-चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की ऑर्गन डोनेट और ट्रांसप्लांट में ट्रांसपेरेंसी बनाने की कवायद
जयपुर। राजस्थान में अब ऑर्गन डोनेट और ऑर्गन ट्रांसप्लांट को पूरी तरह ऑनलाइन किया जाएगा। इसके लिए चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग जल्द ही नया लाइव पोर्टल शुरू करेगी। ऑर्गन डोनेट और ऑर्गन ट्रांसप्लांट करने वाले सभी अस्पतालों को इस लाइव पोर्टल से जोड़ा जाएगा। इसके पीछे सरकार की मंशा ऑर्गन डोनेट और ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया को ट्रांसपेरेंट बनाने की है। इस पोर्टल पर सभी जानकारियां भी मौजूद रहेंगी। आपको बता दें कि वर्ष 2024 में एसीबी ने राजस्थान में ऑर्गन ट्रांसप्लांट में फर्जीवाड़े का खुलासा किया था। इस मामले में फोर्टिस हॉस्पिटल, ईएचसीसी और एसएमएस हॉस्पिटल के डॉक्टर्स को भी गिरफ्तार किया था।
विजिलेंस सिस्टम भी बनेगा मजबूत
इस सम्बंध में मंगलवार को चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने स्वास्थ्य भवन में समीक्षा मीटिंग में अहम निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ऑर्गन डोनेट और ऑर्गन ट्रांसप्लांट जीवन रक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है। प्रदेश में इससे जुड़ी सेवाओं को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए मानक प्रक्रियाओं को पूरी तरह ऑनलाइन करने के साथ ही विजिलेंस सिस्टम को सुदृढ़ बनाया जाएगा।
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नियमित अस्पतालों की जांच करेगा निदेशालय प्रकोष्ठ
राठौड़ ने बताया कि अंगदान एवं प्रत्यारोपण के कार्यों के लिए निदेशालय स्तर पर गठित प्रकोष्ठ को और मजबूत किया जाएगा। यह प्रकोष्ठ नियमित रूप से अस्पतालों का निरीक्षण करेगा। सभी अस्पतालों में अंगदान एवं प्रत्यारोपण की प्रक्रियाओं की समय-समय पर जांच भी करेगा। साथ ही उन अस्पतालों में इन कार्यों के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराएगा। सभी महत्वपूर्ण जानकारियां पोर्टल पर अपडेट हैं या नहीं, इसकी भी मॉनिटरिंग करेगा।
सीएचसी स्तर तक स्वास्थ्यकर्मियों को किया जाए प्रशिक्षित
प्रमुख शासन सचिव ने कहा कि अंगदान को प्रोत्साहित करने के लिए मेडिकल कॉलेज से लेकर ट्रोमा सेंटर, सीएचसी स्तर तक स्वास्थ्यकर्मियों और एम्बुलेंसकर्मियों को प्रशिक्षित किया जाए। साथ ही, आमजन एवं स्वास्थ्यकर्मियों में इस पुनीत कार्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए।
शिकायतकर्ता से फीडबैक लेने के दिए निर्देश
उन्होंने जनसमस्याओं के समाधान को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के भी निर्देश दिए। जनसुनवाई, सम्पर्क पोर्टल, 181 हैल्पलाइन, मुख्यमंत्री कार्यालय या अन्य माध्यमों से प्राप्त परिवेदनाओं का तुरंत निस्तारण करने को कहा। साथ ही, शिकायतकर्ता से बात कर समस्या समाधान का फीडबैक भी प्राप्त करने के निर्देश दिए। उन्होंने ग्रिवांस रिडरेसल सिस्टम को मजबूत बनाने और इसके लिए तकनीकी नवाचारों को अपनाने पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि अधिकारी स्वयं के स्टाफ की समस्याओं का भी समय पर निस्तारण कर उन्हें राहत प्रदान करें।






