– पूर्व मुख्यमंत्री ने ईंधन संकट, लंबी लाइनों और सीमित सप्लाई को लेकर उठाए सवाल
जयपुर। राजस्थान में पेट्रोल-डीजल और एलपीजी की उपलब्धता को लेकर सियासत तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राज्य सरकार पर जनता से सच्चाई छिपाने और हालात को लेकर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया है। गहलोत ने दावा किया कि जोधपुर सहित कई क्षेत्रों में पेट्रोल-डीजल की गंभीर कमी देखने को मिल रही है और कई पेट्रोल पंपों पर सीमित मात्रा में ही ईंधन दिया जा रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि सोमवार को जोधपुर से जयपुर पहुंचे कई लोगों ने उन्हें बताया कि जोधपुर में बड़ी संख्या में पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल-डीजल उपलब्ध नहीं है, जबकि कई जगहों पर केवल सीमित मात्रा में ही फ्यूल दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हालात ऐसे हैं कि लोगों को जोधपुर से जयपुर तक के सफर में तीन-चार बार पेट्रोल भरवाना पड़ रहा है, क्योंकि एक बार में 1000 रुपए से अधिक का ईंधन नहीं दिया जा रहा।
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“एलपीजी सिलेंडर भी कई दिनों तक नहीं मिल रहे”
गहलोत ने दावा किया कि केवल पेट्रोल-डीजल ही नहीं, बल्कि घरेलू गैस सिलेंडरों की सप्लाई भी प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा कि लोगों को कई-कई दिनों तक एलपीजी सिलेंडर उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं, जिससे आम परिवारों की परेशानी बढ़ गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार लगातार यह दावा कर रही है कि राज्य में पेट्रोल-डीजल और एलपीजी की कोई कमी नहीं है, जबकि जमीनी हालात इसके बिल्कुल विपरीत हैं।
“सरकार ने मौखिक आदेश देकर सीमित सप्लाई करवाई”
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि पेट्रोल पंप संचालकों से जानकारी लेने पर यह बात सामने आई है कि सरकार की ओर से मौखिक निर्देश देकर सीमित मात्रा में ईंधन देने को कहा गया है। यही वजह है कि पेट्रोल पंपों पर लंबी लाइनें लग रही हैं और लोगों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। गहलोत ने कहा कि मीडिया रिपोर्ट्स में भी सामने आया है कि जोधपुर के करीब 40 प्रतिशत पेट्रोल पंप “ड्राई” हो चुके हैं। ऐसे में सरकार को हालात की गंभीरता स्वीकार करनी चाहिए।
“जनता को गुमराह न करे सरकार”
पूर्व मुख्यमंत्री ने सरकार पर संकट की वास्तविक स्थिति छिपाने का आरोप लगाते हुए कहा कि यह समय राजनीति का नहीं, बल्कि पारदर्शिता और जिम्मेदारी का है। उन्होंने कहा कि यदि वास्तव में सप्लाई प्रभावित है, तो सरकार को खुलकर जनता के सामने स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए ताकि लोग पहले से तैयारी कर सकें।
उन्होंने कहा,
“सरकार को जनता के सामने असत्य बोलने और गुमराह करने की बजाय सच बताना चाहिए। अपुष्ट जानकारियों और अफवाहों से जनता भ्रमित होती है और उथल-पुथल की स्थिति बनती है।”
राजनीतिक माहौल गर्म, सरकार पर बढ़ा दबाव
गहलोत के बयान के बाद राज्य की राजनीति में ईंधन संकट का मुद्दा गरमा गया है। कांग्रेस इसे सरकार की प्रशासनिक विफलता और आपूर्ति प्रबंधन की कमजोरी बता रही है, जबकि सरकार लगातार स्थिति सामान्य होने का दावा कर रही है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या वास्तव में प्रदेश में ईंधन संकट गहराता जा रहा है या फिर यह केवल राजनीतिक बयानबाजी का हिस्सा है। आने वाले दिनों में सरकार की प्रतिक्रिया और जमीनी हालात इस पूरे विवाद की दिशा तय करेंगे।
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