– हिंदूओं की आस्था और पवित्रता से जुड़ा तुलसी का पौधा हर घर के आंगन और बालकनी में होता है। यह ऐसा सुरक्षा कवच माना जाता है जो दूषित हवा को स्वच्छ कर देता है और स्वास्थ्य के नजिरए से भी बेहद गुणकारी है। अक्सर यह सर्दियों के दौरान अपनी पहचान खोने लगता है। कौन से वे तरीके हैं जिन्हें अपनाकर आप इसे सालभर घर आंगन का सुरक्षा कवच बनाए रख सकते हैं।

सदियों से घरों में देवी रूप में पूजा जाने वाला तुलसी का पौधा, कड़ाके की ठंड के दौरान अपनी पत्तियां खोने लगता है। या यूं कहे कि सर्दियों में पड़ने वाली ओस तुलसी को खराब करने में कोई कसर नहीं छोड़ती है। जब तापमान तेजी से गिरता है, तो तुलसी की पत्तियां पीली पड़कर झड़ने लगती हैं और जड़ों में नमी के कारण फंगस लग जाती है। सुबह की सीधी ओस पत्तियों को गला देती है, जिससे पौधा सूखने लगता है। तुलसी महज सिर्फ एक जड़ी-बूटी नहीं है, बल्कि आस्था और पवित्रता का भी प्रतीक माना जाता है। लेकिन जैसे ही सर्दियाँ शुरू होती हैं, खासकर उत्तरी भारत के मैदानी इलाकों में, तुलसी के पौधे को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। यहां बताए गए बेहद आसान सुझावों को अपनाकर आप अपने तुलसी के पौधे को ठंड और बीमारियों से बचा सकते हैं। इसके अलावा सर्दियों में किस तरह हरा-भरा बनाए रख सकते हैं, यह भी जानिए इस लेख के जरिए।
हींग लगे, न फिटकरी और रंग भी चोखा

तुलसी के पौधे को सर्दी से बचाने के लिए पहला काम उसकी जड़ों को मजबूत बनाना है। इसके लिए गमले के ऊपर की 2 इंच मिट्टी को सावधानी से निकालें। फिर एलोवेरा की पत्ती के छोटे-छोटे टुकड़े करके मिट्टी में डालें। क्योंकि इसमें मौजूद एंटी-फंगल प्रॉपर्टीज तुलसी की जड़ों को पोषक तत्व और नमी देने में मददगार है। साथ ही, इसमें थोड़ी सी हल्दी पाउडर भी मिला दें। हल्दी एक नेचुरल एंटी-फंगल और एंटी-बैक्टीरियल एजेंट है, जो ठंड में जड़ों को सड़ने से बचाती है और जड़ों को मजबूत बनाने का काम करती है। एलोवेरा और हल्दी डालने के बाद, निकाली हुई मिट्टी को वापस डालकर ढक दें। यह प्रक्रिया पौधे को अंदर से सर्दी सहने की शक्ति देती है।
ट्रांसपेरेंट प्लास्टिक शीट लगाएं और ओस से बचाएं

सर्दियों में सुबह पड़ने वाली ओस तुलसी के पत्तों पर जम जाती है, जिससे वे गलने लगते हैं। इससे बचने के लिए पौधे की ऊंचाई से थोड़ी बड़ी 4 पतली टहनियां या छड़ें लें। इन चारों टहनियों को गमले में पौधे के चारों तरफ गाड़ दें। अब इन टहनियों के ऊपर एक ट्रांसपेरेंट प्लास्टिक शीट या बोरी को अच्छी तरह से लपेटकर टेप की मदद से कवर करें। नतीजा, ओस का संपर्क सीधे पत्तियों पर न के बराबर होगा। साथ ही जब दिन चढ़ेगा तो यही प्लास्टिक शीट अंदर की गर्मी को बनाए रखकर पौधे के लिए अनुकूल वातावरण बनाने का काम करेगा। ध्यान रहें कि समय-समय पर इस शीट कवर को दिन में कुछ देर के लिए खोलते रहे ताकि हवा का संचार बना रहे।
नीम ऑयल की घुट्टी, करें कीड़ों की छुट्टी

सर्दी शुरू होते ही मिलीबग्स हल्ला बोल देते हैं। ये छोटे काले कीड़े या मिलीबग्स न केवल घर में यहां-वहां बल्कि पेड़-पौधों के इर्द-गिर्द मंडराते दिख जाते हैं। इन मिलीबग्स का हमला तुलसी पर भी अटैक कर पौधे को नुकसान पहु्ंचाता है। ऐसे में कीड़ों से बचाने के लिए, नीम के तेल की कुछ बूंदों को पानी में मिलाएं और उसमें थोड़ा सा लिक्विड सोप भी डाल दें। अब इस मिश्रण को एक स्प्रे बोतल में भरकर शाम के समय पौधे पर अच्छी तरह से छिड़काव करें। नीम का तेल एक प्रभावी कीटनाशक है, जो कीड़ों को मारेगा और उन्हें दोबारा आने से रोकेगा। इसे हफ्ते में एक बार दोहराया जा सकता है।
अनावश्यक पानी देने से बचें

सर्दियों में तुलसी के पत्ते अकसर गिलगिले होने के कारण बुझे-बुझे दिखाई देते हैं। ऐसे में लोग अक्सर उन्हें मुरझाए समझकर बिना सोचे-समझे पानी देते रहते हैं। पानी की अधिकता के कारण भी तुलसी के पत्ते गलने लगते हैं। ध्यान देने वाली बात यह है कि गर्मियों की अपेक्षा सर्दियों में पौधे को पानी की जरूरत कम होती है। खासकर जब तापमान 10 डिग्री सेल्सियस से नीचे हो तो तुलसी को पानी की जरूरत कम होती है। पौधे को तभी पानी दें जब गमले की मिट्टी ऊपरी 1-2 इंच तक सूखी हुई दिखाई दे। ज्यादा पानी से जड़ों में फंगस लग सकती है, जिससे पौधा गल कर सूख सकता है। कोशिश करें कि हमेशा सुबह के समय पानी दें, ताकि दिन भर में अतिरिक्त नमी सूख जाए और रात में ठंड के कारण जड़ें गीली न रहें।
सही जगह का सिलेक्शन है जरूरी

तुलसी को ठंड से बचाने के लिए उसकी जगह का सिलेक्शन भी जरूरी है। ध्यान रहे कि तुलसी को ऐसी जगह पर रखें, जहाँ उसे दिन भर में कम से कम 4-6 घंटे की सीधी धूप मिल सके। धूप पौधे को गर्म रखती है और प्रकाश संश्लेषण में भी मदद करती है। रात में उसे किसी दीवार के सहारे या बालकनी के अंदरूनी कोने में रखें ताकि पौधे को ठंडी हवा और पाले से बचाया जा सके।






