भरतपुर। मजदूर दिवस पर एक ओर देशभर में श्रमिकों के सम्मान और अधिकारों की बातें हो रही थीं, वहीं भरतपुर जिले की रुदावल तहसील के गांव खेड़ा ठाकुर में सिलिकोसिस पीड़ित परिवारों का दर्द व्यवस्था की संवेदनहीनता की कहानी बयां कर रहा था। यहां पिछले कुछ वर्षों में सिलिकोसिस जैसी जानलेवा बीमारी से 107 लोगों की मौत हो चुकी है, लेकिन आज भी पीड़ित परिवार सरकारी सहायता और योजनाओं के लाभ के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं।
मजदूर दिवस के अवसर पर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली Tika Ram Jully ने गांव पहुंचकर सिलिकोसिस पीड़ितों, विधवाओं और उनके परिजनों से मुलाकात की। इस दौरान ग्रामीणों ने अपने दर्द और परेशानियां खुलकर सामने रखीं। कई महिलाओं की आंखों में आंसू थे तो कई बुजुर्ग अपने परिवार के कमाने वाले सदस्य को खोने के बाद बदहाल जिंदगी जीने को मजबूर दिखे।
सरकारी मदद के नाम मांगी जा रही रिश्वत
ग्रामीणों ने बताया कि कई पीड़ितों के आज तक सिलिकोसिस कार्ड नहीं बने हैं, जिसके कारण वे सरकारी योजनाओं का लाभ लेने से वंचित हैं। वहीं कई परिवारों को सहायता राशि की दूसरी किश्त नहीं मिल पाई है। कुछ पीड़ितों ने आरोप लगाया कि सरकारी सहायता दिलाने के नाम पर उनसे रिश्वत मांगी जा रही है। इसके अलावा समय पर पेंशन और पालनहार योजना की राशि नहीं मिलने से परिवारों के सामने रोजमर्रा के खर्च तक का संकट खड़ा हो गया है।
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सीएम के गृह जिले में ही भटक रहे पीड़ित

गांव की महिलाओं ने बताया कि पति की मौत के बाद बच्चों की पढ़ाई, इलाज और घर चलाना बेहद मुश्किल हो गया है। कई परिवारों में अब कमाने वाला कोई नहीं बचा। मजदूरी करते-करते बीमारी की चपेट में आए लोगों ने तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया, लेकिन उनके बाद परिवारों को राहत देने का सरकारी दावा जमीनी हकीकत में कमजोर नजर आ रहा है।
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली Tika Ram Jully ने पीड़ितों से ज्ञापन लेकर उनकी समस्याओं को गंभीर बताया। उन्होंने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा Bhajan Lal Sharma के गृह जिले में ही सिलिकोसिस पीड़ित परिवार सहायता के लिए भटक रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिन परिवारों ने अपने परिजनों को खो दिया, उन्हें कम से कम सरकारी योजनाओं का समय पर लाभ मिलना चाहिए।
प्रभावित गांवों में विशेष शिविर लगाने की मांग
उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की कि प्रभावित गांवों में विशेष शिविर लगाए जाएं, लंबित मामलों का तुरंत निस्तारण किया जाए। साथ ही पीड़ित परिवारों को बिना भेदभाव और बिना भ्रष्टाचार के राहत राशि उपलब्ध कराई जाए। साथ ही सिलिकोसिस पीड़ितों की पेंशन, पालनहार योजना और अन्य सहायता योजनाओं का लाभ समय पर सुनिश्चित करने की भी मांग की।
खेड़ा ठाकुर और आसपास के गांवों में फैली यह त्रासदी सिर्फ एक बीमारी की कहानी नहीं, बल्कि उन मजदूर परिवारों की पीड़ा है, जिन्होंने रोजी-रोटी कमाने की कीमत अपनी जिंदगी देकर चुकाई है। मजदूर दिवस पर उठी इन परिवारों की आवाज अब सरकार और प्रशासन से संवेदनशील हस्तक्षेप की उम्मीद कर रही है।
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