– गंवार ब्राह्मणान की 134 सहित 3500 अवैध फैक्ट्रियों पर प्रदूषण नियंत्रण मंडल का कब चलेगा चाबुक
जयपुर। सांगानेर इलाके में रंगाई-छपाई (डाइंग-प्रिंटिंग) की अवैध फैक्ट्रियों की ओर से फैलाए जा रहे जहर का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है।राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण मंडल (RPCB) ने हाल ही में कार्रवाई करते हुए मास्टरों की ढाणी और मुहाना क्षेत्र में 5 अवैध इकाइयों को सील कर दिया है। प्रशासन भले ही अपनी पीठ थपथपा रहा हो, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही दास्तान बयां कर रही है-यह कार्रवाई महज ‘छोटी मछलियों’ पर शिकंजा कसकर औपचारिकता पूरी करने जैसी है। ‘बड़े मगरमच्छ’ अभी भी बचे हुए हैं।
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इन 5 फैक्ट्रियों को किया सील ?
सांगानेर में पर्यावरण नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए अवैध रूप से संचालित हो रही रंगाई-छपाई फैक्ट्रियां बिना किसी ट्रीटमेंट प्लांट के रासायनिक (कैमिकल) युक्त जहरीला पानी सीधे आम रास्तों और खेतों में बहा रही हैं। ऐसे में शनिवार को प्रदूषण मंडल की 4 और पुलिस की 2 संयुक्त टीमों ने मिलकर 5 इकाइयों को सील किया। इन फैक्ट्रियों पर मुख्य रूप से बिना ट्रीटमेंट के जहरीला पानी बहाने और प्रदूषण नियंत्रण मंडल से अनुमति के बिना संचालन करने के गंभीर आरोप हैं।
- नीतिश डाइंग, शिकारपुरा रोड स्थित मास्टरों की ढाणी
- जगदम्बा डाइंग, शिकारपुरा रोड स्थित मास्टरों की ढाणी
- सुंदर एंटरप्राइजेज, शिकारपुरा रोड स्थित मास्टरों की ढाणी
- महेश एंटरप्राइजेज, मुहाना मोड़
- अर्जुन सिंह गुर्जर, मुहाना मोड़
सिस्टम पर गंभीर सवाल: जब ‘रक्षक’ ही बन जाए ‘भक्षक’

सांगानेर में प्रदूषण पर लगाम कसने के लिए 123 करोड़ रुपए की लागत से सीईटीपी (CETP) प्लांट बनाया गया, जिसके संचालन की जिम्मेदारी एसईपीडी (SEPD) कंपनी के पास है। लेकिन इस पूरे तंत्र की कलई तब खुल जाती है, जब इसके भीतर का भ्रष्टाचार सामने आता है। सांगानेर में आज भी 3500 से अधिक फैक्ट्रियां पूरी तरह अवैध रूप से संचालित हो रही हैं। गंवार ब्राह्मणान इलाके में एसईपीडी के डायरेक्टर प्रवीण शाह की खुद की फैक्ट्री सहित कुल 134 फैक्ट्रियां ऐसी हैं, जो कागजों में तो एसईपीडी की मेंबर हैं, लेकिन धरातल पर सीईटीपी प्लांट से जुड़ी हुई नहीं हैं। ये 134 फैक्ट्रियां भी धड़ल्ले से जहरीला रासायनिक पानी खुले में बहा रही हैं। जिस एसईपीडी मैनेजमेंट और उसके डायरेक्टर्स पर प्रदूषण रोकने की जिम्मेदारी है, जब वही खुद नियमों की धज्जियां उड़ाएंगे, तो आम जनता को इस जहर से मुक्ति कैसे मिलेगी? यहां तो साफ तौर पर ‘बिल्ली को ही दूध की रखवाली’ सौंपने जैसी स्थिति बनी हुई है। यही वजह है कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से इन 134 बड़ी इकाइयों पर कार्रवाई ना करना बड़े और गंभीर सवाल खड़े करता है।
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कागजी कार्रवाई बनाम ठोस समाधान
भले ही पिछले दो महीनों में 119 फैक्ट्रियां सील कर दी गई हों, लेकिन जब तक सांगानेर की उन गंवार ब्राह्मणान की 134 सहित 3500+ अवैध इकाइयों और सिस्टम के भीतर बैठे रसूखदार जिम्मेदारों (जैसे एसईपीडी से जुड़े लोगों) पर निष्पक्ष और कठोर हंटर नहीं चलेगा, तब तक जयपुर के भूजल और पर्यावरण को इस जहरीले जहर से बचाया नहीं जा सकता। आम जनता और पर्यावरण प्रेमियों की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या प्रशासन इन ‘मछलियों’ से आगे बढ़कर ‘मगरमच्छों’ पर भी हाथ डालेगा?
दो माह में 119 फैक्ट्रियां हो चुकी हैं सील
“पर्यावरणीय नियमों की पालना सुनिश्चित करने और प्रदूषणकारी गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए लगातार कार्रवाई की जा रही है। पिछले दो महीनों के दौरान अकेले सांगानेर क्षेत्र में करीब 119 इकाइयों को सील किया जा चुका है।”
– विवेक गोयल, क्षेत्रीय अधिकारी जयपुर (दक्षिण), राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण मंडल
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