अजमेर। अजमेर में एक छोटी-सी चूक ने बड़ी घबराहट में बदलकर एक परिवार को हिला दिया, लेकिन कुछ ही घंटों में वही कहानी राहत, भरोसे और इंसानियत की मिसाल बन गई। 20 अप्रैल की शाम को पुष्कर निवासी लिसा पाराशर अपनी स्कूटी से गंज तिराहा से फव्वारा सर्किल की ओर जा रही थीं। रास्ते में फोन आया तो उन्होंने स्कूटी रोकी, ग्लव्स उतारे…और अनजाने में करीब 3 तोला वजनी सोने का कड़ा वहीं गिर गया। घर पहुंचते ही जब कड़ा नहीं मिला, तो उनकी हालत बिगड़ गई। घबराहट इतनी कि वे बेहोश हो गईं। परिवार तुरंत उन्हें अस्पताल लेकर पहुंचा, और साथ ही अभय कमांड एंड कंट्रोल सेंटर को सूचना दी।
एक साइलेंट ऑपरेशन, जिसका हीरो बना एक कांस्टेबल

अभय कमांड सेंटर में तैनात कांस्टेबल रामनिवास कड़वा ने बिना वक्त गंवाए कैमरों की दुनिया में उस खोए हुए कड़े की तलाश शुरू कर दी। गंज तिराहा से फव्वारा सर्किल तक लगे 200 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालना आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। हर फ्रेम को जोड़ते हुए उन्होंने एक रूट मैप तैयार किया और आखिरकार एक युवक नजर आया, जो सड़क से कड़ा उठाकर चला गया था। कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। रामनिवास ने उस युवक की पहचान की, उसके घर तक पहुंचे और कड़ा बरामद कर लिया। कुछ ही घंटों में जो चीज खो चुकी थी, वो वापस मिल गई।
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कड़ा वापस पाकर निकले खुशी के आंसू
जब कड़ा वापस मिला, तो लिसा पाराशर की आंखों में राहत और खुशी के आंसू थे। उनके लिए ये सिर्फ एक जेवर नहीं, बल्कि भरोसे की वापसी थी। उन्होंने अजमेर पुलिस और कांस्टेबल रामनिवास का दिल से आभार जताया। इस कर्तव्यनिष्ठा और सूझबूझ को देखते हुए पुलिस अधीक्षक हर्षवर्धन अग्रवाला ने कांस्टेबल रामनिवास को ₹10,000 का नकद पुरस्कार और प्रशंसा पत्र देकर सम्मानित किया। इस पूरी घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया, पुलिस सिर्फ कानून व्यवस्था संभालने वाली ताकत नहीं, बल्कि मुश्किल वक्त में उम्मीद की सबसे मजबूत डोर भी होती है।
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