Home » राजनीति » विधानसभा में गूंजा पत्रकारों का मुद्दा: सुरक्षा, सम्मान और आवास की मांग तेज

विधानसभा में गूंजा पत्रकारों का मुद्दा: सुरक्षा, सम्मान और आवास की मांग तेज

-बजट सत्र में गूंजा पत्रकार हितों का मुद्दा: विधायक कोठारी ने उठाया मुद्दा, गोपाल शर्मा ने किया समर्थन, समिति गठन करने की मांग

 

जयपुर। राजस्थान विधानसभा के बजट सत्र में पत्रकारों के हितों से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय सदन में प्रभावी ढंग से उठाया गया। भीलवाड़ा के निर्दलीय विधायक अशोक कुमार कोठारी ने पर्ची के माध्यम से पत्रकारों की सुरक्षा, सम्मान और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर सरकार का ध्यान आकर्षित किया। सिविल लाइंस विधायक गोपाल शर्मा ने भी इसका पुरजोर समर्थन किया। कोठारी ने कहा कि पत्रकार समाज में महत्वपूर्ण दायित्व निभाते हैं। वे लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रूप में जनहित के मुद्दों को सामने लाते हैं, इसलिए उनके लिए प्रोटेक्शन एक्ट, सम्मान निधि में वृद्धि, आरजीएचएस में ओपीडी सुविधा, तथा आवासीय भूखंड/कॉलोनी योजना लागू की जानी चाहिए। सिविल लाइंस विधायक गोपाल शर्मा ने अशोक कोठारी के प्रस्ताव का समर्थन करते हुए कहा कि यह अत्यंत महत्वपूर्ण और जनहित से जुड़ा विषय है। उन्होंने पत्रकारों के लिए एक उच्च स्तरीय समिति गठित करने और आवासीय व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की। शर्मा ने कहा कि अधिस्वीकृत और गैर-अधिस्वीकृत पत्रकारों के बीच बनी खाई को समाप्त किया जाना चाहिए। साथ ही, फर्जी अधिस्वीकृति की प्रवृत्ति पर भी रोक लगनी चाहिए।

 

पत्रकार और सैनिक – दोनों राष्ट्रसेवा में समर्पित

गोपाल शर्मा ने कहा कि पत्रकार और सैनिक, दोनों ही राष्ट्र सेवा में समर्पित हैं। सैनिक जहां सीमा पर देश की रक्षा करता है, वहीं पत्रकार समाज के बीच रहकर सत्य और जनहित की रक्षा करता है। इसलिए चिकित्सा सुविधाओं या अन्य कल्याणकारी योजनाओं में दोनों के बीच भेदभाव नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा, “पत्रकार मजबूत होंगे, मीडिया संस्थान मजबूत होंगे; और मीडिया संस्थान मजबूत होंगे तो भारत भी मजबूत होगा।”

 

यह भी देखें: MLA गोपाल शर्मा ने की राजस्थान को कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी दिलाने की मांग

 

योग्य पत्रकारों को मिले अधिकार

विधायक शर्मा ने समर्पित पत्रकार मुक्ति नाथ का उदाहरण देते हुए कहा कि कई योग्य पत्रकार वर्षों से सक्रिय होने के बावजूद अधिस्वीकृति से वंचित हैं। उन्होंने कहा कि पूर्व में ऐसी गौरवशाली परंपरा रही है जब लगभग 18 पत्रकारों ने भूमि के लिए आवेदन नहीं किया था, फिर भी तत्कालीन सरकार ने उनकी पात्रता को मानते हुए उन्हें लाभ प्रदान किया था। ऐसी संवेदनशीलता फिर से दिखाई जानी चाहिए।

 

यह भी देखें: विधानसभा में ‘8 लाख करोड़ घोटाले’ पर हंगामा, स्वास्थ्य माफिया पर MLA का बड़ा वार

 

संवैधानिक व्यवस्था का उल्लेख

शर्मा ने कहा कि संविधान ने 1950 में ही मीडिया संस्थानों और पत्रकारों के हितों की रक्षा की भावना व्यक्त की है। जब संविधान संस्थानों को पत्रकारों के हितों का ध्यान रखने का निर्देश देता है, तो यह सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि वह स्पष्ट नीति और ठोस व्यवस्था के माध्यम से इसका समाधान सुनिश्चित करे।

 

ऐसी ही खबरों के लिए देखें: Democraticbharat.com

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments
0
Would love your thoughts, please comment.x
()
x