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धरती तप रही, लेकिन इंसानियत जिंदा है…गांव के युवा बचा रहे बेजुबानों की जान

– प्यास से तड़पते जानवरों के लिए देवदूत बने युवा, 51 जलाशय भरने का लिया संकल्प

 

जयपुर। प्रदेशभर में पड़ रही भीषण गर्मी जहां इंसानों के लिए मुश्किलें बढ़ा रही है, वहीं जंगलों और ग्रामीण इलाकों में रहने वाले पशु-पक्षियों के लिए यह मौसम जानलेवा साबित हो रहा है। तपती धरती, सूखे तालाब और  खाली पोखर बेजुबान जीवों की प्यास को और बढ़ा रहे हैं। ऐसे कठिन समय में जयपुर जिले के डिग्गी-मालपुरा रोड स्थित रातल्या गांव के युवाओं ने मानवता और जीवदया की अनूठी मिसाल पेश की है। गांव के युवा अपने निजी खर्चे से सूख चुके जलाशयों, तालाबों और पोखरों में पानी के टैंकर डलवाकर पशु-पक्षियों की प्यास बुझाने में जुटे हैं। गांव के इन युवाओं की यह पहल अब इलाके में चर्चा का विषय बन गई है और लोग इसे ‘बेजुबानों के लिए जीवनदान’ बता रहे हैं।

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युवाओं की पहल से बेजुबानों को मिला पानी

समाजसेवी दिनेश रातल्या और राजुलाल बागड़ा अचरावला ने बताया कि प्रदेश में इस समय तेज गर्मी और लू का प्रकोप लगातार बढ़ रहा है। कई इलाकों में जलस्रोत पूरी तरह सूख चुके हैं, जिसके कारण हजारों पशु और पक्षी पानी की तलाश में भटक रहे हैं। कई बेजुबान जीव प्यास और गर्मी के कारण दम तोड़ रहे हैं। इसी पीड़ा को देखते हुए गांव के युवाओं ने मिलकर जलाशयों को भरने का अभियान शुरू किया। शुक्रवार को रिंग रोड रातल्या क्षेत्र में स्थित एक सूखे तालाब में पानी के टैंकर डलवाकर उसे भरा गया, ताकि आसपास के पशु-पक्षियों को राहत मिल सके।

सूखे तालाबों में फिर लौटी जिंदगी

ग्रामीणों का कहना है कि जब तालाब में पानी भरा गया तो कुछ ही देर में गाय, नीलगाय, पक्षी और अन्य जानवर वहां पहुंचने लगे। पानी देखकर मानो बेजुबानों को नया जीवन मिल गया। यह दृश्य वहां मौजूद लोगों को भावुक कर गया। युवाओं ने इस अभियान के तहत 51 जलाशयों को भरने का संकल्प लिया है। अभियान में कृष्ण बागड़ा, रामजीलाल शर्मा, महेश बागड़ा, रवि बाड़ीवाल, जितेंद्र बाबड़ी सहित सैकड़ों युवा सक्रिय रूप से सहयोग कर रहे हैं। कोई आर्थिक मदद दे रहा है तो कोई टैंकर की व्यवस्था में जुटा है।

बेजुबानों के लिए आगे आए युवा


गांव के बुजुर्गों का कहना है कि आज के समय में जहां लोग अपने स्वार्थ में व्यस्त हैं, वहीं युवाओं का यह प्रयास समाज के लिए प्रेरणादायक है। यह केवल पानी भरने का काम नहीं, बल्कि जीवों के प्रति संवेदना और प्रकृति संरक्षण का संदेश भी है। भीषण गर्मी के इस दौर में रातल्या गांव के युवाओं की यह पहल साबित कर रही है कि इंसानियत सिर्फ इंसानों तक सीमित नहीं होती, बल्कि हर जीव के प्रति दया और जिम्मेदारी ही सच्ची मानवता है।

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