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सवाई माधोपुर पुलिस का ‘ऑपरेशन शिकंजा’ बना 11 साल से फरार आरोपियों के लिए फंदा

-एक आरोपी एम्बुलेंस चालक की नौकरी और दूसरा हुलिया और ठिकाने बदलकर 11 साल से छका रहे थे सवाई माधोपुर पुलिस को

 

जयपुर। ‘ऑपरेशन शिकंजा’ के तहत सवाई माधोपुर पुलिस ने 11 साल से चकमा दे रहे दो बदमाशों को दबोच कर बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। एसपी अनिल कुमार बेनीवाल ने विशेष टीम बनाकर इस काम को फिल्मी अंदाज देते हुए कामयाबी हासिल की है। बताते चलें कि ये दोनों बदमाश बहुत लंबे समय से पुलिस की आंखों में धूल झोंक रहे थे। यही वजह है कि इस कार्रवाई को अंजाम देने के लिए पुलिस को फिल्मी तरीकों का सहारा लेना पड़ा। दोनों आरोपी अलग-अलग ठिकानों पर रह रहे थे। पुलिस की टीम ने प्लानिंग कर उत्तराखंड और पंजाब में छिपे इन बदमाशों को कड़ी मेहनत के बाद ढूंढ निकाला। कई अपराधों में संलिप्त इन भगोड़े आरोपियों पर 30 हजार की इनामी राशि रखी गई थी।

 

एम्बुलेंस चालक बनकर कर रहा था काम

सवाई माधोपुर का शातिर अपराधी मनीष उपाध्याय 2015 से पुलिस की आंखों की किरकिरी बना हुआ था। उत्तराखंड के हरिद्वार में आरोपी एम्बुलेंस चालक बनकर नौकरी कर रहा था। आरोपी पर 15 हजार की ईनाम राशि भी रखी गई थी। सूचना मिलते ही इसे पकड़ने के लिए पुलिस को फिल्मी तरीके से कार्रवाई को अंजाम देना पड़ा। आरोपी पर जमीन के सौदे को लेकर 25 लाख रुपए की धोखाधड़ी का आरोप था। तभी से यह अपने पूरे परिवार को लेकर अंडरग्राउंड हो गया था। साथ ही आरोपी पर एससी/एसटी एक्ट के तहत भी मामले लंबित थे। ऐसे में इसके हरिद्वार छिपे होने की खबर मिलते ही पुलिस ने दो दिनों की दबिश के बाद ठिकाने पर छापा मारा और आरोपी को गिरफ्तार किया।

 

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गंगापुर सिटी के चर्चित चेयरमैन हत्याकांड का आखिरी शूटर गिरफ्तार

 

पुलिस को आखिरकार 11 साल के बाद सफलता हाथ लग ही गई, जब गंगापुर सिटी के फेमस प्रकाश चन्द अग्रवाल का आखिरी आरोपी रणजीत सिंह पंजाब के मोगा जिले से पुलिस के हत्थे चढ़ा। ज्ञात हो तो आरोपी शूटर ने चेयरमैन अग्रवाल को उनके घर के बाहर गाड़ी में ही गोली मारकर उनकी हत्या कर दी थी। इस हत्याकांड ने पूरे राजस्थान को हिला कर रख दिया था। इस हत्याकांड में शामिल कुल 15 आरोपी थे, जिनमें से 14 पहले ही पकड़े जा चुके थे। केवल रणजीत सिंह ही पुलिस की गिरफ्त से बाहर था। बताया जाता है कि आरोपी पुलिस को चकमा देने में इसलिए भी कामयाब रहा क्योंकि वह अकसर अपने ठिकाने बदलकर पंजाब, राजस्थान और यूपी में रह रहा था। आरोपी पर 20 हजार रुपए की ईनाम राशि रखी गई थी। पुलिस ने कार्रवाई को साइबर सेल की मदद से आरोपी को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की।

 

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