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सड़कें अपने हालात पर रोते रोते हो मन में यह ख्वाब पाले हुआ है कि...

ये है बेगूसराय गोसाई मठ का जर्जर सड़क, भाजपा के फायर ब्रांड नेता का कार्य क्षेत्र

BEGUSARAI: राजनीति में कुछ नेता ऐसे हैं जो लोकतांत्रिक विचारधारा को ताक पर रख कर हिंदू-मुस्लिम कर खूब वाहवाही बटोरते हैं। जिसमें 1 नाम केंद्रीय मंत्री और बेगूसराय के सांसद गिरिराज सिंह का भी शामिल है। गिरिराज सिंह हमेशा बड़ी-बड़ी बातें करते हैं विकास का बरा बरा दावा करते हैं। लेकिन उनके ही संसदीय क्षेत्र बेगूसराय में उनके सारे दावे खोखले साबित होते हैं।

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बेगूसराय में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा की हालात यह है कि देखकर ही रोना आता है। यहां की कुछ सड़कें अपने हालात पर रोते रोते हो मन में यह ख्वाब पाले हुआ है कि कभी यह महोदय गिरिराज सिंह हवा हवाई बातें बंद करके जमीन पर लौटेंगे और मेरी हालात में कुछ सुधार होगा। बेगूसराय के खोदावंदपुर प्रखंड स्थित शादी पंचायत के गोसाई गांव, जहां की सड़कें इतनी जर्जर है कि थोड़ी सी बारिश हुई तो सड़क पर धान बोया जा सकता है। थोड़ी सी धूप हुई तो धूल का गुब्बारा उरने लागत है। हालांकि यह सड़क ईट से निर्मित है, जिसका निर्माण दशकों पहले  हुआ था।

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वर्तमान में यह सड़क अपने हालात पर रोता है कहीं गड्ढे हैं, तो कहीं खाई है, तो कहीं कीचड़ है, तो कहीं पानी है। आसपास के कई गांव को जोड़ने वाली मुख्य सड़क है, जिसकी लंबाई तकरीबन 1 किलोमीटर है एवं यहां से प्रत्येक दिन कम से कम 20000 लोगों का आना जाना होता है। सड़कों में बने गड्ढे और किचर कब किस राहगीर को अपना शिकार बना ले और हाथ पैर तोड़ दे या सर फोड़ दे इसका कोई भरोसा नहीं होता।

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इस सड़क पर चलने चलने से प्रत्येक दिन किसी ना किसी व्यक्ति का एक्सीडेंट अवश्य होता है, लेकिन इससे किसी नेता या सामाजिक कार्यकर्ता को कोई फर्क नहीं पड़ता। क्योंकि यहां सभी को अपनी परी है और सभी अपने स्वार्थ सिद्धि के चक्कर में पड़े रहते हैं। शुक्र है सामाजिक कार्यकर्ता डॉ दीनदयाल कुमार का जिन्होंने इस सड़क की हालत को देखकर नेताओं को इसे दिखाने को कहा। जब चुनाव का दौड़ आता है तो नेता वोट मांगने के लिए इसी सड़क से गुजरते हैं। लेकिन उन्हें सड़क की यह हालात दिखाई नहीं देती और जिन्हें दिखाई देती है वह आमजन को बड़े बड़े ख्वाब दिखाकर चलते बनते हैं।

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वोट के बाद यह नेता जी कहां लापता हो जाते हैं इसका कोई पता नहीं होता। गोसाई मठ की सरक का हालात को देखकर ग्रामीणों में नेताओं के प्रति काफी गुस्सा देखा जा सकता है। ग्रामीणों का कहना है कि आगामी विधानसभा चुनाव से पहले यदि सड़क के साथ नाले का निर्माण नहीं होता है तो सभी ग्रामीणों के द्वारा वोट का बहिष्कार किया जाएगा। आपस में कहीं गांव को जोड़ने वाली यह सड़क वर्षो से जर्जर हालात में धूल फांक रही है। जबकि इस मुख्य सड़क से जुड़े मोहल्ले का सड़क पीसीसी के फॉर्म में बना हुआ है।लेकिन यह मुख्य सड़क अब तक क्यों नहीं बन पाई इसके पीछे कई गहरी साजिश है? जिस साजिश के रचनाकार लोकल स्तर के  सरक छाप कुछ नेता हैं, जो अपने स्वार्थ के लिए सड़क के निर्माण में परी रोड़ा बने हुए हैं।

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सड़क के अलावे यदि गिरिराज सिंह के संसदीय क्षेत्र में शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा, रोजगार इत्यादि को देखें तो सभी अपने हालात पर रोते हुए नजर आता है। लेकिन महोदय को हिंदू-मुस्लिम करने से छुट्टी ही नहीं मिलता की वह कभी अपने संसदीय क्षेत्र के दौरे पर आए और जमीनी स्तर पर सभी को करीब से देखें।

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गिरिराज सिंह जो अक्सर बच्चों को सभ्यता और संस्कृति की पाठ पढ़ाने का बात करते हैं, वह पहले बच्चों को सही शिक्षा और सही स्वास्थ्य तो मुहैया कराएं। धूल खाती सड़कों पर चलने से आसपास के बच्चों पर सड़क पर चलने वाले बच्चों पर क्या असर पड़ेगा? उनके स्वास्थ्य पर क्या असर पड़ेगा? और वह कैसी शिक्षा ले पाएंगे ये तमाम सवाल जेहन में उठते रहते हैं? क्या ऐसे ही शिक्षा, स्वास्थ्य देकर बच्चों में सभ्यता और संस्कृति को डाला जाएगा?

डॉ दीनदयाल जी के सौजन्य से

 

NELSON MANDELA
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