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सांगानेर के ‘गंवार ब्राह्मणान’ में घुट रहा जिंदगी का दम, 300 से ज्यादा अवैध रंगाई-छपाई फैक्ट्रियां उगल रहीं जहर

– मूक प्रशासन की शह पर गंवार ब्राह्मणान को नरक बना रहे फैक्ट्री-माफिया, जहरीले पानी से बंजर हुए खेत, किसानों की जिंदगी दांव पर

 

जयपुर। जयपुर के सांगानेर कस्बे से महज 5 किलोमीटर दूर बसा गंवार ब्राह्मणान गांव आज विकास नहीं, बल्कि सरकारी तंत्र की बेरुखी और फैक्ट्री-माफियाओं के रसूख के कारण नरक जैसा जीवन जीने को मजबूर है। गांव की आबोहवा में इस कदर जहर घुल चुका है कि हरी-भरी फसलें देने वाले खेत अब बंजर जहरीले तालाबों में तब्दील हो चुके हैं और हवा सांस लेने योग्य नहीं बची। वजह है-गांव में कुकुरमुत्ते की तरह पनपीं 300 से अधिक अवैध रंगाई-छपाई की फैक्ट्रियां, जो रोजाना हजारों लीटर जहरीला केमिकल युक्त पानी बिना किसी ट्रीटमेंट के सीधे खेतों, रास्तों और खुले में बहा रही हैं। आपको बता दें कि सांगानेर क्षेत्र में करीब 4500 रंगाई-छपाई की फैक्ट्रियां हैं, इनमें से सिर्फ 758 फैक्ट्रियां ही सीईटीपी प्लांट से जुड़ी हुई हैं। शेष फैक्ट्रियां अवैध हैं और खेत-खलिहान और नदी-नालों में कैमिकल वाला पानी धड़ल्ले से बहाकर पर्यावरण को प्रदूषित कर रही हैं। ग्राउंड जीरो से सच्चाई उजागर करती डेमोक्रेटिक भारत की खबर।

 

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कागजी ‘पर्यावरण रक्षक’ ही बने प्रदूषण के सौदागर

मामले का सबसे चौंकाने वाला और शर्मनाक पहलू यह है कि नियम-कायदों की धज्जियां उड़ाने में वे लोग भी शामिल हैं, जिन पर पर्यावरण सुरक्षा की जिम्मेदारी है। जानकारी के मुताबिक, गांव में स्थित 134 फैक्ट्रियां कागजों में तो एसईपीडी (SEPD) की सदस्य हैं, लेकिन धरातल पर इनमें से एक भी फैक्ट्री सीईटीपी (CETP) प्लांट से जुड़ी हुई नहीं है। हद तो तब हो गई जब खुलासा हुआ कि इन 134 अवैध फैक्ट्रियों में एसईपीडी के डायरेक्टर प्रवीण शाह की खुद की अवैध फैक्ट्री भी शामिल है। जब रक्षक ही भक्षक बन बैठे, तो प्रदूषण नियंत्रण की उम्मीद बेमानी साबित हो रही है। बड़ा सवाल यह है कि राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण मंडल (RPCB) को यह पूरा खेल दिखाई क्यों नहीं दे रहा? क्या अधिकारियों ने रसूखदारों के आगे आंखों पर पट्टी बांध ली है?

 

छल से ली जमीनें, सुरक्षा के लिए पाले खूंखार कुत्ते

गंवार ब्राह्मणान गांव में अवैध फैक्ट्रियों से निकला कैमिकल वाला पानी खेतों में जमा होकर बना जहर का तालाब।

ग्रामीणों का कहना है कि शुरुआत में फैक्ट्री मालिकों ने फॉर्म हाउस और आटा चक्की लगाने के बहाने भोले-भाले ग्रामीणों से सस्ती दरों पर जमीनें खरीदी थीं। जमीन हाथ में आते ही चारों तरफ ऊंची-ऊंची दीवारें खड़ी कर दी गईं और भीतर अवैध रंगाई-छपाई का काला कारोबार शुरू हो गया। ग्रामीणों ने जब भी जहरीले पानी का विरोध किया, उन्हें रसूख के बल पर धमकाया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रत्येक अवैध फैक्ट्री में खूंखार कुत्ते पाल रखे हैं, ताकि कोई विरोध करने या शिकायत लेकर पास पहुंचे तो ये कुत्ते उन पर हमला कर दें। अब नगर निगम की यह जिम्मेदारी है कि फैक्ट्रियों पर रेड मारकर कुत्तों का रजिस्ट्रेशन और वेक्सीनेशन चैक करें। गड़बड़ी मिलने पर इन फैक्ट्री मालिकों पर कानून सम्मत कार्रवाई की जाए।

