भजनलाल शर्मा का वार: ‘कांग्रेस का कॉलम खाली’; विपक्ष का पलटवार- ‘बहस से भाग रही सरकार’
जयपुर। राजस्थान विधानसभा में शनिवार का दिन पूरी तरह ‘2 साल बनाम 5 साल’ की बहस के नाम रहा। मुद्दा था कि ‘2 वर्ष बनाम 5 वर्ष ‘। सत्ता पक्ष दो साल के कामकाज का प्रतिवेदन लेकर आया, विपक्ष पांच साल बनाम दो साल पर बहस की मांग पर अड़ा रहा। जैसे ही स्पीकर वासुदेव देवनानी ने चर्चा शुरू करने के संकेत दिए, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली खड़े हो गए। उनका सीधा सवाल था कि ‘बीएसी में तय हुआ था कि 5 साल बनाम 2 साल पर बहस होगी, तो केवल 2 साल का प्रतिवेदन क्यों?’ उन्होंने इसे ‘गलत परिपाटी’ बताया और संशोधित प्रस्ताव लाने की मांग रख दी। संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने पलटवार किया कि ‘मुख्यमंत्री ने चुनौती स्वीकार कर प्रतिवेदन पहले ही पटल पर रखा था। सचिवालय ने उसी आधार पर दस्तावेज तैयार किए हैं। आपत्तियां निराधार हैं।’ इसी बीच सरकारी मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग भी विपक्ष पर बहस से भागने का आरोप लगाते नजर आए। दिन के अंत में 2 साल बनाम 5 साल की बहस पूरी नहीं हो सकी, लेकिन सियासी पारा चढ़ा रहा। कांग्रेस संशोधित प्रस्ताव की मांग पर अड़ी रही, सरकार प्रतिवेदन के आधार पर चर्चा पर कायम रही। सीएम ने ‘बड़ी लाइन खींचने’ की बात दोहराई और पीएम मोदी के नेतृत्व का जिक्र किया। सदन की कार्यवाही सोमवार तक के लिए स्थगित हो गई।
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डोटासरा का तंज: ‘सीएम की बात की वैल्यू नहीं?’

कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने मुख्यमंत्री के 5 फरवरी के भाषण का हवाला देते हुए पेज नंबर तक पढक़र सुनाया कि ‘सीएम ने खुद कहा था कि 5 साल बनाम 2 साल पर बहस होनी चाहिए। फिर आज सिर्फ 2 साल का प्रस्ताव क्यों?’ उन्होंने पेज नंबर तक पढक़र सुनाया और तंज कसा कि ‘क्या मुख्यमंत्री की बात की वैल्यू नहीं? सरकार खुद उनकी बेइज्जती करा रही है। इतना सुनना था कि सत्ता पक्ष की बेंचों से शोर उठा। मंत्री अविनाश गहलोत और जवाहर बेढ़म ने विपक्ष को ‘कायर’ और ‘बहस से भागने वाला’ बताया। कांग्रेस विधायक वेल में आ गए, नारेबाजी शुरू हो गई। स्पीकर ने कार्यवाही आधे घंटे के लिए स्थगित कर दी और फिर शुरू हुई, फिर हंगामा, फिर स्थगन। यह सिलसिला पांच बार चला।
बहस से भाग रही सरकार: जूली
नेता प्रतिपक्ष टीकारसम जूली ने कहा कि ये बहस से भागकर इसका इल्जाम हम पर डालना चाहते हैं। बहस करें तो पांच साल बनाम दो साल का प्रस्ताव रखिए, केवल दो साल का ही प्रस्ताव क्यों रखा?
9 मिनट बाद ही कार्यवाही स्थगित
पांच बजे जैसे ही कार्यवाही शुरू हुई कांग्रेस विधायकों ने वेल में नारेबाजी जारी रखी। स्पीकर ने कांग्रेस विधायकों से अपनी सीटों पर जाने को कहा, लेकिन हंगामा जारी रहा। हंगामे के बीच ही स्पीकर ने बहस के लिए भाजपा विधायक अतुल भंसाली का नाम पुकार लिया। भंसाली हंगामे और नारेबाजी के बीच कुछ देर बोलते रहे। स्पीकर ने हंगामे के कारण चौथी बार सदन की कार्यवाही को 5:45 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया।
हंगामे के बीच सीएम का हमला: ‘कांग्रेस का कॉलम खाली है‘

