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रेल नगरी बांदीकुई का बढ़ा मान, 33 साल बाद लौटी भाप इंजन की पहचान

– इतिहास फिर हुआ जिंदा: 1874 की पहली पैसेंजर ट्रेन की याद दिलाएगा विंटेज स्टीम इंजन मॉडल

 

बांदीकुई। ब्रिटिशकालीन रेल नगरी बांदीकुई में एक बार फिर इतिहास साकार होता नजर आ रहा है। करीब 33 वर्ष बाद शहर में भाप इंजन की यादें ताजा हो गई हैं। अब यहां एक विंटेज स्टीम इंजन मॉडल को विरासत प्रतीक के रूप में स्थापित किया जा रहा है, जिससे शहर की ऐतिहासिक पहचान को नया आयाम मिलेगा। दक्षिण रेलवे की प्रसिद्ध गोल्डन रॉक रेलवे वर्कशॉप की ओर से निर्मित ‘बी क्लास’ नैरो गेज स्टीम इंजन का मॉडल बांदीकुई जंक्शन के बाहर जीआरपी थाने के समीप विकसित विशेष प्लेटफॉर्म पर लगाया जा रहा है। यह इंजन शहर की समृद्ध रेल विरासत को संजोने और नई पीढ़ी को उससे परिचित कराने का माध्यम बनेगा।

 

1874 की ऐतिहासिक शुरुआत

आपको बता दें कि वर्ष 1874 में आगरा फोर्ट रेलवे स्टेशन से बांदीकुई तक राजस्थान की पहली पैसेंजर ट्रेन चली थी। उस समय आगरा से बांदीकुई के बीच भाप से चलने वाला स्टीम इंजन दौड़ा था, जिसने इस क्षेत्र को रेल मानचित्र पर महत्वपूर्ण स्थान दिलाया और बांदीकुई को ब्रिटिशकालीन रेल नगरी के रूप में पहचान दिलाई।

 

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विधायक के प्रयासों से साकार पहल

स्टेशन परिसर के बाहर विरासत के रूप में स्थापित विंटेज स्टीम इंजन।
स्टेशन परिसर के बाहर विरासत के रूप में स्थापित विंटेज स्टीम इंजन।

लंबे समय से बांदीकुई की रेल विरासत को पुनर्जीवित करने की मांग उठाते रहे हैं। उनकी पहल पर इस ऐतिहासिक योजना को अमलीजामा पहनाया जा रहा है। उनका कहना है कि स्टेशन परिसर के बाहर विकसित प्लेटफॉर्म पर विंटेज स्टीम इंजन की स्थापना से न केवल स्टेशन का सौंदर्य बढ़ेगा, बल्कि शहर की ऐतिहासिक पहचान और गौरव भी सुदृढ़ होगा।

 

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रेल प्रेमियों में उत्साह

स्टेशन के बाहर तैयार किए गए विशेष प्लेटफॉर्म पर इंजन मॉडल स्थापित होते ही यह आमजन और रेल प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र बन जाएगा। स्थानीय नागरिकों में इस ऐतिहासिक पहल को लेकर खासा उत्साह देखा जा रहा है। बांदीकुई में विरासत की पटरी पर लौटती यह गूंज न केवल अतीत की याद दिलाएगी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी शहर के गौरवशाली रेल इतिहास से जोड़ने का कार्य करेगी।

 

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