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बच्चे की बातें सुनकर ऐसा लग रहा था कि टीचर समझाने के उद्देश्य नहीं बल्कि बच्चे को मानसिक रूप से ...

बेगूसराय के खोदावंदपुर प्रखंड में उत्क्रमित मध्य विद्यालय सागी हिंदी के स्कूल हेड मास्टर ने बच्चे कि की बर्बर पिटाई। भरके परिजन

BEGUSARAI: इस वक्त बिहार के बेगूसराय जिले स्थित खोदावंदपुर प्रखंड के सागी पंचायत  बड़ी खबर आ रही है| जहां मिडिल स्कूल उत्क्रमित मध्य विद्यालय सागी हिंदी  के  हेड मास्टर श्री केसरी शाहू के द्वारा स्कूल के बच्चे को बुरी तरह पीटने का मामला प्रकाश में आया है। छात्र ने रोते हुए बताया कि टीचर सटीक या हाथ से नहीं बल्कि पकड़ कर जमीन पर लिटा दिया उसके शरीर पर खड़ा होकर कहने लगा बेटी चो हीरो बनेगा तो मार कर बर्बाद कर देंगे, बच्चे की बातें सुनकर ऐसा लग रहा था कि टीचर समझाने के उद्देश्य नहीं बल्कि बच्चे को मानसिक रूप से बीमार करने और जान लेने के उद्देश्य पीट रहे थे।

बच्चा बीती बातें बताते बताते हैं बार-बार रो रहा था जब टीचर से इस घटना पर बात की गई तो टीचर ने कहा कि स्कूल में कौन से टीचर है 155 बच्चे हैं 4 टीचर स्कूल आ नहीं रहे, अधिकतर बच्चे स्कूल आते हैं इन बच्चों को संभालना मेरी जिम्मेदारी है। बच्चा बदमाशी करता है तो उसे समझाना मेरा काम है! लेकिन बच्चे को हैवानियत के साथ मारना यह कौन से समझाने का तरीका है? इस इस प्रश्न का उत्तर टीचर नहीं कर पाए? साथ ही बच्चों ने आरोप लगाया कि यह एक आद दो दिन की घटना नहीं है। हमारे हेड मास्टर अक्सर स्कूल में नशा करके पढ़ाने आते हैं और छात्रों से बुरी बर्ताव करते हैं।

PIRIT CHHATR

उत्क्रमित मध्य विद्यालय सागर हिंदी के हेड मास्टर केसरी कुमार साहू ने किशोर न्याय अधिनियम की धज्जियां उड़ाते हुए छात्र को बेरहमी से तो पीटा ही साथ ही, कहा कि छात्र ऐसे ही आरोप लगा रहा है। जब इस आरोप को बहुत सारे छात्रों ने मिलकर साबित कर दिया तो केसरी कुमार साहू की बोलती बंद हो गई। यदि शिक्षक द्वारा छात्रों के पीते जाने पर छात्रों के ऊपर पड़ने वाले मनोवैज्ञानिक प्रभाव को देखे तो  'बच्चों को पीटने से उनके मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर पड़ता है। बच्चों में आत्मग्लानि की भावना बहुत जल्दी आ जाती है। जो बच्चे अपनी बात को किसी से कह नहीं पाते वे चुप रहना शुरू कर देते हैं, घर या बाहर हर जगह लोगों से कटे - कटे रहते हैं। अगर स्कूल में उनकी मार पड़ी है तो वे स्कूल जाने से कतराने लगते हैं। क्लास में उनकी परफॉर्मेंस ख़राब होना शुरू हो जाती है। कई बार इन बच्चों में अवसाद इतना बढ़ जाता है कि ये बच्चे आत्महत्या तक कर लेते हैं। दूसरी तरफ जो बच्चे मुखर होते हैं वे इस तरह की सज़ा से आक्रामक हो जाते हैं। उनके मन में गुस्सा भरने लगता है और धीरे - धीरे उनमें भी हिंसा की भावना आती है, कई बार तो ये भावना इतना बढ़ जाती है कि उस शख्स से नफरत करने लगते हैं और उसको नुकसान पहुंचाने के बारे में भी सोचने लगते हैं।

जब इसकी शिकायत को खोदवांड पुर  प्रखंड के वीडियो से की गई तो वीडियो का कहना हुआ कि यदि यह सही घटना है तो इसका लिखित शिकायत पत्र मुझे दीजिए फिर आगे की कार्रवाई की जाएगी। बच्चों के घर वाले इतने पढ़े लिखे नहीं क्यों इतना दौड़-धूप कर सके इस स्थिति में स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों का क्या होगा?;

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