शाम करीब पांच बजे जब सदन फिर शुरू हुआ तो हंगामे के बीच ही मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा बोलने खड़े हो गए। विपक्षी सदस्य वेल में नारे लगा रहे थे, लेकिन सीएम रुके नहीं। सीएम ने दस्तावेज लहराते हुए कहा कि ‘विपक्ष ने हमें चुनौती दी थी, हमने स्वीकार की। उसी के तहत प्रस्ताव लाया गया। कांग्रेस का कॉलम ही खाली है।’ उन्होंने दावा किया कि ‘संकल्प पत्र 2023 के 352 में से 285 बिंदुओं को दो साल में क्रियान्वित कर लिया। कांग्रेस राज के काम जीरो… जीरो… जीरो हैं। सीएम ने पूर्ववर्ती सरकार पर भ्रष्टाचार और तुष्टिकरण का आरोप लगाते हुए कहा कि ‘अगर काम किए होते तो देश में ऐसे सिमट नहीं जाते।’ उन्होंने तंज कसा कि पूर्व सीएम मैदान में आते तो पता लगता 5 साल बनाम 2 साल क्या होता है।‘ कांग्रेस के बहिष्कार पर सीएम ने कहा उकि ‘मैं पूरे दस्तावेज लेकर आया था। बोलने के लिए बहुत कुछ है। कांग्रेस में सच्चाई सुनने का साहस नहीं, इसलिए मैदान छोडक़र भाग गए।’ करीब 20 मिनट तक वे हंगामे के बीच बोलते रहे और फिर कांग्रेस विधायक वॉकआउट कर गए।
डोटासरा बनाम जूली? सीएम का नया आरोप
सीएम यहीं नहीं रुके और उन्होंने कहा कि ‘डोटासरा चाहते थे कि नेता प्रतिपक्ष जूली नहीं बोल सकें, इसलिए हंगामा कराया गया। प्रतिपक्ष का नेता कोई और बनना चाहता है।’ सदन में फिर शोर गूंजा। सीएम ने एआई समिट का मुद्दा भी उठाया कि ‘दिल्ली में इंटरनेशनल एआई समिट हो रही थी, दुनिया भर के लोग आए थे। कांग्रेस ने विरोध कर देश को अपमानित किया।’ उन्होंने सेना, चुनाव आयोग और अन्य संस्थाओं पर कांग्रेस द्वारा सवाल उठाने की भी आलोचना की।
पूर्ववर्ती गहलोत सरकार पर CM के 5 बड़े आरोप
-53 बजट घोषणाएं अधूरी
5 साल में 4148 घोषणाएं, जिनमें से 2208 (53) पूरी नहीं हुईं।
-अंतिम वर्ष में 80′ घोषणाओं पर काम नहीं
2023-24 में 1426 घोषणाएं, जिनमें से 1142 (80) पर कोई काम नहीं हुआ।
-626 घोषणाओं पर ‘जीरो काम
5 साल में 626 घोषणाएं ऐसी रहीं जिन पर शून्य प्रगति-ड्रोन, माइस सेंटर, गोल्फ कोर्स, एसएमई टावर जैसी योजनाएं शामिल।
-युवाओं को टैबलेट/लैपटॉप शून्य वितरण
पूर्व सरकार ने छात्रों को एक भी टैबलेट या लैपटॉप नहीं दिया।
-कौशल प्रशिक्षण और नियुक्तियों में पिछड़ना
5 साल में केवल 2.35 लाख युवाओं को प्रशिक्षण, कई भर्तियां पिछली भाजपा सरकार की बताई गईं।
10 प्रमुख उपलब्धियां (2 साल का रिपोर्ट कार्ड)

-73 संकल्प पत्र वादे पूरे/प्रगति पर
392 वादों में से 73′ पूरे या क्रियान्वयन में।
-90 बजट घोषणाओं की स्वीकृति, 80 पर काम शुरू/पूर्ण
2719 घोषणाओं में 919 पूर्ण, 1531 प्रगतिरत।
-1 लाख से अधिक सरकारी नियुक्तियां
2 साल में 1 लाख या नियुक्तियां, 1.55 लाख पद प्रक्रियाधीन।
-3.41 लाख युवाओं को कौशल प्रशिक्षण
5 साल की पिछली सरकार से डेढ़ गुना अधिक।
-88,724 टैबलेट-लैपटॉप वितरण
छात्रों को डिजिटल सशक्तिकरण की पहल।
-सामाजिक सुरक्षा पेंशन में 10 लाख नए लाभार्थी
पेंशन राशि बढ़ाकर 1300, व्यय 16,069 करोड़ (डेढ़ गुना अधिक)।
-गिवअप अभियान में 54 लाख स्वैच्छिक त्याग
27 लाख अपात्र हटाए, 72 लाख पात्र जोड़े गए।
-344 लाख मीटर तारबंदी और 35,368 फार्म पौंड
कृषि क्षेत्र में तीन गुना तक वृद्धि का दावा।
-स्वास्थ्य पर 7,445 करोड़ का कैशलेस उपचार
मां योजना के तहत 2 साल में कोरोना काल से अधिक खर्च।
-जल परियोजनाओं में प्रगति
रामजल सेतु लिंक परियोजना और यमुना जल समझौते को धरातल पर लाने का दावा।
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