जयपुर। फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया यानी फुलेरा दोज के स्वयंसिद्ध अबूझ मुहूर्त पर गुरुवार को राजधानी में धार्मिक आस्था, उत्साह और उल्लास का त्रिवेणी संगम देखने को मिला। शहर में बैंड-बाजा और बारात की धूम के बीच बड़ी संख्या में विवाह समारोह हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुए। गार्डन, रिसोर्ट, बैंक्वेट हॉल और सामुदायिक केन्द्र विवाह आयोजनों से गुलजार रहे तथा पूरे राजधानी में उत्सव जैसा माहौल बना रहा। हालांकि बारात के कारण मैरिज गार्डनों के आसपास जाम के हालात रहे। गायत्री शक्तिपीठ ब्रह्मपुरी में सादगी पूर्वक विवाह हुआ। आचार्य पीठ से मणिशंकर पाटीदार ने वैदिक विधि से पाणिग्रहण संस्कार संपन्न कराया। उपस्थित सभी लोगों ने पुष्प वर्षा कर नवदंपत्ति को आशीर्वाद प्रदान किया। वर-वधु को उपहार में गृहस्थ जीवन से जुड़ी पुस्तकों का सैट प्रदान किया गया। फिजूलखर्ची रोकने केे लिए दिन में फेरे कराए गए। गायत्री परिवार की ओर से विभिन्न विवाह स्थलों पर जूठन नहीं छोडऩे की अपील की गई। उतना ही लो थाली में व्यर्थ न जाए नाली में लिखी तख्तियां लेकर गायत्री परिवार के कार्यकर्ताओं ने प्रेरक संदेश दिया।
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अन्य मांगलिक आयोजन भी हुए
फुलेरा दोज को विवाह के अलावा गृह प्रवेश, संपत्ति क्रय, व्यवसाय आरंभ, नींव पूजन सहित सभी प्रकार के मांगलिक कार्यों की धूम रही। अबूझ मुहूर्त होने से लग्न, वार एवं चंद्रमा से जुड़े दोष स्वत: समाप्त हो जाते हैं, जिसके कारण बड़ी संख्या में विवाह समारोह आयोजित हुए। सर्दियों के विवाह सीजन का यह अंतिम प्रमुख शुभ दिन भी रहा। मौसम में आए बदलाव और हल्की बारिश के कारण विवाह दो दिन पहले के कार्यक्रम जैसे भात, महिला संगीत एवं हल्दी समारोह आंशिक रूप से प्रभावित हुए थे। तेज हवा के चलते खुले स्थानों पर लगाए गए टेंट उड़ने से कई आयोजनों को बैंक्वेंट हॉल में स्थानांतरित करना पड़ा। लेकिन गुरुवार को मौसम साफ रहने और हल्की धूप खिलने से विवाह समारोह सुव्यवस्थित रूप से संपन्न हुए।
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