-“बुलडोजर बनाम आशियाना: हजारों परिवारों का गुस्सा फूटा, अवैध कहना बंद करो, नियमन करो”
जयपुर। शहर के सांगानेर एवं बगरू क्षेत्र में रविवार को एक अलग ही तस्वीर देखने को मिली। सुबह होते-होते श्योपुर चौराहे पर हजारों लोगों की भीड़ जुटने लगी। किसी के हाथ में तख्ती थी तो किसी के चेहरे पर अपने घर बचाने की चिंता साफ झलक रही थी। बुलडोजर की आशंका और अपने आशियाने पर मंडरा रहे खतरे के खिलाफ 87 कॉलोनियों के लोग सड़क पर उतर आए और शांतिपूर्ण पैदल मार्च निकालकर सरकार से राहत की मांग की। तख्तियों पर बड़े अक्षरों में लिखा था कि“अवैध कहना बंद करो, नियमन का प्रबंध करो”, “हमारे घर बचाओ” और “जनता को न्याय दो”। देखते ही देखते श्योपुर चौराहा लोगों से भर गया। महिलाएं, बुजुर्ग, युवा और बच्चे हर वर्ग के लोग इस मार्च में शामिल हुए। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के दिन आयोजित इस विरोध प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिलाओं की मौजूदगी ने आंदोलन को और भी मजबूत बना दिया।
हनुमान चालीसा और हवन के साथ विरोध

कॉलोनीवासियों ने श्योपुर चौराहे से गुलाब विहार होते हुए पिंजरापोल गौशाला तक पैदल मार्च निकाला। रास्ते भर लोगों ने अपने घरों को बचाने की गुहार लगाई। इस दौरान लोगों ने सामूहिक रूप से हनुमान चालीसा का पाठ किया और सरकार को सद्बुद्धि देने के लिए यज्ञ-हवन भी किया। कुछ देर के लिए सड़क पर जाम की स्थिति भी बनी, जब प्रदर्शनकारी सड़क पार कर रहे थे और कुछ लोग वहीं बैठ गए। हालांकि पुलिस ने समझाइश कर स्थिति को संभाल लिया। इस पूरे आंदोलन की वजह फरवरी में आया वह न्यायालय का आदेश है, जिसमें राजस्थान हाईकोर्ट ने #को तीन सप्ताह के भीतर जमीन खाली कर रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए थे। इस आदेश के बाद इन कॉलोनियों में रहने वाले हजारों परिवारों में अपने घरों पर बुलडोजर चलने का डर बैठ गया है। संघर्ष समिति का कहना है कि सरकार पहले भी ऐसी कई योजनाओं का नियमन कर चुकी है और कई कॉलोनियों को अनापत्ति प्रमाण पत्र भी दिए जा चुके हैं। इसलिए इन कॉलोनियों के साथ भी मानवीय आधार पर न्याय किया जाना चाहिए।
बड़े आंदोलन की चेतावनी, निकाय चुनाव का बहिष्कार

आंदोलनकारियों ने राज्य सरकार से मांग की है कि 19 मार्च 2026 को उच्च न्यायालय में होने वाली सुनवाई के दौरान कॉलोनीवासियों का पक्ष मजबूती से रखा जाए और लंबे समय से बसी इन कॉलोनियों को नियमित किया जाए। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द कोई समाधान नहीं निकाला तो यह आंदोलन और बड़ा रूप ले सकता है। साथ ही आने वाले निकाय चुनाव में मतदान बहिष्कार जैसे कड़े कदम उठाने पर भी विचार किया जा सकता है। फिलहाल, अपने घरों को बचाने की उम्मीद में हजारों लोग सड़कों पर उतरकर सरकार से सिर्फ एक ही मांग कर रहे हैं“हमारे आशियाने बचा लो।”
बीते 30 से 40 वर्षों से रह रहे लोग: हाडा
संघर्ष समिति के अध्यक्ष रघुनंदन सिंह हाड़ा और महासचिव परशुराम चौधरी ने बताया कि इन कॉलोनियों में लोग पिछले 30 से 40 वर्षों से रह रहे हैं। लोगों ने अपनी जीवनभर की कमाई और बैंक से कर्ज लेकर यहां मकान बनाए हैं। उनका कहना है कि सरकार ने खुद इन क्षेत्रों में बिजली, पानी, सड़क, सीवरेज और स्ट्रीट लाइट जैसी सभी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाई हैं, इसलिए अब इन्हें अवैध बताना लोगों के साथ अन्याय है।
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स्थानीय लोग बोले: घर टूटा, तो हम कहा जाएंगे
स्थानीय लोगों की पीड़ा भी इस आंदोलन में साफ झलक रही थी। गुलाब विहार की एक महिला ने कहा, “हमने बच्चों के भविष्य के लिए यहां घर बनाया था। अगर घर ही टूट गया तो हम कहां जाएंगे?” वहीं एक बुजुर्ग ने भावुक होकर कहा, “पूरी जिंदगी की कमाई लगाकर यह मकान बनाया है। अब अगर बुलडोजर चला तो हम सड़क पर आ जाएंगे।”कई लोगों ने यह भी दावा किया कि अदालत के सामने इन कॉलोनियों की वास्तविक स्थिति पूरी तरह नहीं रखी गई है। उनका कहना है कि ये कॉलोनियां अवाप्ति से पहले ही विकसित हो चुकी थीं और आज 80 से 100 प्रतिशत तक बस चुकी हैं।
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व्यापारियों का खुला समर्थन: 2 घंटे बाजार बंद, पैदल मार्च में हुए शामिल
श्योपुर व्यापार मंडल ने भी इस आंदोलन को खुला समर्थन दिया। व्यापारियों ने सुबह 10 से 12 बजे तक बाजार बंद रखा और बड़ी संख्या में व्यापारी भी पैदल मार्च में शामिल हुए। उनका कहना है कि इन कॉलोनियों में रहने वाले हजारों परिवार स्थानीय बाजार से जुड़े हुए हैं और यदि कॉलोनियां उजड़ीं तो इसका असर पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।
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