-राजस्थान में हेल्थ सिस्टम पर सियासी संग्राम: पूर्व चिकित्सा मंत्री ने कांग्रेस की गिनाईं उपलब्धियां, भाजपा पर लगाया लापरवाही का आरोप
जयपुर। प्रदेश के पूर्व चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा ने भजनलाल सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि राजस्थान में डबल इंजन सरकार का आधा कार्यकाल पूरा होने के बावजूद राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल नहीं है। प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में पूर्व चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा ने कहा कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने जमीनी स्तर पर चिकित्सा सुविधाओं को मजबूत करते हुए विश्वस्तरीय स्वास्थ्य ढांचा तैयार किया था। नि:शुल्क दवा योजना, नि:शुल्क जांच योजना तथा 25 लाख रुपए तक कैशलेस इलाज जैसी लोक-कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से राजस्थान को स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनाया गया।
“आधा कार्यकाल बीता, अस्पताल अधूरे”
डॉ. शर्मा ने कहा कि कांग्रेस शासन के दौरान नि:शुल्क दवा और जांच योजनाओं का लगातार विस्तार किया गया, जिसमें महंगी जांचें जैसे एमआरआई भी शामिल थीं। उन्होंने दावा किया था कि “निरोगी राजस्थान” की अवधारणा के तहत राज्य में राइट टू हैल्थ कानून लागू किया गया, लेकिन वर्तमान भाजपा सरकार ने इसे प्रभावी रूप से लागू नहीं किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार के समय शुरू हुई कई स्वास्थ्य परियोजनाएं अब भी अधूरी पड़ी हैं। जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल का 24 मंजिला और 1200 बेड क्षमता वाला आईपीडी टावर तथा सांगानेरी गेट स्थित महिला चिकित्सालय का आईपीडी टावर अब तक पूर्ण नहीं हो सका है।
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मेडिकल कॉलेजों को लेकर सरकार पर सवाल
पूर्व चिकित्सा मंत्री ने कहा कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में 33 में से 30 जिलों में सरकारी मेडिकल कॉलेज शुरू किए गए। साथ ही नर्सिंग और पैरामेडिकल कॉलेज भी खोले गए, ताकि स्वास्थ्य सेवाओं में स्टाफ की कमी न रहे। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार नए जिलों में मेडिकल कॉलेज खोलने की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं कर रही है और पूर्व में घोषित कुछ परियोजनाएं भी निरस्त कर दी गईं।
आरजीएचएस योजना के लिए नहीं पर्याप्त बजट
डॉ. शर्मा ने राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) को कमजोर करने का आरोप लगाते हुए कहा कि योजना के लिए बजट आवंटन पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कहा कि योजना में भुगतान लंबित होने के कारण निजी अस्पताल इलाज बंद करने की चेतावनी दे रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि बजट और वास्तविक खर्च के बीच बड़ा अंतर है और बकाया भुगतान के कारण योजना के संचालन पर संकट पैदा हो गया है। उन्होंने कथित अनियमितताओं की जांच की भी मांग की।
जिला अस्पताल बने रेफरल केन्द्र
उन्होंने कहा कि जिला अस्पतालों में चिकित्सकों की संख्या घट गई है और कई अस्पताल केवल रेफरल केंद्र बनकर रह गए हैं। गंभीर बीमारियों के इलाज में आर्थिक बोझ कम करने के लिए कांग्रेस सरकार ने कैशलेस इलाज और नि:शुल्क योजनाएं लागू की थीं। डॉ. शर्मा ने राज्य सरकार से यह भी पूछा कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के कारण एमआरआई में उपयोग होने वाले हीलियम की आपूर्ति प्रभावित होने की स्थिति में सरकार की क्या तैयारी है।
कांग्रेस मॉडल की सराहना की
उन्होंने सरकार से मेडिकल कॉलेजों में स्टाफ उपलब्धता, सुपर स्पेशलिटी सुविधाओं के विस्तार और स्वास्थ्य क्षेत्र की भविष्य की कार्ययोजना सार्वजनिक करने की मांग की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस शासन में विकसित स्वास्थ्य मॉडल की देश-विदेश में सराहना हुई थी, जबकि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में स्वास्थ्य ढांचा कमजोर हो रहा है।
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