 

बिजली विभाग की साठगांठ: कृषि और आटा चक्की के नाम पर हैवी कनेक्शन

गंवार ब्राह्मणान गांव में अवैध फैक्ट्रियों से निकले जहरीले पानी से पेड़-पौधे भी जलकर सूख गए हैं।

अवैध फैक्ट्रियों का यह मकड़जाल प्रशासनिक शह के बिना संभव नहीं है। किसी भी फैक्ट्री मालिक के पास रंगाई-छपाई के लिए आधिकारिक कमर्शियल/इंडस्ट्रियल विद्युत कनेक्शन नहीं है। अधिकांश कनेक्शन फार्म हाउस, आटा चक्की या कृषि भूमि के नाम पर लिए गए हैं। जयपुर डिस्कॉम (JVVNL) के स्थानीय अधिकारियों से सांठगांठ कर कृषि भूमि पर अवैध रूप से उच्च क्षमता के विद्युत कनेक्शन चालू रखे गए हैं। बार-बार शिकायतों के बाद भी बिजली विभाग कनेक्शन काटने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है।

 

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‘अमृत’ बना जहर: खेती-पशुपालन ठप, ग्रामीण मजदूरी को मजबूर

गंवार ब्राह्मणान गांव में चारों तरफ खेत-खलिहानों में कैमिकल वाला पानी जमा है, जिसे पशु पीने को मजबूर हैं। फोटो में भैंस पानी पीते हुए, अब इनका अमृत तुल्य दूध भी जहर बन गया है।

रसायनयुक्त इस पानी ने गंवार ब्राह्मणान के पारिस्थितिकी तंत्र को पूरी तरह तबाह कर दिया है। केमिकल भूमि के अंदर रिसकर भू-गर्भ जल को पूरी तरह दूषित कर चुका है। ग्रामीणों को पीने के पानी के लिए बाहर से फिल्टर पानी के केन मंगवाने पड़ रहे हैं, जिससे गरीब ग्रामीणों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। जहरीले पानी से उगाई जा रहीं सब्जियां और अनाज अनजाने में लोगों की थालियों में बीमारी परोस रहे हैं। पशु इसी जहरीले पानी को पीने को मजबूर हैं, जिससे गाय-भैंसों का दूध भी दूषित हो रहा है। जो ग्रामीण पहले खेती और दूध बेचकर स्वाभिमान से आत्मनिर्भर जीवन जी रहे थे, आज अपनी ही जमीनों के बंजर होने के कारण मजदूरी करने पर मजबूर हैं।

 

मुख्यमंत्री के ‘हरित राजस्थान’ अभियान पर फिरा पानी, वृक्ष संरक्षण कानूनों की उड़ीं धज्जियां

एक तरफ जहां राज्य के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ‘हरित राजस्थान’ मुहिम के तहत व्यापक पौधारोपण का संदेश दे रहे हैं, वहीं गंवार ब्राह्मणान के अवैध फैक्ट्री मालिक अपने निजी स्वार्थ के लिए पेड़ों की बलि दे रहे हैं। फैक्ट्रियों से निकलने वाले तेजाबी पानी ने गांव के फलदार और छायादार पेड़ों को जलाकर सुखा दिया है, जिससे परिंदे भी बेघर हो गए हैं। वृक्ष संरक्षण अधिनियम के अनुसार, किसी पेड़ को केमिकल या एसिड डालकर सुखाना या नष्ट करना अवैध कटाई की श्रेणी में आता है। बिना अनुमति पेड़ों को नुकसान पहुंचाने पर 6 महीने से 3 साल तक की जेल और ₹5,000 से ₹1 लाख तक के जुर्माने का कड़ा प्रावधान है, लेकिन इन दबंग फैक्ट्री मालिकों पर कानून का कोई खौफ नजर नहीं आ रहा।

 

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यक्ष प्रश्न: आखिर कब जागेगा सोया हुआ प्रशासन?

क्या राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण मंडल, जेवीवीएनएल और स्थानीय प्रशासन किसी बड़े हादसे या महामारी का इंतजार कर रहे हैं? कागजों में कार्रवाई के दावे करने वाले सरकारी महकमे धरातल पर गंवार ब्राह्मणान के निवासियों को इस ‘धीमे जहर’ से कब निजात दिलाएंगे, यह बड़ा सवाल बना हुआ है।

 

ऐसी ही खबरों के लिए देखते रहें: Democraticbharat.com
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