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डोटासरा का बड़ा हमला, राज्य में सिर्फ नौटंकी और इवेंट मैनेजमेंट, 10 दिन बाद लॉकडाउन जैसे हालात

– महंगाई, नीट घोटाला, ईंधन संकट और बदहाल स्वास्थ्य-शिक्षा व्यवस्था को लेकर कांग्रेस का भाजपा सरकार पर तीखा प्रहार

जयपुर। राजस्थान की राजनीति में सोमवार को उस समय सियासी पारा चढ़ गया, जब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा ने भाजपा की राज्य और केंद्र सरकार पर एक साथ तीखा हमला बोला। जयपुर स्थित प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान डोटासरा ने बढ़ती महंगाई, नीट पेपर लीक, प्रशासनिक विफलता, स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली और शिक्षा व्यवस्था के गिरते स्तर को लेकर सरकार को कठघरे में खड़ा किया। डोटासरा ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार जनता की समस्याओं को हल करने के बजाय केवल “इवेंट मैनेजमेंट, फोटो सेशन और नौटंकी” में लगी हुई है। उन्होंने कहा कि सरकार के पास न जवाब है और न जवाबदेही।

“देश में ईंधन संकट गहराया, लॉकडाउन जैसे हालात बन सकते हैं”

कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष ने सबसे पहले बढ़ती महंगाई और पेट्रोल-डीजल की कीमतों का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि पेट्रोल की कीमतें लगभग 110 रुपए प्रति लीटर तक पहुंच चुकी हैं और आम आदमी की कमर टूट चुकी है। डोटासरा ने दावा किया कि देश में ईंधन संकट गहराता जा रहा है और अब राशनिंग जैसी स्थिति पैदा हो गई है। उनके अनुसार आम नागरिकों को सीमित मात्रा में सिर्फ 1000 से 1500 रुपए का ईंधन दिया जा रहा है, जबकि उद्योगों के लिए यह सीमा एक लाख तय की है। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा, “देश में केवल 9-10 दिन का ईंधन भंडार बचा है। अगर यही स्थिति रही तो अगले 10 से 15 दिनों में लॉकडाउन जैसे हालात पैदा हो सकते हैं। उद्योग बंद हो जाएंगे और परिवहन व्यवस्था ठप पड़ जाएगी।

 

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नीट घोटाले पर केंद्र सरकार घिरी

डोटासरा ने नीट परीक्षा पेपर लीक मामले को लेकर केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्रालय पर बड़ा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि एनटीए के अधिकारी 2019 से कोचिंग माफियाओं के साथ मिलकर पेपर बेचने का काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह घोटाला देश के 22 लाख छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है और इससे देश में “फर्जी डॉक्टर” तैयार हो रहे हैं। डोटासरा ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री पर तंज कसते हुए कहा, “धर्मेंद्र प्रधान जी के विभाग में दाल में काला नहीं है, पूरी दाल ही काली है।” उन्होंने घोषणा की, इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस 21 मई को भाजपा कार्यालय का घेराव करेगी और बड़ा विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।

“राजस्थान में सरकार नहीं, ब्यूरोक्रेसी राज कर रही”

कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष ने राज्य सरकार पर वित्तीय कुप्रबंधन और प्रशासनिक लकवे का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को अप्रैल और मई महीने का वेतन तक समय पर नहीं मिला है। डोटासरा ने दावा किया कि 70 साल के इतिहास में पहली बार ऐसा हो रहा है कि जून का महीना बिना वित्तीय स्वीकृति के आने वाला है। उन्होंने आरोप लगाया कि पीडब्ल्यूडी की 3000 करोड़ रुपए की सड़क परियोजनाओं को डीएमएफटी फंड से पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं, जबकि यह फंड केवल खनन प्रभावित क्षेत्रों के लिए निर्धारित होता है। उन्होंने कहा, “ब्यूरोक्रेसी मजे ले रही है। दिल्ली से पर्ची आती है और गुजरात का ठेकेदार यहां आकर काम ले जाता है।”

मुख्यमंत्री पर सीधा हमला

डोटासरा ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा पर भी तीखा राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि मुख्यमंत्री का काम केवल फोटो खिंचवाकर दिल्ली भेजना है, तो जनता की समस्याओं का समाधान कौन करेगा? उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “अगर फोटो खिंचाकर मोदी जी को भेजने के लिए ही आपको मुख्यमंत्री बनाया है, तो फिर हम क्या कर सकते हैं?” इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा होना तय माना जा रहा है।

 

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“स्वास्थ्य और शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई”

डोटासरा ने राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि पहले जहां 750 दवाइयां मुफ्त मिलती थीं, अब उनमें से 50 भी उपलब्ध नहीं हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि निजी अस्पतालों के 3000 करोड़ रुपए सरकार पर बकाया हैं और स्वास्थ्य सेवाएं लगातार कमजोर होती जा रही हैं। कोटा में हुई मौतों का जिक्र करते हुए उन्होंने सरकार पर संवेदनहीनता का आरोप लगाया। शिक्षा व्यवस्था पर भी हमला बोलते हुए डोटासरा ने कहा कि खुद राज्यपाल विश्वविद्यालयों के खाली पड़े पदों, गिरते शैक्षणिक स्तर और फर्जी डिग्रियों को लेकर चिंता जता चुके हैं।

राजनीतिक टकराव और तेज होने के संकेत

डोटासरा के तीखे हमलों के बाद साफ संकेत मिल रहे हैं कि कांग्रेस अब भाजपा सरकार के खिलाफ पूरी तरह आक्रामक रणनीति अपनाने जा रही है। महंगाई, बेरोजगारी, NEET घोटाला और प्रशासनिक अव्यवस्था जैसे मुद्दों को लेकर आने वाले दिनों में कांग्रेस सड़कों पर संघर्ष तेज कर सकती है। अब राजनीतिक गलियारों में सबसे बड़ा सवाल यही है कि भाजपा इन आरोपों का क्या जवाब देती है और 21 मई को होने वाले कांग्रेस के प्रदर्शन का सियासी असर कितना बड़ा होगा।

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