-1 मई को बुद्ध पूर्णिमा पर बन रहा है दुर्लभ वैशाख पूर्णिमा महासंयोग
जयपुर। वैशाख पूर्णिमा यानी बुद्ध पूर्णिमा इस बार 1 मई 2026 को मनाई जाएगी। धर्म शास्त्रों में इस तिथि को अक्षय पुण्य देने वाली पूर्णिमा कहा गया है। मान्यता है कि इस दिन किए गए स्नान, दान, जप और पूजा का फल कई गुना बढ़कर मिलता है। हिंदू और बौद्ध धर्म दोनों में इस तिथि का विशेष महत्व है। माना जाता है कि इस दिन भगवान गौतम बुद्ध का जन्म हुआ था, वहीं भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए भी यह दिन बेहद शुभ माना जाता है। पंडितों की मानें तो इस बार पूर्णिमा तिथि 30 अप्रैल रात 9:13 बजे शुरू होकर 1 मई रात 10:53 बजे तक रहेगी। इस खास अवसर पर किए गए कुछ उपाय जीवन में सुख, शांति और आर्थिक तरक्की के द्वार खोल सकते हैं। तो जानिए ऐसे 5 उपाय जिन्हें करने से चमक सकती है आपकी सोई हुई किस्मत।
मीठे जल का दान करें
बुद्ध पूर्णिमा के दिन मीठे जल से भरे घड़े का दान बेहद शुभ माना गया है। मान्यता है कि इससे अनजाने में हुई गलतियों से मुक्ति मिलती है और पुण्य फल की प्राप्ति होती है।
चंद्रमा को दें दूध वाला अर्घ्य

रात में चंद्रोदय के समय जल में दूध और मिश्री मिलाकर चंद्रमा को अर्घ्य दें। ज्योतिष मान्यता के अनुसार इससे कुंडली का कमजोर चंद्रमा मजबूत होता है और चंद्र दोष दूर होते हैं।
विष्णु मंत्रों का जाप बदलेगा भाग्य
पूर्णिमा तिथि भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय मानी जाती है। इस दिन विष्णु मंत्रों का जाप और ध्यान करने से घर में सुख-समृद्धि आती है।
कनकधारा स्तोत्र और विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बुद्ध पूर्णिमा पर कनकधारा स्तोत्र और विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करने से धन संबंधी परेशानियां दूर हो सकती हैं।
माता लक्ष्मी को चढ़ाएं खीर और फूल
कमल या गुलाब का फूल अर्पित करें और माता लक्ष्मी को खीर का भोग लगाएं। साथ ही चंद्रमा की रोशनी में खीर रखकर अगले दिन प्रसाद के रूप में ग्रहण करना शुभ माना गया है।
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बुद्ध पूर्णिमा पर मिलता है कई गुना फल
बुद्ध पूर्णिमा पर श्रद्धा और नियम से पूजा करने वालों पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष कृपा बनी रहती है, जिससे जीवन में धन, वैभव और सफलता के रास्ते खुलते हैं।
वैशाख पूर्णिमा पर क्या करें, क्या न करें? जान लीजिए कुछ और भी जरूरी नियम

क्या करें?
-ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें
-गंगाजल मिलाकर स्नान करना शुभ
-भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करें
-जरूरतमंदों को घड़ा, छाता, पंखा और जल का दान दें
-सत्यनारायण कथा का पाठ करें
क्या न करें?
-तामसिक भोजन से बचें
-काले कपड़े न पहनें
-विवाद और अपमान से दूर रहें
-सूर्योदय के बाद तक न सोएं
-नाखून काटने से बचें
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