-Google Ads के जरिए फैल रहा NHAI फिशिंग स्कैम, डीजी साइबर क्राइम ने जारी की चेतावनी
FASTag users alert! जयपुर। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने लोगों को टोल टैक्स में राहत देने के लिए NHAI FASTag का सालाना पास शुरू किया था। सालाना पास के जरिए नेशनल हाईवे पर लोगों को टोल टैक्स काफी कम चुकाना पड़ रहा था। लेकिन, केन्द्र सरकार की इसी स्कीम की आड़ में साइबर ठग भोले-भाले लोगों को ठग रहे हैं। इन साइबर ठगों ने नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) की ऑफिशियल वेबसाइट जैसी दिखने वाली फर्जी वेबसाइट बना ली है। ये साइबर ठग Google Ads और SEO के जरिए फर्जी वेबसाइट्स को गूगल पर सबसे ऊपर यानी फर्स्ट रैंक में दिखा रहे हैं। ऐसे में लोग इसे ऑफिशियल वेबसाइट समझते हैं और सालाना पास की फीस जमा कराकर ठगी का शिकार हो रहे हैं। साइबर क्राइम के डीजी संजय अग्रवाल ने एडवाइजरी जारी की है और आमजन को इस नए फिशिंग स्कैम से बचने की सलाह दी है।
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वेबसाइट और लोगो का डिजाइन असली जैसा
साइबर क्राइम के डीजी संजय अग्रवाल ने बताया कि साइबर ठग बेहद शातिर हैं। इन्होंने फर्जी वेबसाइट्स की डिजाइन और लोगो बिलकुल NHAI की ऑफिशियल वेबसाइट जैसा बना रखा है। फर्जी और ऑफिशियल वेबसाइट की पहचान करना मुश्किल हो जाता है। साइबर ठग पैसे देकर अपनी फर्जी साइट को Sponsored टैग के साथ ऊपर दिखाते हैं। ऐसे में आमजन इसे असली वेबसाइट समझ लेते हैं। ये फर्जी वेबसाइट्स सालाना पास के लिए 3 हजार रुपए क्यूआर कोड के जरिए मांगती है। इसे स्कैन करके जैसे ही पैसा ट्रांसफर किया जाता है, वह सरकारी खाते के बजाय साइबर ठगों के म्यूल अकाउंट में ट्रांसफर हो जाता है। पुलिस ने आगाह किया है कि सरकारी भुगतान कभी भी किसी व्यक्ति विशेष के नाम पर नहीं मांगे जाते हैं।
कौन है असली, कौन है नकली…ऐसे करें पहचान
आधिकारिक प्लेटफॉर्म: पास खरीदने या रिन्यू करने के लिए Rajmarg Yatra आधिकारिक ऐप या अधिकृत बैंक पोर्टल का यूज करें।
URL को गौर से देखें: annualtollpass.com या annualtollpasss.com जैसे संदिग्ध लिंक से बचें।
प्राप्तकर्ता का नाम जांचें: यदि स्कैन करते समय व्यक्तिगत नाम “सरिता देवी” या किसी अन्य व्यक्ति का नाम आए, तो तुरंत रुक जाएं।सजग रहे: ऑनलाइन भुगतान करते समय विशेष सावधानी बरते और किसी भी संदिग्ध लिंग से अपनी बैंकिंग जानकारी शेयर ना करें।
ठगी होने पर तुरंत लें हैल्प
यदि आप इस तरह के किसी स्कैम में फंस जाते हैं, तो समय गंवाए बिना तुरंत कार्रवाई करें। ऐसा होने पर आपका पैसा वापस मिलने की संभावना बढ़ जाती है। इसके लिए आप साइबर हैल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल कर सकते हैं। इसके अलावा राजस्थान पुलिस के विशेष हेल्पडेस्क नंबर 9256001930 या 9257510100 पर भी सूचना दी जा सकती है। अपनी शिकायत आप भारत सरकार के पोर्टल cybercrime.gov.in पर भी दर्ज करवा सकते हैं।
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