खांसी की सिरप की गुणवत्ता मामला: चिकित्सा मंत्री ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दी सफाई, कहा-जहां सरकारी डॉक्टर्स ने यह दवा लिखी, वहां नहीं हुई मौत
DextromethorphanHBrSyrup: जयपुर। खांसी की सीरप पीने से बच्चों की मौत और बीमार होने के मामले पर घमासान मचा हुआ है। अब इस मामले को लेकर चिकित्सा मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सफाई दी है। उन्होंने बताया कि औषधि नियंत्रक और दवा खरीदने वाली कंपनी RMSCL ने संयुक्त रूप से डेक्सट्रोमैथोर्फन एचबीआर कफ सिरप की जांच की। इसमें कोई भी ऐसा पदार्थ नहीं मिला, जो घातक हो सकता है। इन दवाओं का चार बार परीक्षण किया जा चुका है। हमें पता चला है कि इस दवा के कारण मौतें नहीं हुई हैं। प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र या जिला अस्पताल स्तर पर, जहां सरकारी डॉक्टरों ने बच्चों के लिए यह दवा लिखी थी, कोई मौत नहीं हुई है। सरकार की ओर से कोई लापरवाही नहीं हुई है और न ही दवा में कोई मिलावट हुई है। स्वास्थ्य विभाग ने अब एक नई नीति शुरू की है, जिसके तहत गर्भवती महिलाओं और छोटे बच्चों के लिए सभी दवाओं पर विशेष सावधानी बरती है।
बाजार वाली दवा की जांच सिर्फ एक बार, हम कई स्तर पर जांचते हैं गुणवत्ता
चिकित्सा मंत्री ने कहा कि कोई भी दवा बाजार में आने से पहले दवा कम्पनी एक तय प्रोटोकॉल का पालन करती है। उन्होंने कहा कि बाजार में मिलने वाली दवा की गुणवत्ता जांच सिर्फ एक बार ही होती है। लेकिन, निशुल्क दवा योजना में गुणवत्ता जांच कई स्तर पर होती है। उन्होंने बताया कि जो भी कम्पनी दवा सप्लाई करती है उसकी दवा के सभी बैचों का सैम्पल लेकर उसकी फिर से जांच आरएमएससीएल कराती है। जांच में खरा उतरने पर ही दवा को वितरण के लिए भेजा जाता है। कोई भी कमी मिलने पर दवा के स्टॉक को रोक दिया जाता है। उन्होंने बताया कि RMSCL से जो दवा औषधि भंडार या वितरण के लिए जाती है, वहां भी समय-समय पर रेण्डम ड्रग आयुक्तालय की टीम इनकी जांच करती है। दवा में कमी मिलने पर कम्पनी के खिलाफ नियमानुसार डिबार की कार्यवाही की जाती है।
दवा सेवन से बीमार हुए बच्चे अब स्वस्थ, लापरवाह डॉक्टर और फार्मासिस्ट सस्पेंड
खांसी की सिरप डेक्सट्रोमैथोर्फन एचबीआर की गुणवत्ता को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस में जानकारी देते चिकित्सा मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर।
चिकित्सा मंत्री ने बताया कि पिछले दिनों भरतपुर, सीकर सहित कई जगहों पर मुख्यमंत्री निशुल्क दवा योजना में आपूर्ति की जाने वाली औषधि Dextromethorphan HBr Syrup IP 13.5mg/5ml की गुणवत्ता का मामला आया था। सबसे पहले Dextromethorphan HBr Syrup IP 13.5mg/5ml [440] के बैच नम्बर KL-25/147 की भरतपुर से और फिर सीकर से बैच संख्या KL-25/148 की शिकायतें मिलीं। बताया गया कि इस दवा के सेवन से मरीजों को उल्टी, नींद, घबराहट, चक्कर, बेचैनी और बेहोशी जैसी समस्याएं आईं। स्वास्थ्य विभाग ने तुरंत इन बैचों पर रोक लगा दी। साथ ही इन बैचों के नमूने लेकर राजकीय औषधि परीक्षण प्रयोगशाला भिजवाया। उन्होंने कहा कि भरतपुर निवासी गगन पिता के लिए लिखी गई दवा का सेवन करने से बीमार हुआ, जो अब स्वस्थ है। वहीं सीकर निवासी किट्टू और टिंकू को पीएचसी पर डेक्सट्रोमैथोर्फन दवा दी गई। इसके सेवन के बाद इनकी तबीयत खराब हो गई थी, लेकिन अब बच्चे पूरी तरह स्वस्थ हैं। लापरवाही बरतने पर हाथीदेह पीएचसी की चिकित्सक डॉ. पलक कूलवाल और फार्मासिस्ट पप्पू सोनी को निलंबित कर दिया गया है।
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जिन बच्चों की मौत हुई, उन्हें नहीं दी गई डेक्सट्रोमैथोर्फन सिरप
उन्होंने बताया कि इसी दौरान सीकर और भरतपुर में खांसी की सिरप से तीन बच्चों की मौत का मामला भी सामने आया। इनमें सीकर निवासी नित्यांश शर्मा, भरतपुर निवासी सम्राट और तीर्थराज थे। चिकित्सा मंत्री ने बताया कि नित्यांश शर्मा को 7 जुलाई तो चिराना के सीएचसी में दिखाया गया। वहां पर डॉक्टर ने उन्हें Dextromethorphan HBr दवा नहीं लिखी। इसके बाद बच्चे को किसी भी अस्पताल में नहीं दिखाया गया। इसके बाद 29 सितम्बर को बच्चे की मौत हो गई। वहीं बालक सम्राट को निमोनिया था। जिसका शुरुआत में उप स्वास्थ्य केन्द्र मलाह, ब्लॉक सेवर में ANM एवं CHO ने अपने स्तर पर इलाज किया। इसके बाद उसे भरतपुर जिला अस्पताल और फिर जयपुर के जेके लोन अस्पताल रैफर कर दिया। जयपुर में 22 सितम्बर को उसकी मौत हो गई। बच्चे को किसी भी सरकारी अस्पताल स्तर पर डेक्सट्रोमैथोफेन एचबीआर दिए जाने का कोई रिकॉर्ड नहीं है। जेके लोन अस्पताल ने सम्राट की मौत कारण एक्यूट रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस सिण्ड्रोम बताया है। उन्होंने बताया कि तीर्थराज को खांसी और बुखार था। तीन दिन की बीमारी की हिस्ट्री लेकर परिजनों ने उसे वैर के उप जिला अस्पताल में दिखाया। वहां पर डॉक्टर ने उसे Syrup Amoxycillin, Syrup Anticold एवं Ambroxol 2ml cough syrup दी। परिजनों को दवा की मात्रा और समय के बारे में भी बताया गया था। उसी दिन बच्चे की तबीयत बिगड़ने पर उसे भरतपुर के जिला अस्पताल और वहां से जयपुर के जेके लोन अस्पताल रैफर कर दिया गया। वहां पर 27 सितम्बर को बच्चे की मौत हो गई। बालक को किसी भी सरकारी अस्पताल में डेक्सट्रोमैथोर्फन एचबीआर नहीं दी गई। जेके लोन अस्पताल ने तीर्थराज की मौत एक्यूट एनसिफलाइटिस के कारण होना बताया है।






