंका जताई जा रही है, जो बेहद संवेदनशील मामला है।

 

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चुनाव के बीच संसद सत्र क्यों बुलाया

परिसीमन प्रक्रिया और जनगणना में देरी पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि 2021 में होने वाली जनगणना समय पर क्यों नहीं कराई गई। अब जब अधिकारी 2027 तक जनगणना पूरी होने की बात कर रहे हैं, तो ऐसे में जल्दबाजी में फैसले लेने के पीछे सरकार की मंशा पर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल के बीच संसद सत्र बुलाना भी कई सवाल खड़े करता है। विपक्ष की ओर से यह सुझाव दिया गया था कि चुनाव समाप्त होने के बाद सत्र बुलाया जाए, लेकिन सरकार ने जल्दबाजी दिखाई, जो संदेह पैदा करता है।

 

महिला आरक्षण को लेकर उठाए मोदी सरकार पर सवाल

महिला आरक्षण को लेकर भी उन्होंने सरकार की नीति पर सवाल उठाए। गहलोत ने कहा कि 2011 की जनगणना को आधार बनाने का फॉर्मूला अचानक क्यों आ गया? तीन साल पहले जब पार्लियामेंट में कानून बना है, तब तो कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडगे ने कहा था कि 2024 से इसे तुरंत लागू कर दो। तब 2021 की जनगणना के आधार पर इसे लागू करने की बात कही गई थी। अब कह रहे हैं कि 2011 की जनगणना को आधार बनाने की बात सामने आ रही है, जो उचित नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार महिला आरक्षण के नाम पर विपक्ष को घेरने की रणनीति बना रही है, ताकि अगर विधेयक पास न हो तो इसका ठीकरा विपक्ष पर फोड़ा जा सके।

 

ऐसी ही खबरों के लिए देखें: Democraticbharat.com

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